August 29, 2026

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कुत्तों के लिए ‘जेल की सजा’: उत्तर प्रदेश का अनोखा नियम!

नया कानून: कुत्तों को भी उम्रकैद!

उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐसा फैसला लिया है, जो सुनकर आप चौंक जाएंगे! अब न केवल इंसान, बल्कि कुत्ते भी जेल जा सकते हैं। जी हां, अगर कोई कुत्ता बार-बार इंसानों पर हमला करता है, तो उसे ‘सीरियल ऑफेंडर’ माना जाएगा और सजा होगी—आजीवन कारावास! यह अनोखा नियम प्रयागराज के करेली इलाके में लागू हो चुका है और जल्द ही पूरे प्रदेश में फैलने वाला है। अब कुत्तों को भी चेतावनी है: “भौंक लो, मगर काटना मत… वरना सलाखों के पीछे!”

नियम का आधार: पहली बार काटा, दूसरी बार जेल

उत्तर प्रदेश सरकार के इस नए दिशानिर्देश के अनुसार, अगर कोई कुत्ता बिना उकसावे के किसी इंसान को काटता है, तो उसे 10 दिनों के लिए पशु केंद्र में रखा जाएगा। वहां उसकी नसबंदी की जाएगी (अगर पहले से नहीं हुई हो), माइक्रोचिप लगाई जाएगी, और उसका व्यवहार नोट किया जाएगा। लेकिन अगर वही कुत्ता दूसरी बार बिना उकसावे के काटता है, तो उसे आजीवन पशु केंद्र में कैद कर दिया जाएगा। हां, उसकी रिहाई तभी संभव है, अगर कोई उसे गोद ले ले और यह शपथ दे कि वह उसे फिर से सड़कों पर नहीं छोड़ेगा।

उकसावे की जांच: कमेटी करेगी फैसला

कुत्ते के हमले को उकसाया गया था या नहीं, यह तय करने के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जाएगी। इसमें एक पशु चिकित्सक, एक पशु व्यवहार विशेषज्ञ, और नगर निगम का एक प्रतिनिधि शामिल होगा। अगर कोई व्यक्ति कुत्ते को जानबूझकर उकसाता है, जैसे कि पत्थर मारकर, तो वह हमला उकसाया हुआ माना जाएगा, और कुत्ते को सजा नहीं मिलेगी। इसके बजाय, उकसाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।

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प्रयागराज में बढ़ती समस्या

प्रयागराज में वीधि कुत्तों की समस्या गंभीर होती जा रही है। अनुमान के अनुसार, शहर में 1.15 लाख से अधिक वीधि कुत्ते हैं, और हर महीने 4,000 से ज्यादा काटने की घटनाएं दर्ज हो रही हैं। इन हमलों के कारण सड़क हादसे भी बढ़ रहे हैं। हाल ही में एक बैंक मैनेजर को कुत्ते के पीछा करने के कारण दुर्घटना का सामना करना पड़ा। ऐसे में सरकार का यह कदम जनता की सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

प्रयागराज नगर निगम के पशु चिकित्सा और कल्याण अधिकारी डॉ. विजय अमृतराज के अनुसार, यह नियम आक्रामक कुत्तों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। वे कहते हैं कि कुत्तों को व्यवहार प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि तनाव या उकसावे से होने वाली आक्रामकता को कम किया जा सके। यह नियम न केवल जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि कुत्तों को क्रूरता से मारने के बजाय उन्हें पशु केंद्रों में रखने पर जोर देता है।

भौंकने की आजादी, काटने की मनाही

यह नियम निश्चित रूप से एक अनोखा कदम है, जो पशु कल्याण और मानव सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता है। लेकिन यह सवाल भी उठता है कि क्या यह नियम कुत्तों की आबादी और काटने की घटनाओं को नियंत्रित करने में पूरी तरह प्रभावी होगा? गांव और शहरों में गश्त बढ़ाने और नसबंदी कार्यक्रमों को और तेज करने की जरूरत है। तब तक कुत्तों को संदेश है: “भौंक लो जितना चाहो, लेकिन काटने की आजादी अब नहीं!”

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