राजस्थान
राजस्थान के चूरू जिले के सुजानगढ़ में स्थित दुर्गादत्त फतेहपुरिया राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में एक बड़ा हादसा हुआ। अस्पताल की छत का प्लास्टर अचानक गिर गया, जिसमें एक महिला घायल हो गई। घायल महिला का नाम किरण मेघवाल है, जो पास के गुलरिया गांव की रहने वाली है। यह घटना दोपहर करीब 1: 18 बजे की बताई जा रही है। प्लास्टर सीधे महिला के सिर पर गिरा, जिससे उसे गंभीर चोट लगी और सिर पर दो टांके लगाने पड़े।
घटना के बाद अस्पताल स्टाफ ने संभाला मोर्चा
हादसे के तुरंत बाद अस्पताल के कर्मचारी और सुरक्षा गार्ड मौके पर पहुंचे। घायल महिला को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल के भीतर ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके सिर पर दो टांके लगाए। एहतियात के तौर पर अस्पताल का प्रवेश द्वार कुछ समय के लिए बंद कर दिया गया ताकि अन्य मरीजों और तीमारदारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। किरण मेघवाल अस्पताल के पास स्थित एक मेडिकल स्टोर में कार्यरत हैं और किसी काम से अस्पताल परिसर में आई थीं। घटना के बाद अस्पताल में मौजूद लोगों में दहशत का माहौल बन गया।
बारिश से पहले ही जर्जर इमारत को लेकर दी गई थी चेतावनी
बताया जा रहा है कि अस्पताल भवन लंबे समय से सीपेज और जर्जर हालत की समस्या से जूझ रहा है। लगातार हो रही बारिश के कारण इमारत के कई हिस्सों में नमी और प्लास्टर उखड़ने की शिकायतें सामने आ रही थीं। अस्पताल प्रशासन ने 4 अगस्त को ही सार्वजनिक निर्माण विभाग को पत्र लिखकर भवन की खराब स्थिति और बारिश के चलते संभावित खतरे के बारे में आगाह किया था। इसके बावजूद समय रहते मरम्मत नहीं होने के कारण यह हादसा हो गया। अब सवाल उठ रहे हैं कि यदि समय पर कार्रवाई होती तो इस दुर्घटना को टाला जा सकता था।
सीसीटीवी फुटेज आने के बाद रखरखाव व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस तेज हो गई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला अस्पताल परिसर में मौजूद थी, तभी अचानक छत का प्लास्टर टूटकर उसके ऊपर गिर गया। इस घटना ने सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में भवनों के नियमित निरीक्षण और रखरखाव की आवश्यकता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरीजों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जर्जर भवनों की समय-समय पर मरम्मत होना बेहद जरूरी है।
जांच और मरम्मत की मांग तेज, मरीजों की सुरक्षा बनी सबसे बड़ी प्राथमिकता
हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन और संबंधित विभागों से भवन की तकनीकी जांच कराने तथा आवश्यक मरम्मत कार्य जल्द शुरू करने की मांग उठने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान पुराने और क्षतिग्रस्त सरकारी भवनों का विशेष निरीक्षण किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके। फिलहाल घायल महिला का इलाज जारी है और उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। यह घटना सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और भवन रखरखाव प्रणाली को मजबूत बनाने की आवश्यकता की ओर गंभीर संकेत देती है।