September 3, 2026

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Internal conflict intensifies in AAP: राघव चड्ढा पर एक्शन के बाद सवालों की बौछार, केजरीवाल के अगले कदम पर नजर


आम आदमी पार्टी (AAP) में अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। राज्यसभा में उपनेता पद से हटाए जाने के बाद Raghav Chadha ने सवाल उठाए तो पार्टी नेताओं ने उन पर तीखे हमले शुरू कर दिए। हालात ऐसे बन गए हैं कि मामला अब खुली बगावत की ओर बढ़ता दिख रहा है। Arvind Kejriwal के नेतृत्व में पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर चड्ढा को सदन में बोलने का समय न देने की मांग की, जिसे लेकर विवाद और गहरा गया है।

राघव चड्ढा ने एक वीडियो जारी कर पूछा कि क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है? उन्होंने दावा किया कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसके जवाब में पार्टी ने तुरंत पलटवार करते हुए उनके रवैये और प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर दिए।

Internal conflict intensifies in AAP: AAP नेताओं का हमला: ‘मोदी से डर गए’ के आरोप


AAP के नेताओं ने राघव चड्ढा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे असली राजनीतिक मुद्दों से बच रहे हैं। पार्टी के मीडिया प्रमुख अनुराग ढांडा ने आरोप लगाया कि चड्ढा प्रधानमंत्री Narendra Modi के खिलाफ बोलने से डरते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि संसद में सीमित समय होता है, जिसमें देश के बड़े मुद्दे उठाने चाहिए, न कि “एयरपोर्ट पर सस्ते समोसे” जैसे विषय।

वहीं Saurabh Bharadwaj ने भी सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर चड्ढा को घेरा। उन्होंने कहा कि पिछले काफी समय से चड्ढा ने न तो बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए और न ही पार्टी के आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई। भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि जब पार्टी के नेता मुश्किल में थे, तब चड्ढा अनुपस्थित रहे।

Internal conflict intensifies in AAP: स्वाति मालीवाल एपिसोड जैसी स्थिति? पार्टी में भविष्य पर सवाल


AAP के भीतर यह विवाद नया नहीं है। इससे पहले Swati Maliwal के साथ भी टकराव सामने आ चुका है। अब राघव चड्ढा के मामले को उसी कड़ी में देखा जा रहा है। हालांकि, इस बार कार्रवाई अपेक्षाकृत “सॉफ्ट” मानी जा रही है, लेकिन राजनीतिक संकेत बेहद गंभीर हैं।Internal conflict intensifies in AAP

चड्ढा की जगह Ashok Mittal को राज्यसभा में उपनेता बनाया गया है, जिन्होंने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया है। लेकिन अंदरखाने की खबरें बताती हैं कि पार्टी नेतृत्व लंबे समय से चड्ढा की गतिविधियों पर नजर रखे हुए था। स्टार प्रचारकों की सूची से उनका नाम गायब होना और बड़े राजनीतिक मौकों पर उनकी चुप्पी, नेतृत्व के लिए असहज स्थिति बना रही थी।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा तेज है कि राघव चड्ढा भविष्य में पार्टी छोड़ सकते हैं। हालांकि, इस पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल, AAP के भीतर बढ़ता टकराव और सार्वजनिक बयानबाजी यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में पार्टी में बड़ा फैसला हो सकता है।

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