विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की हाल ही में हुई बैठक में बिना किसी का नाम लिए अमेरिका पर अप्रत्यक्ष रूप से कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “विकास को खतरे में डालकर शांति स्थापित नहीं की जा सकती।” जयशंकर के इस बयान में वैश्विक नीति और अंतरराष्ट्रीय न्याय पर केंद्रित स्पष्ट संदेश था।
वैश्विक दक्षिण देशों पर बढ़ती महंगाई का मुद्दा
जयशंकर ने दोहरे मापदंडों की निंदा करते हुए यह भी कहा कि वैश्विक दक्षिण देशों पर ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा बोझ पड़ा है। उनका कहना था कि विकासशील देशों को अक्सर असमान परिस्थितियों में रहकर दुनिया की नीतियों का सामना करना पड़ता है।
मौजूदा संघर्ष और सप्लाई चेन पर असर
विदेश मंत्री ने मौजूदा वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स को प्रभावित किया है, जिससे हालात और मुश्किल हो गए हैं। उनका संदेश साफ था — आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है।
संवाद और कूटनीति की अपील
जयशंकर ने जोर देकर कहा कि दुनिया को अब टकराव नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश, जो दोनों पक्षों के साथ बातचीत कर सकते हैं, उन्हें शांति कायम करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण
विदेश मंत्री 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। यहां वे वैश्विक शांति, विकास और समान अवसरों की दिशा में भारत की स्थिति को और मजबूती से रखेंगे। यह भाषण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता को भी दर्शाएगा।

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