नवरात्रि का पाँचवा दिन समर्पित है माँ स्कंदमाता को। ये वही देवी हैं, जो अपने पुत्र ‘स्कंद’ यानी भगवान कार्तिकेय की माता के रूप में पूजी जाती हैं। माँ स्कंदमाता को सूर्य की ऊर्जा और ज्ञान का प्रतीक माना जाता है। देवी के दर्शन और पूजा से भक्तों का जीवन ज्ञान और शांति से भर जाता है।
माँ स्कंदमाता की पूजा का महत्व
माँ स्कंदमाता की उपासना से जीवन में बुद्धि, शक्ति और मानसिक शांति का वास होता है। देवी की कृपा से घर में सुख-शांति बनी रहती है और संतान का कल्याण होता है। इसके अलावा, माता की पूजा से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
प्रिय रंग और भोग
माँ स्कंदमाता का प्रिय रंग हरा है। इस दिन भक्त हरे वस्त्र पहनकर पूजा करते हैं। देवी को केले का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। केले का प्रसाद माँ को अर्पित करने से घर में सुख-शांति और संतान की रक्षा बनी रहती है।
मंत्र और जाप
माँ स्कंदमाता का बीज मंत्र हैॐ देवी स्कन्दमातायै नम इस मंत्र का जाप करने से मानसिक शक्ति बढ़ती है और जीवन में नई ऊर्जा आती है। भक्त इस दिन सुबह और शाम ध्यान के साथ मंत्र का जाप करते हैं।
पूजा विधि
आज के दिन घर में या मंदिर में माँ स्कंदमाता की मूर्ति या चित्र की स्थापना करें। दीपक जलाएं, हरे फूल चढ़ाएं और केले का भोग अर्पित करें। साथ ही बीज मंत्र का जाप करें। इस विधि से देवी की कृपा प्राप्त होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।नवरात्रि का पाँचवा दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित है। उनकी पूजा से जीवन में उजाला, बुद्धि, शक्ति और शांति का वास होता है। माता की कृपा से संतान की रक्षा, घर में सुख-शांति और मानसिक शक्ति का विकास होता है।माँ स्कंदमाता की कृपा से आपके जीवन में उजाला ही उजाला हो। माता की विशेष कृपा बनी रहे।जय माता दी!

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