NASA Solar Storm Alert: NASA और Space Weather Prediction Center ने एक शक्तिशाली सौर तूफान (Solar Storm) को लेकर चेतावनी जारी की है, जो जून 2026 में पृथ्वी से टकरा सकता है। यह तूफान सूर्य के सक्रिय क्षेत्र में हुए M1.8 श्रेणी के सोलर फ्लेयर और कोरोनल मास इजेक्शन (CME) के कारण उत्पन्न हुआ है। इस विस्फोट के बाद सूर्य से निकला अत्यधिक तेज़ गति वाला चुंबकीय प्लाज्मा बादल लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना इस वर्ष की सबसे शक्तिशाली सौर गतिविधियों में से एक मानी जा रही है। इसे G3 से लेकर G4 श्रेणी के भू-चुंबकीय तूफान के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जो पृथ्वी के मैग्नेटिक फील्ड पर बड़ा असर डाल सकता है।
NASA Solar Storm Alert: पृथ्वी और तकनीक पर क्या होगा असर?
जब यह सौर तूफान पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर से टकराएगा, तो इसका असर सीधे हमारी तकनीकी प्रणालियों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह तूफान रेडियो सिग्नल, GPS नेविगेशन, मोबाइल नेटवर्क और बिजली ग्रिड को प्रभावित कर सकता है। कुछ क्षेत्रों में सैटेलाइट कम्युनिकेशन में भी बाधा आने की संभावना है। यदि चुंबकीय दिशा अनुकूल नहीं रही तो पृथ्वी की सुरक्षा ढाल अस्थायी रूप से कमजोर हो सकती है, जिससे सौर ऊर्जा सीधे वायुमंडल में प्रवेश कर सकती है। हालांकि, इसके साथ एक सकारात्मक पहलू भी है, उत्तरी और उच्च अक्षांश वाले क्षेत्रों में खूबसूरत ऑरोरा (Aurora Borealis) और भारत के उत्तरी हिस्सों में भी हल्की आकाशीय रोशनी देखने की संभावना जताई गई है।
क्या यह खतरे की घंटी है या प्राकृतिक घटना?
वैज्ञानिकों का कहना है कि सौर तूफान कोई असामान्य या नई घटना नहीं है, बल्कि यह सूर्य की प्राकृतिक गतिविधियों का हिस्सा है। लेकिन जब ये तूफान अत्यधिक शक्तिशाली होते हैं, तो वे पृथ्वी के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पर प्रभाव डाल सकते हैं। NASA लगातार इस पर नजर बनाए हुए है और अंतरिक्ष मौसम की निगरानी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं क्योंकि सूर्य इस समय अपने सक्रिय सौर चक्र के चरम पर है। इसलिए वैज्ञानिक समुदाय इन घटनाओं को समझने और उनके प्रभाव को कम करने के लिए लगातार शोध कर रहा है।