August 29, 2026

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मोदी-जिनपिंग मुलाकात: भारत-चीन संबंधों में नई उम्मीद

तियानजिन में ऐतिहासिक मुलाकात

चीन का तियानजिन शहर रविवार को भारत और चीन के बीच एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक मुलाकात का गवाह बना। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई द्विपक्षीय वार्ता ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया। पीएम मोदी ने सात साल बाद चीन की इस यात्रा के लिए राष्ट्रपति शी का आभार जताया और कहा कि आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर दोनों देश अपने रिश्तों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। चीनी राष्ट्रपति ने भी इस मुलाकात में एशिया की दो महाशक्तियों के बीच दोस्ती और अच्छे पड़ोसी बनने की आवश्यकता पर जोर दिया।

गर्मजोशी के बावजूद गले क्यों नहीं मिले?

इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर एक-दूसरे का स्वागत किया, लेकिन गले मिलने की गर्मजोशी नजर नहीं आई। यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या दोनों देशों के बीच पहले जैसी गर्मजोशी कम हो गई है? हाल के वर्षों में भारत-चीन संबंधों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। खासकर 2020 में पूर्वी लद्दाख में सीमा तनाव के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था। इसके बावजूद, हालिया ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और इस मुलाकात ने रिश्तों में सुधार की उम्मीद जगाई है।

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सात साल बाद पीएम मोदी का चीन दौरा

प्रधानमंत्री मोदी सात साल बाद चीन पहुंचे, और तियानजिन में उनका भव्य स्वागत हुआ। रेड कार्पेट बिछाकर और विशेष आतिथ्य के साथ चीन ने इस दौरे की अहमियत को रेखांकित किया। यह दौरा भारत-चीन संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दोनों देशों के बीच विमानों की सीधी उड़ानें और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसे कदम इस दिशा में सकारात्मक संकेत हैं।

वैश्विक पृष्ठभूमि में अहम वार्ता

यह मुलाकात वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक बदलावों के बीच हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ नीतियों का प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ऐसे में भारत और चीन जैसे दो बड़े देशों का सहयोग न केवल द्विपक्षीय, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है। पीएम मोदी ने कहा कि पिछले साल कजान में हुई उनकी और शी जिनपिंग की मुलाकात ने संबंधों को सकारात्मक दिशा दी। सीमा पर शांति और सैनिकों की वापसी ने स्थिरता का माहौल बनाया है।

प्रमुख मुद्दों पर चर्चा

वार्ता के दौरान पीएम मोदी ने कई अहम मुद्दों पर जोर दिया। उन्होंने सीमा प्रबंधन पर विशेष प्रतिनिधियों के बीच बनी सहमति, कैलाश मानसरोवर यात्रा की बहाली और सीधी उड़ानों की शुरुआत का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के सहयोग से 2.8 अरब लोगों के हित जुड़े हैं, जो वैश्विक कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। पीएम मोदी ने एससीओ समिट की सफल अध्यक्षता के लिए भी शी जिनपिंग को बधाई दी।

भविष्य की उम्मीदें

यह मुलाकात भारत-चीन संबंधों में एक नई शुरुआत का प्रतीक है। दोनों नेताओं ने आपसी विश्वास और सहयोग को बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच यह मुलाकात न केवल द्विपक्षीय संबंधों, बल्कि एशिया और विश्व की शांति और समृद्धि के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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