अमेरिकी हाउस ओवरसाइट कमेटी द्वारा 2025 में जारी जेफरी एप्सटीन के दस्तावेजों ने भारत की राजनीति में बवाल मचा दिया है। कुख्यात फाइनेंसर एप्सटीन के ईमेल और कैलेंडर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और उद्योगपति अनिल अंबानी के नाम आए हैं। कांग्रेस नेता पृथ्वीराज चव्हाण ने सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि प्रियंका गांधी ने भी सवाल उठाए। हालांकि, इनमें कोई आपराधिक आरोप नहीं है—ये मुख्य रूप से भू-राजनीतिक नेटवर्किंग से जुड़े हैं।
मुख्य खुलासे
दस्तावेजों के मुताबिक, 2019 में एप्सटीन ने ट्रंप के पूर्व रणनीतिकार स्टीव बैनन और मोदी के बीच बैठक कराने की कोशिश की। मोदी की जीत के दिन बैनन का मैसेज: “मोदी पर भारत के लिए शो कर रहा हूं।” एप्सटीन ने जवाब दिया कि फोकस चीन रोकना है और “मोदी ऑन बोर्ड”। लेकिन कोई सबूत नहीं कि बैठक हुई। एप्सटीन खुद को बड़ा दिखाने के लिए नाम ड्रॉप करता था।
एप्सटीन के कैलेंडर में 2014-2017 के बीच पुरी के साथ कम से कम पांच मीटिंग्स का जिक्र है, जो यूएन इवेंट्स और इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूट से जुड़ी थीं। एक ईमेल में “गर्ल्स” वाला हिस्सा वायरल हुआ, लेकिन वह असंबंधित था और पुरी से जुड़ा नहीं। अनिल अंबानी के ईमेल मोदी की अमेरिकी यात्रा और भारत-इजरायल संबंधों पर थे।
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राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि सरकार को जवाब देना चाहिए—मोदी-बैनन कनेक्शन और पुरी की मीटिंग्स पर। कांग्रेस इसे पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है। बीजेपी ने आरोप खारिज किए: “बेबुनियाद नेम ड्रॉपिंग, कोई अपराधी लिंक नहीं।” पुरी की मीटिंग्स यूएन डिप्लोमेसी का हिस्सा थीं।

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