January 14, 2026

सिंगापुर में भारतीय युवकों को जेल और बेंत की सज़ा, लूट और हमला का मामला

सिंगापुर में छुट्टियां मनाने गए दो भारतीय युवकों की करतूत ने उन्हें सलाखों के पीछे पहुंचा दिया। सिर्फ जेल ही नहीं, बल्कि दर्दनाक बेंत की सज़ा भी सुनाई गई। 23 साल के अरोक्कियासामी डाइसन और 27 साल के राजेंद्रन मायिलारासन को सिंगापुर की अदालत ने पाँच साल एक महीने की कैद और 12 बेंत की सज़ा दी है। ये सजा इस तथ्य की याद दिलाती है कि विदेश में कानून के प्रति लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है।

अपराध की शुरुआत

इन दोनों युवकों ने 24 अप्रैल को भारत से सिंगापुर छुट्टियों के लिए यात्रा की थी। दो दिन बाद लिटिल इंडिया इलाके में एक अनजान शख्स से उनकी मुलाकात हुई, जिसने उन्हें दो महिलाओं के संपर्क दिए। यही वह क्षण था जब उनकी छुट्टियां अपराध की कहानी में बदल गईं।

पहला हमला

पहली महिला से मिलने के लिए दोनों आरोपी होटल पहुंचे। जैसे ही महिला कमरे में आई, आरोपियों ने उसके हाथ-पाँव कपड़ों से बाँध दिए और थप्पड़ मारे। इसके बाद उन्होंने महिला के गहने, 2,000 सिंगापुरी डॉलर नकद, पासपोर्ट और बैंक कार्ड लूट लिए। यह घटना न केवल अपराध बल्कि गंभीर शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की श्रेणी में आती है।

दूसरा हमला

लेकिन आरोपियों की करतूत यहीं नहीं रुकी। उसी रात, उन्होंने दूसरी महिला को भी होटल में बुलाया। जैसे ही महिला कमरे में आई, उसे पकड़कर घसीटा गया और मुंह दबा दिया गया ताकि वह चिल्ला न सके। फिर लूटपाट को अंजाम दिया गया। इस घटना ने सिंगापुर में भारतीय युवकों की छवि को भी झकझोर दिया।

अदालत और सख्त सज़ा

अदालत में दोनों आरोपियों ने अपने अपराध कबूल कर लिए। इसके बाद सिंगापुर की अदालत ने उन्हें पाँच साल एक महीने की जेल और 12 बेंत की सज़ा सुनाई। यह सख्त फैसला विदेश में कानून और सुरक्षा नियमों का पालन न करने वाले लोगों के लिए एक चेतावनी है।

सज़ा और अपराध रोकथाम

इस मामले ने यह सवाल भी उठाया है कि क्या ऐसी सख्त सज़ा ही अपराध रोकने का सबसे असरदार तरीका है? सख्त कानून और सजा निश्चित रूप से एक निवारक कारक हो सकते हैं, लेकिन इसके साथ-साथ युवाओं में जागरूकता और कानून के प्रति सम्मान भी जरूरी है।छुट्टियों का सपना दो युवकों के लिए डरावनी याद में बदल गया। यह घटना सिर्फ उनके लिए नहीं, बल्कि समाज और विदेश यात्रा करने वाले हर व्यक्ति के लिए एक सीख है कि कानून की उपेक्षा की कीमत बहुत भारी हो सकती है।आपको क्या लगता है? क्या सख्त सज़ा ही अपराध रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है? अपनी राय नीचे कमेंट में ज़रूर लिखें

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