August 27, 2026

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दिल्ली दंगा से दिल्ली धमाका तक, कट्टर सोच की जड़ में भड़काऊ माइंडसेट, सुप्रीम कोर्ट में वीडियो पेश

दिल्ली की दो घटनाएं, सोच एक ही: कट्टरपंथ की आग

दिल्ली ने पिछले कुछ वर्षों में दो बड़े झटके देखे 2020 का दिल्ली दंगा2025 का दिल्ली धमाका दोनों घटनाएं अलग-अलग जगह, अलग-अलग तारीखों और अलग-अलग लोगों द्वारा की गईं। एक में आरोपी इंजीनियर, दूसरे में डॉक्टर। लेकिन इनके पीछे जो सोच थी, वह एक ही थी कट्टरपंथ और नफरत से भरी विचारधारा।यह साफ दिखाता है कि हिंसा प्रोफेशन नहीं देखती, मानसिकता देखती है।

सुप्रीम कोर्ट में शरजील इमाम के वीडियो पेश

आज सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में दिल्ली पुलिस ने शरजील इमाम के कई वीडियो क्लिप पेश किए।वीडियो में शरजील देश के अलग-अलग शहरों में लोगों को भड़काता दिखता है चिकन नेक काटने की बात करता है (यानि देश को दो हिस्सों में बांटने की धमकी) सड़कें घेरने, टकराव और अशांति फैलाने की बात करता हैदिल्ली पुलिस का दावा है कि दंगा इन भड़काऊ भाषणों का नतीजा था, यह सिर्फ अचानक हुई हिंसा नहीं, सोची-समझी मानसिक तैयारी का परिणाम था।


कट्टरपंथ सिर्फ घटना नहीं, “माइंडसेट” है

दिल्ली दंगों से लेकर दिल्ली धमाके तक एक बात बिल्कुल साफ है हिंसा पहले दिमाग में जन्म लेती है, फिर सड़कों पर उतरती है।
यह सिर्फ हथियार, पत्थर या बम नहीं, विचार की बीमारी है। इंजीनियर दंगा कर सकता है डॉक्टर धमाका कर सकता है
पढ़ा-लिखा भी ज़हर फैला सकता है क्योंकि समस्या शिक्षा की कमी नहीं, सोच की जहरीली दिशा है।

भड़काऊ भाषण समाज को कितनी जल्दी तोड़ देते हैं

कभी-कभी हम यह मान लेते हैं कि एक भाषण क्या कर सकता है?लेकिन एक भाषण दंगा बन सकता है, एक भाषण बम बन सकता है, एक भाषण समाज को बांट सकता है।बोलने वाले शब्द हवा में उड़ते नहीं, लोगों के दिमाग में विचार बनकर फटते हैं।

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