PM Modi G7 Summit: फ्रांस में भारत को मिली बड़ी अहमियत, कई बैठकों में भागीदारी
वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए अहम माने जाने वाले G7 Summit 2026 में इस बार भारत को विशेष महत्व दिया जा रहा है। फ्रांस ने ईरान के साथ बातचीत और हॉर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने जैसे संवेदनशील मुद्दों पर होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में भारत को आमंत्रित किया है। इस बैठक में मिस्र, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब और अमेरिका जैसे देश भी शामिल होंगे। फ्रांस का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरा है। यही वजह है कि G7 से जुड़े कई महत्वपूर्ण सत्रों और चर्चाओं में भारत की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस दौरान कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे।
आखिर G7 Summit 2026 में भारत को इतनी अहमियत क्यों मिल रही है?
इस बार के G7 Summit 2026 में भारत की भूमिका पहले की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण दिखाई दे रही है। आमतौर पर G7 प्लस देशों को अंतिम चरण की बैठकों में शामिल किया जाता है, लेकिन भारत के मामले में फ्रांस ने अलग रणनीति अपनाई है। फ्रांसीसी नेतृत्व का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की भागीदारी आवश्यक है। आर्थिक विकास, रणनीतिक स्थिरता, तकनीकी नवाचार और वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज के रूप में भारत की बढ़ती भूमिका ने उसकी अहमियत बढ़ाई है। भारत वर्तमान में ब्रिक्स (BRICS) की अध्यक्षता भी कर रहा है, जिसके कारण वैश्विक मंचों पर उसका प्रभाव और बढ़ गया है। यही कारण है कि फ्रांस भारत को केवल एक आमंत्रित देश नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देख रहा है।
हॉर्मुज स्ट्रेट और ईरान पर होने वाली बैठक क्यों है महत्वपूर्ण?
G7 Summit 2026 से पहले 16 जून को होने वाली बैठक को पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हॉर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। हाल के वर्षों में ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बढ़ने के कारण इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। फ्रांस चाहता है कि इस मुद्दे पर क्षेत्रीय देशों और प्रमुख वैश्विक शक्तियों के बीच संवाद मजबूत हो। भारत की ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा भी खाड़ी क्षेत्र से जुड़ा हुआ है। इसलिए हॉर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा और समुद्री व्यापार की निरंतरता भारत के लिए भी रणनीतिक महत्व रखती है। इसी वजह से फ्रांस ने इस चर्चा में भारत को प्रमुख भागीदार बनाया है।
पीएम मोदी किन अहम सत्रों में हिस्सा लेंगे?
G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई महत्वपूर्ण सत्रों में भाग लेने वाले हैं। जानकारी के अनुसार वे सोशल मीडिया के लिए न्यूनतम आयु सीमा (Minimum Age for Social Media) से जुड़े विशेष सत्र में शामिल होंगे। इसके अलावा माइक्रो इकोनॉमिक इम्बैलेंस यानी वैश्विक आर्थिक असंतुलन पर होने वाली चर्चा में भी भारत अपनी राय रखेगा। इस बार पहली बार स्वास्थ्य क्षेत्र को भी G7 एजेंडे में शामिल किया गया है। सुरक्षा, वित्तीय अपराध, अवैध प्रवासन और वैश्विक आर्थिक सहयोग जैसे विषय भी एजेंडे में प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी मुद्दों पर भारत की भागीदारी यह दिखाती है कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में उसकी भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
फ्रांस और भारत के रिश्ते क्यों हो रहे हैं मजबूत?
G7 Summit 2026 के दौरान भारत और फ्रांस के रणनीतिक संबंध भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे। दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों ने Innovation Year 2026 की शुरुआत का भी लक्ष्य रखा है। इसके अलावा 2030 तक फ्रांस में 30,000 भारतीय छात्रों को शिक्षा और वीजा सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, रक्षा सहयोग और नई तकनीकों के विकास में दोनों देशों की साझेदारी भविष्य में और मजबूत हो सकती है। यही कारण है कि फ्रांस भारत को अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों में गिनता है।
रूस-यूक्रेन और मध्य पूर्व पर भारत की क्या भूमिका रहेगी?
G7 Summit 2026 में रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व की स्थिति प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेंगे। इन दोनों विषयों पर G7 देशों के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। भारत ने अब तक रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर संतुलित रुख अपनाया है और लगातार बातचीत के जरिए समाधान की वकालत की है। इसी तरह मध्य पूर्व में भी भारत के कई देशों के साथ मजबूत संबंध हैं। ऐसे में भारत की राय और कूटनीतिक दृष्टिकोण को कई देश महत्वपूर्ण मानते हैं। यही वजह है कि अधिकांश चर्चाओं में भारत की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इससे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती स्वीकार्यता भी दिखाई देती है।
पीएम मोदी और मैक्रों की मुलाकात से क्या उम्मीदें हैं?
G7 Summit 2026 के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच द्विपक्षीय बैठक भी होगी। दोनों नेता कई रणनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार दोनों नेताओं के बीच रक्षा सहयोग, निवेश, तकनीकी साझेदारी और शिक्षा क्षेत्र में सहयोग को लेकर बातचीत हो सकती है। दोनों नेताओं के साथ लंच बैठक भी प्रस्तावित है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी पेरिस में एक प्रमुख टेक्नोलॉजी कॉन्फ्रेंस में भी हिस्सा लेंगे। इससे भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था और तकनीकी क्षमताओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
G7 Summit 2026 के बाद पीएम मोदी के अगले कार्यक्रम क्या हैं?
G7 Summit 2026 में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो देशों के दौरे के अगले चरण में स्लोवाकिया जाएंगे। वहां उनकी मुलाकात स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको से होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा भारत की यूरोप नीति को और मजबूती देगा। फ्रांस और स्लोवाकिया के साथ उच्चस्तरीय बैठकों के जरिए भारत व्यापार, निवेश, तकनीक और रणनीतिक सहयोग के नए अवसर तलाश सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजर G7 Summit 2026 पर है, जहां भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और प्रभाव एक बार फिर केंद्र में रहने वाला है।