August 25, 2026

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Supreme Court का बड़ा फैसला! 12 साल से कोमा में पड़े 31 वर्षीय मरीज को निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति

Supreme Court

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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 12 वर्षों से कोमा में पड़े 31 वर्षीय मरीज को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति जे.बी. परदीवाला और के.वी. विश्वनाथन की दो सदस्यीय पीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि मरीज की गरिमा और मानवीय संवेदनाओं का ध्यान रखा जाना चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि मरीज को कृत्रिम जीवन रक्षक प्रणाली से हटाने की प्रक्रिया पूरी तरह सुनियोजित और संवेदनशील तरीके से की जाए।

Supreme Court: जाने क्या है पूरा मामला

दरअसल, हरीश राणा नाम का यह युवक वर्ष 2013 में एक इमारत की चौथी मंजिल से गिर गया था, जिसके कारण उसके सिर में गंभीर चोटें आई थीं। हादसे के बाद से वह लगातार कोमा की स्थिति में था और उसकी हालत में सुधार की संभावना बेहद कम बताई गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले इस मामले में एम्स-दिल्ली के डॉक्टरों की रिपोर्ट का अध्ययन किया था और इसे बेहद दुखद स्थिति बताया था। अदालत ने यह भी इच्छा जताई थी कि मरीज के माता-पिता उससे मिल सकें।

मेडिकल रिपोर्ट में कही गई ये बड़ी बात

एम्स-दिल्ली के प्राथमिक और द्वितीयक मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में भी कहा गया था कि मरीज के ठीक होने की संभावना लगभग नगण्य है और उसकी हालत अत्यंत दयनीय है। Supreme Court ने 2023 में जारी दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की राय के बाद ही जीवन रक्षक प्रणाली हटाने का निर्णय लिया जा सकता है। कोर्ट ने एम्स को निर्देश दिया कि मरीज को उपशामक देखभाल (Palliative Care Unit) में स्थानांतरित कर उपचार को चरणबद्ध तरीके से बंद किया जाए, ताकि उसकी गरिमा बनी रहे।

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