उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी अपनी खोई हुई सियासी ज़मीन को वापस पाने के लिए संगठन को मज़बूत करने में जुटी है। लेकिन इसी बीच पार्टी के भीतर खींचतान और आपसी कलह ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। गुजरात के अहमदाबाद में हुए कांग्रेस के 84वें अधिवेशन में इस अंदरूनी संघर्ष की तस्वीर साफ़ तौर पर सामने आई।
उम्मीदवार ने लगाया गंभीर आरोप
कांग्रेस के पूर्व लोकसभा प्रत्याशी आलोक मिश्रा ने मौजूदा महानगर अध्यक्ष पवन गुप्ता पर गंभीर आरोप लगाए। अधिवेशन के दौरान मिश्रा ने खुलकर कहा कि पवन गुप्ता संगठन को निजी स्वार्थ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और ज़मीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस की रीति-नीति से भटकने वाले ऐसे नेताओं के चलते पार्टी का जनाधार कमज़ोर हुआ है।
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अध्यक्ष का पलटवार
आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पवन गुप्ता ने भी तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी में अनुशासन का पालन हर नेता को करना चाहिए। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के चलते कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचाना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, गुप्ता ने कहा।
यूपी में चुनौती बड़ी
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की स्थिति बीते दो दशकों से लगातार कमजोर हुई है। ऐसे में पार्टी संगठन को मज़बूत करने और ज़मीनी स्तर पर भरोसा दोबारा हासिल करने की कोशिश कर रही है। लेकिन अंदरूनी खींचतान इस कोशिश पर पानी फेर सकती है। जहाँ एक ओर कांग्रेस यूपी में पुनर्जीवन की राह पर चलने की कोशिश कर रही है, वहीं पार्टी के भीतर की गुटबाज़ी उसकी सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है। आने वाले चुनावों में यह तय होगा कि पार्टी इन अंतर्विरोधों को साधने में कितनी कामयाब होती है।

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