मऊ सदर उपचुनाव: बृजेश सिंह की दावेदारी और अंसारी परिवार का वर्चस्व

चंदौली हत्याकांड और बृजेश सिंह का सफर

9 अप्रैल 1986 को चंदौली के सिकरारा गांव में ग्राम प्रधान रामचंद्र यादव और उनके परिवार के सात लोगों की जघन्य हत्या ने पूरे पूर्वांचल को हिला दिया था। इस मामले में बाहुबली बृजेश सिंह का नाम सामने आया। गिरफ्तारी के बाद जमानत पर रिहा हुए बृजेश 2008 में ओडिशा से फिर पकड़े गए। 2018 में सत्र न्यायालय और 2023 में हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। इस साल सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित पक्ष की अपील स्वीकार की, जिससे मामला फिर चर्चा में है। बृजेश की बरी होने की खबरों ने उनकी चुनावी राजनीति में एंट्री की अटकलों को हवा दी। हालांकि वह पहले एमएलसी रह चुके हैं, लेकिन कभी चुनाव नहीं लड़े।

अंसारी परिवार का मऊ पर दबदबा

मऊ सदर सीट पर 1996 से मुख्तार अंसारी का वर्चस्व रहा। 2022 में उनके बेटे अब्बास अंसारी ने सुभासपा के टिकट पर जीत हासिल की। लेकिन हेट स्पीच मामले में अब्बास को सजा और उनकी विधायकी रद्द होने से यह सीट खाली हो गई। इसके बाद अंसारी परिवार के उमर अंसारी पर नजरें टिकीं, लेकिन उनकी हालिया गिरफ्तारी ने समीकरण बदल दिए। अब सवाल है कि अंसारी परिवार से कौन उम्मीदवार होगा या कोई नया चेहरा उभरेगा?

मऊ में बीजेपी की चुनौती

मऊ सदर सीट पर बीजेपी कभी जीत नहीं पाई। मुस्लिम बाहुल्य इस सीट पर पार्टी ने कई बार मुख्तार अब्बास नकवी को उतारा, लेकिन सफलता नहीं मिली। 1957 और 1963 में कांग्रेस, 1968 में जनसंघ, फिर क्रमशः भारतीय क्रांति दल, सीपीआई, जनता पार्टी और निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। 1996 से 2017 तक मुख्तार अंसारी ने इस सीट पर कब्जा जमाए रखा। अब खाली हुई इस सीट पर बीजेपी की रणनीति चर्चा का विषय है।

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बृजेश सिंह की दावेदारी और गैंगवार की पृष्ठभूमि

बृजेश सिंह की मऊ सदर से दावेदारी की चर्चा ने राजनीति को गर्म कर दिया है। बृजेश और अंसारी परिवार के बीच गैंगवार का इतिहास रहा है, जिसमें कई जानें जा चुकी हैं। बृजेश की जीत न केवल उनकी राजनीतिक उपस्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि पूर्वांचल में वर्चस्व का संदेश भी देगी।

बीजेपी और सुभासपा का रणनीतिक गठजोड़

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी बृजेश सिंह को सुभासपा के जरिए समर्थन दे सकती है, जैसा कि 2022 में अब्बास अंसारी के साथ हुआ था। सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने मऊ सीट पर अपनी दावेदारी जताई है। उन्होंने बृजेश सिंह सहित कई बाहुबलियों से अच्छे संबंध होने की बात कही। क्या बीजेपी इस बार बृजेश के जरिए मऊ में भगवा लहराएगी? यह उपचुनाव पूर्वांचल की सियासत का टर्निंग पॉइंट हो सकता है।

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