August 26, 2026

Abstar News

Latest News, Breaking News & Updates

कालाष्टमी 2026: श्रावण की कालाष्टमी, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व, उपाय और इस दिन क्या करें

कालाष्टमी 2026

कालाष्टमी 2026

कालाष्टमी 2026: हिंदू धर्म में कालाष्टमी का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान शिव के रौद्र स्वरूप कालभैरव को समर्पित होता है। पंचांग के अनुसार श्रावण मास की कालाष्टमी 5 अगस्त 2026, बुधवार को मनाई जा रही है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान कालभैरव की विधि-विधान से पूजा करने से भय, संकट, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधा से मुक्ति मिलती है। श्रावण मास स्वयं भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है, इसलिए इस महीने आने वाली कालाष्टमी का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। देशभर के शिव और कालभैरव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। श्रद्धालु व्रत रखकर सुख, समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

क्या है कालाष्टमी? जानें भगवान कालभैरव से जुड़ी धार्मिक मान्यता

कालाष्टमी भगवान शिव के उग्र और न्यायप्रिय स्वरूप कालभैरव की आराधना का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान कालभैरव को समय का स्वामी, न्याय का रक्षक और काशी का कोतवाल माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति के साथ कालाष्टमी का व्रत रखते हैं, उन्हें ग्रह दोष, भय, अकाल मृत्यु के संकट और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा प्राप्त होती है। कालभैरव की उपासना जीवन में साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। यही कारण है कि इस दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भैरव मंदिरों में दर्शन करने पहुंचते हैं और भगवान से अपने जीवन की बाधाएं दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

Read More: Chor Panchak 2026: चोर पंचक आज कब खत्म होगा? फिर सावन में निडर होकर करें धन से जुड़े ये काम

कालाष्टमी के दिन ऐसे करें पूजा, ये आसान उपाय दिलाएंगे शुभ फल

कालाष्टमी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और कालभैरव का ध्यान करते हुए पूजा प्रारंभ करें। पूजा में सरसों के तेल का दीपक जलाएं, काले तिल, फूल, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। यदि संभव हो तो कालभैरव अष्टक का पाठ भी करें। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना, जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या काले तिल का दान देना और मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इन उपायों से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

कालाष्टमी पर क्या करें और किन बातों से बचें?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन क्रोध, झूठ, नशा और किसी का अपमान करने से बचना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन ग्रहण करना और यथासंभव संयम का पालन करना शुभ माना जाता है। श्रद्धालुओं को भगवान शिव और कालभैरव का स्मरण करते हुए गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता करनी चाहिए। यदि संभव हो तो कालभैरव मंदिर में जाकर दर्शन करें और परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए प्रार्थना करें। शाम के समय सरसों के तेल का दीपक जलाकर भगवान कालभैरव की आरती करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और संकट दूर होते हैं।

भक्ति, श्रद्धा और आत्मविश्वास का पर्व है कालाष्टमी

कालाष्टमी केवल एक धार्मिक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, अनुशासन और ईश्वर के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक भी है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक की गई पूजा व्यक्ति के मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती है। मान्यता है कि भगवान कालभैरव अपने भक्तों की रक्षा करते हैं और उन्हें कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति देते हैं। हालांकि पूजा-पद्धति और परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न हो सकती हैं, इसलिए श्रद्धालु अपने परिवार की परंपरा या योग्य आचार्य के मार्गदर्शन के अनुसार पूजा करें। श्रद्धा, सेवा और सदाचार के साथ मनाई गई कालाष्टमी आध्यात्मिक उन्नति और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करने वाला पावन पर्व मानी जाती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.