21 जून 2025 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र एक बार फिर ऐतिहासिक पल का गवाह बना। इस विशेष अवसर पर भारतीय सेना (Indian Army), वायुसेना (Indian Air Force) और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने एक साथ मिलकर योग किया और देश को यह संदेश दिया कि “योग सिर्फ साधना नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा का एक माध्यम भी है।”
ईशा योग केंद्र, जो ध्यानलिंग मंदिर और शांत वातावरण के लिए विश्वविख्यात है, आज अनुशासन, आत्मबल और समर्पण का प्रतीक बन गया। यहां हजारों की संख्या में योग साधकों के साथ-साथ हमारे वीर जवानों ने भी सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, वृक्षासन, ताड़ासन और ध्यान जैसी योग क्रियाएं पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ कीं। यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 (International Yoga Day 2025) की सबसे प्रेरणादायक झलकियों में से एक बन गया।
योग, देशभक्ति और अनुशासन का मिलन स्थल बना ईशा योग केंद्र
21 जून 2025 को देश और दुनिया ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। लेकिन इस बार तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र पर जो दृश्य देखने को मिला, वह हर भारतीय के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारतीय सेना, वायुसेना और BSF (सीमा सुरक्षा बल) के जवानों ने एक साथ योग किया और यह साबित कर दिया कि योग सिर्फ व्यायाम नहीं, बल्कि आत्मबल और राष्ट्र सेवा की ऊर्जा है।
जब वीर जवानों ने किया सूर्य नमस्कार और ध्यान
सुबह की पहली किरण के साथ ही ईशा योग केंद्र का वातावरण पूरी तरह योगमय हो गया। हजारों योग साधकों के साथ, जब देश के रक्षक – थलसेना, वायुसेना और BSF के जवान – एक साथ सूर्य नमस्कार, प्राणायाम, वृक्षासन और ध्यान की क्रियाएं करने लगे, तो वो दृश्य किसी अध्यात्मिक उत्सव से कम नहीं था। योग के ज़रिए जवानों ने यह संदेश दिया कि शारीरिक शक्ति के साथ-साथ मानसिक संतुलन भी उतना ही ज़रूरी है।
जवानों के अनुभव: योग से बढ़ती है मानसिक शक्ति
इस अवसर पर कई जवानों ने अपने अनुभव साझा किए। उनका कहना था कि योग ना केवल शरीर को फिट रखता है, बल्कि तनाव को भी दूर करता है। सीमाओं पर लगातार सेवा करते हुए, योग उन्हें मन की शांति और बेहतर एकाग्रता बनाए रखने में मदद करता है। चाहे रेगिस्तान हो या पहाड़, योग हर जगह उनका साथी बना रहता है।
सद्गुरु का मार्गदर्शन: योग से ही राष्ट्र का उत्थान
इस आयोजन का नेतृत्व किया ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु ने। उन्होंने योग को केवल एक शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का साधन बताया। सद्गुरु ने कहा, “जब एक सैनिक योग करता है, तो उसका मन और शरीर दोनों सजग रहते हैं – यही राष्ट्र की असली सुरक्षा है।” इस कार्यक्रम में हजारों लोगों की भागीदारी से यह प्रमाणित हो गया कि योग अब हर वर्ग और क्षेत्र का हिस्सा बन चुका है।
योग: अब सिर्फ परंपरा नहीं, राष्ट्रीय चरित्र का हिस्सा
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2025 ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि योग अब केवल भारत की संस्कृति नहीं, बल्कि इसकी राष्ट्रनीति और समाजनीति का हिस्सा बन चुका है। ईशा योग केंद्र में जवानों की उपस्थिति ने यह बताया कि योग अनुशासन, धैर्य और सेवा भावना को मजबूत करता है।

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