August 26, 2026

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CBSE पोर्टल पर बड़ा साइबर हमला: लाखों छात्रों की सेवाओं को निशाना बनाने की कोशिश, लेकिन सिस्टम रहा सुरक्षित

देश की डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को उस समय बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा जब केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड Central Board of Secondary Education (CBSE) के पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज पोर्टल पर लगातार तीन दिनों तक साइबर हमले की कोशिश की गई। यह वही पोर्टल है जहां लाखों छात्र 12वीं बोर्ड रिजल्ट के बाद री-वैल्यूएशन और वेरिफिकेशन जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं का उपयोग करते हैं। इस हमले ने न केवल तकनीकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई, बल्कि छात्रों की डिजिटल निर्भरता पर भी सवाल खड़े कर दिए। हालांकि शुरुआती जांच में यह साफ हुआ कि यह हमला सिस्टम को बाधित करने की एक संगठित कोशिश थी, न कि कोई सामान्य तकनीकी खराबी।

पोस्ट-रिजल्ट पोर्टल बना निशाना, लगातार भेजा गया मैलिशियस ट्रैफिक

रिपोर्ट्स के मुताबिक यह पोर्टल 2 जून 2026 को लॉन्च किया गया था ताकि छात्रों को रिजल्ट के बाद की प्रक्रियाएं सरल और पूरी तरह डिजिटल रूप में मिल सकें। लेकिन लॉन्च के कुछ ही दिनों बाद इस सिस्टम पर भारी मात्रा में “मैलिशियस ट्रैफिक” भेजा जाने लगा। जांच में सामने आया कि देश और विदेश दोनों जगहों से कई IP एड्रेस के जरिए यह साइबर हमला किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य सिस्टम को स्लो करना, पोर्टल को डाउन करना और असली उपयोगकर्ताओं को सेवा से वंचित करना था। विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक कोऑर्डिनेटेड और सोफिस्टिकेटेड साइबर अटैक था, जिसे साधारण तकनीकी गड़बड़ी नहीं माना जा सकता।

डेटा सुरक्षा पर भी की गई कोशिश, लेकिन नहीं हुई कोई सेंध

इस पूरे मामले में सबसे गंभीर पहलू यह सामने आया कि हमलावरों ने केवल सिस्टम को बाधित करने की ही नहीं, बल्कि कुछ मामलों में अनधिकृत तरीके से डेटा तक पहुंचने की भी कोशिश की। हालांकि Central Board of Secondary Education ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का डेटा लीक या हैकिंग सफल नहीं हुई। यानी छात्रों का व्यक्तिगत और शैक्षणिक डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहा। यह बात लाखों छात्रों और अभिभावकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, क्योंकि शिक्षा से जुड़े डेटा की सुरक्षा बेहद संवेदनशील मानी जाती है।

एजेंसियां हुईं सक्रिय, साइबर सुरक्षा तंत्र ने संभाला मोर्चा

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए CBSE ने तुरंत कई प्रमुख साइबर सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट किया। इसमें IIT कानपुर, IIT मद्रास, डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन, I4C और CERT-In जैसी संस्थाएं शामिल रहीं। इन सभी एजेंसियों ने 24×7 निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया के जरिए इन हमलों को सफलतापूर्वक रोक दिया। इस संयुक्त प्रयास के चलते सिस्टम को किसी भी बड़े नुकसान से बचा लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना भारत की साइबर सुरक्षा तैयारियों की एक बड़ी परीक्षा थी, जिसमें सिस्टम ने काफी हद तक मजबूती दिखाई।

जांच जारी, साइबर हमले के पीछे कौन? उठ रहे बड़े सवाल

फिलहाल इस पूरे मामले की जांच दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट कर रही है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि आखिर इस बड़े पैमाने पर साइबर हमला किसने और क्यों किया। क्या यह किसी संगठित समूह की साजिश थी या फिर किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा—इस पर अभी स्पष्टता नहीं है। हालांकि राहत की बात यह है कि तमाम कोशिशों के बावजूद Central Board of Secondary Education का डिजिटल सिस्टम सुरक्षित बना रहा। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि साइबर दुनिया में चुनौती सिर्फ हमलों को रोकने की नहीं, बल्कि भरोसे और स्थिरता को बनाए रखने की भी है।

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