Iran-US tensions peak: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज संकट से वैश्विक तेल बाजार हिला, सैन्य टकराव की आशंका बढ़ी
मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है, जहां ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को आंशिक रूप से बाधित करने के संकेत दिए हैं। यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस कदम ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी हलचल पैदा कर दी है और तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर संकट का कारण बन सकती है। ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ने से कई देशों में महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का खतरा भी बढ़ गया है।
Iran-US tensions peak: अमेरिका-ईरान टकराव और बढ़ती सैन्य गतिविधियां
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ क्षेत्रीय स्तर पर सैन्य दबाव बढ़ा दिया है। अमेरिका-इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन हमलों की रणनीति अपनाई है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिकी प्रशासन ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए पश्चिम एशिया में हजारों मरीन और पैराट्रूपर्स की तैनाती शुरू कर दी है। इसके साथ ही USS Boxer जैसे नौसैनिक संसाधनों को भी क्षेत्र की ओर भेजा जा रहा है। इस पूरे घटनाक्रम को रणनीतिक दबाव और शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

Iran-US tensions peak: ऐतिहासिक संदर्भ और संभावित युद्ध परिदृश्य
विश्लेषकों के अनुसार यह टकराव केवल मौजूदा संकट नहीं, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष की ओर इशारा करता है। इतिहास में अमेरिका की “आइलैंड हॉपिंग रणनीति” और इवो जिमा जैसे सैन्य अभियानों का उदाहरण देते हुए कुछ विशेषज्ञ इसे प्रतीकात्मक सैन्य जीत की संभावनाओं से जोड़ रहे हैं।
हालांकि ईरान की सैन्य क्षमता, उसकी रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) और बसीज मिलिशिया की ताकत को देखते हुए किसी भी जमीनी संघर्ष को बेहद जोखिमपूर्ण माना जा रहा है। खार्ग द्वीप और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक ठिकानों पर हमला क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर बड़े संकट को जन्म दे सकता है।Iran-US tensions peak
वहीं, कूटनीतिक स्तर पर पाकिस्तान की मध्यस्थता से बातचीत की कोशिशें भी जारी बताई जा रही हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत विफल होती है तो यह टकराव सीमित सैन्य कार्रवाई से आगे बढ़कर एक बड़े संघर्ष का रूप ले सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ेगा।
