कर्नाटक की राजनीति में हाल ही में बड़ा धमाका हुआ है। राज्य सरकार के लिए यह खबर शर्मिंदगी का कारण बनी, जब ऊर्जा मंत्री केजे जॉर्ज के विशेष कार्याधिकारी (OSD) ज्योति प्रकाश को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। 50 वर्षीय ज्योति प्रकाश, जो केपीटीसीएल में कार्यकारी अभियंता भी हैं, शनिवार शाम बेंगलुरु में लोकायुक्त की जाँच के दौरान जाल में फँस गए।
रिश्वत मांगने का मामला
सूत्रों के अनुसार, ज्योति प्रकाश ने एक निजी डेवलपर से बिजली की मंजूरी के लिए एनओसी (No Objection Certificate) जारी करने के बदले 1 लाख रुपये की रिश्वत माँगी थी। शिकायतकर्ता, अनंतराजू नामक युवक ने हिम्मत दिखाई और सीधे लोकायुक्त को सूचना दी। इसके बाद लोकायुक्त ने जाल बिछाया और ज्योति प्रकाश को 50 हज़ार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ा।
कार चालक भी शामिल
इस मामले में केवल ज्योति प्रकाश ही नहीं, बल्कि उनका कार चालक नवीन एम भी शामिल था। दोनों को तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। लोकायुक्त की टीम ने कहा कि अब आगे की जांच में फोन रिकॉर्ड, नकदी और अन्य सबूतों की गहन जाँच की जा रही है।
सरकारी सिस्टम की पोल खुली
यह मामला दिखाता है कि सरकारी सिस्टम के अंदर भ्रष्टाचार की कितनी गहरी जड़ें हैं। जब ऊर्जा मंत्री के ऑफिस तक में रिश्वत की बू आती है, तो आम जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है। लोकायुक्त की कार्रवाई ने यह साबित कर दिया कि अगर सही समय पर कड़ी कार्रवाई की जाए, तो भ्रष्टाचार को रोका जा सकता है।
लोकायुक्त की कार्रवाई और सार्वजनिक प्रतिक्रिया
लोकायुक्त की इस कार्रवाई की जनता में काफी सराहना हो रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि किस तरह से सरकारी अफसर अपनी पावर का गलत इस्तेमाल करके लोगों से पैसा वसूलते हैं। यह मामला सिर्फ ज्योति प्रकाश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को उजागर करता है।
