August 26, 2026

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भारत-बांग्लादेश सीमा फेंसिंग! सुरक्षा, जमीन और राजनीतिक टकराव

भारत की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश के साथ लगभग 4,096 किलोमीटर तक फैली है, जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी Border Security Force (BSF) के पास है। हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने घोषणा की है कि सीमा पर बाड़ेबंदी (फेंसिंग) के लिए BSF को जमीन सौंपी जाएगी, जिससे लंबे समय से अटके सुरक्षा कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। अब तक भारत-बांग्लादेश सीमा के करीब 80 प्रतिशत हिस्से में फेंसिंग हो चुकी है, यानी लगभग 3,200 किलोमीटर क्षेत्र सुरक्षित किया जा चुका है, लेकिन अब भी करीब 800 किलोमीटर क्षेत्र बिना बाड़ के है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा पश्चिम बंगाल में आता है, जहां भौगोलिक जटिलताओं और भूमि विवादों के कारण काम धीमा रहा है। सरकार का कहना है कि घुसपैठ और सीमा पार अपराधों को रोकने के लिए यह फेंसिंग बेहद जरूरी है।

पश्चिम बंगाल में देरी की वजहें: जमीन, राजनीति और भौगोलिक चुनौती

विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में लगभग 2,200 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जिसमें से करीब 560 किलोमीटर हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है। देरी की मुख्य वजहों में जमीन अधिग्रहण की जटिल प्रक्रिया, स्थानीय विरोध और घने जंगल, नदियाँ व दलदली इलाके जैसी भौगोलिक बाधाएँ शामिल हैं। कई स्थानों पर सीमावर्ती गांवों के लोग विस्थापन के डर से विरोध करते रहे हैं। साथ ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि राज्य सरकार के असहयोग के कारण काम रुका, जबकि राज्य इसे केंद्र की जिम्मेदारी बताता है। अदालतों में भी यह मामला पहुंचा, जहां कलकत्ता हाईकोर्ट ने समयसीमा तय करते हुए जमीन हस्तांतरण में देरी पर कड़ी नाराजगी जताई और अधिकारियों पर जुर्माना भी लगाया।

अदालतों की सख्ती और सीमा सुरक्षा का भविष्य

Supreme Court of India और Calcutta High Court दोनों ही इस मुद्दे पर सक्रिय रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से फेंसिंग की स्थिति और प्रगति की रिपोर्ट मांगी थी, जबकि हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि बची हुई जमीन BSF को जल्द सौंपी जाए। सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि 1975 के सीमा समझौते के तहत 150 गज के दायरे में निर्माण पर कुछ प्रतिबंध हैं, जिससे भी काम प्रभावित होता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि स्मार्ट फेंसिंग, CCTV और मोशन सेंसर जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से इन चुनौतियों को कम किया जा सकता है। कुल मिलाकर, यह मुद्दा अब सुरक्षा, राजनीति और प्रशासनिक तालमेल की बड़ी परीक्षा बन चुका है, जिसका सीधा असर भारत-बांग्लादेश सीमा प्रबंधन पर पड़ेगा।

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