August 25, 2026

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Nitish Kumar’s political suspense: MLC से इस्तीफा तय, लेकिन मुख्यमंत्री पद और उत्तराधिकारी पर बड़ी उलझन

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा मोड़ आता दिख रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। यह कदम उनके हाल ही में राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। नियमों के अनुसार, एक व्यक्ति एक साथ दो सदनों का सदस्य नहीं रह सकता, इसलिए नीतीश को 14 दिनों के भीतर किसी एक सदन से इस्तीफा देना अनिवार्य है।
इसी क्रम में नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्यता बनाए रखने का निर्णय लिया है और अब वे विधान परिषद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। हालांकि, इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद को लेकर सस्पेंस बरकरार है, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

Nitish Kumar’s political suspense: मुख्यमंत्री बने रहने या इस्तीफे पर सस्पेंस, संविधान क्या कहता है?

संविधान विशेषज्ञों और विधानसभा से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, राज्यसभा सांसद होने के बावजूद कोई व्यक्ति मुख्यमंत्री पद पर छह महीने तक रह सकता है, बशर्ते वह राज्य विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बन जाए। इसी कारण यह भी माना जा रहा है कि नीतीश कुमार फिलहाल मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं।
बिहार विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार के बयान के अनुसार, बिना निर्वाचित सदस्य हुए भी कोई व्यक्ति 6 महीने तक मुख्यमंत्री रह सकता है। ऐसे में नीतीश कुमार के पास संवैधानिक विकल्प मौजूद हैं, लेकिन राजनीतिक संकेत कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। दिल्ली राजनीति की ओर उनके झुकाव और हालिया बैठकों ने अटकलों को और तेज कर दिया है।

Nitish Kumar’s political suspense: उत्तराधिकारी की तलाश और NDA में नया सत्ता समीकरण

सबसे बड़ा सवाल अब नीतीश कुमार के सियासी उत्तराधिकारी को लेकर खड़ा हो गया है। भाजपा और जेडीयू के बीच नए मुख्यमंत्री के चयन पर मंथन तेज हो गया है। भाजपा की ओर से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा है, जबकि पार्टी के भीतर कई अन्य नामों पर भी विचार चल रहा है।
वहीं, जेडीयू खेमे में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। कुछ नेताओं का मानना है कि निशांत भविष्य में पार्टी और सरकार दोनों में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
एनडीए के सहयोगी दलों—लोजपा (राम विलास), HAM और राष्ट्रीय लोक मोर्चा—की सहमति भी नए मुख्यमंत्री के चयन में अहम भूमिका निभाएगी। जेडीयू का साफ रुख है कि नया नेतृत्व वही होना चाहिए जो नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और सामाजिक समीकरणों को आगे बढ़ा सके।Nitish Kumar’s political suspense
फिलहाल बिहार की राजनीति एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां आने वाले दिनों में न सिर्फ मुख्यमंत्री पद, बल्कि पूरे सत्ता संतुलन की तस्वीर बदल सकती है।

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