लद्दाख में 24 सितंबर 2025 को हुए हिंसक प्रदर्शन ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। लेह में शांतिपूर्ण आंदोलन अचानक हिंसा में बदल गया, जिसमें 4 लोगों की मौत और 70 से अधिक घायल हुए। केंद्र सरकार ने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया है। लेकिन आखिर सोनम वांगचुक हैं कौन, और यह विवाद क्या है? आइए जानते हैं।
सोनम वांगचुक: एक प्रेरक व्यक्तित्व
सोनम वांगचुक (जन्म: 1 सितंबर 1966, लेह) लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। गांधीवादी सिद्धांतों से प्रेरित वांगचुक ने लद्दाख की चुनौतियों को नवाचारों से हल किया है। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई भारत और विदेशों में की और स्थानीय संसाधनों के उपयोग पर जोर दिया। उनकी उपलब्धियां लद्दाख को वैश्विक पहचान दिलाती हैं।

पर्यावरण और शिक्षा में योगदान
वांगचुक ने 2013 में आइस स्टूपा बनाया, जो कृत्रिम हिमनद के रूप में गर्मियों में पानी की कमी को पूरा करता है। यह नवाचार सूखे क्षेत्रों के लिए क्रांतिकारी है। इसके अलावा, उन्होंने 1988 में SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की, जो लद्दाखी युवाओं को सौर ऊर्जा, जल संरक्षण और स्थानीय संस्कृति पर आधारित शिक्षा देता है। 2018 में उन्हें रैमन मैगसेसे पुरस्कार मिला, और उनकी कहानी आमिर खान की फिल्म 3 Idiots में ‘रंगू’ किरदार से प्रेरित है।
लद्दाख प्रदर्शन: मांगें और तनाव
2019 में अनुच्छेद 370 हटने के बाद लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश बना, लेकिन स्थानीय लोग विधानसभा, नौकरियों और भूमि अधिकारों की कमी से नाराज हैं। उनकी मुख्य मांगें हैं:
- पूर्ण राज्य का दर्जा और अलग लोकसभा सीटें।
- संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण।
- स्थानीय नौकरियां और पर्यावरण संरक्षण।
वांगचुक ने 10 सितंबर 2025 से 35 दिनों का अनशन शुरू किया, जो 24 सितंबर को हिंसक हो गया। दो बुजुर्ग प्रदर्शनकारियों की हालत बिगड़ने की खबर ने युवाओं को सड़कों पर उतारा। प्रदर्शनकारियों ने बीजेपी कार्यालय और सरकारी इमारतों पर हमला किया, जिसके जवाब में पुलिस ने गोलीबारी की।
हिंसा के आरोप: सच क्या है?
केंद्र सरकार ने वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया। गृह मंत्रालय का दावा है कि उन्होंने “अरब स्प्रिंग” और “नेपाल के Gen Z प्रदर्शन” का जिक्र कर युवाओं को उकसाया। सरकार का कहना है कि बातचीत चल रही थी, लेकिन वांगचुक ने अनशन जारी रखा। दूसरी ओर, वांगचुक ने हिंसा की निंदा की और कहा, “यह युवाओं की बेरोजगारी और वादाखिलाफी से उपजी हताशा है।” उन्होंने अनशन तोड़ा और शांति की अपील की। X पर कुछ लोग उन्हें “लद्दाख का गांधी” कहते हैं, तो कुछ “विदेशी साजिश” का हिस्सा बताते हैं।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक ने लद्दाख के लिए अभूतपूर्व काम किया, लेकिन वर्तमान विवाद ने उनकी छवि को प्रभावित किया है। लद्दाख में 18% से अधिक बेरोजगारी और अधूरे वादों ने तनाव बढ़ाया है। केंद्र ने बातचीत का आश्वासन दिया है, और लेह में कर्फ्यू लागू है। यह घटना बताती है कि विकास और स्थानीय अधिकारों में संतुलन जरूरी है। क्या यह आंदोलन शांति की ओर बढ़ेगा? समय बताएगा।

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