संसद के मॉनसून सत्र में हंगामा, गतिरोध समाप्ति की ओर

संसद के मॉनसून सत्र में हंगामे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को लगातार पांचवें दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी। विपक्षी दलों ने बिहार में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर जमकर नारेबाजी और प्रदर्शन किया। इस हंगामे के कारण दोनों सदनों में शून्यकाल, प्रश्नकाल और अन्य विधायी कामकाज प्रभावित हुए। 21 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र में गतिरोध की स्थिति बनी हुई थी, जिसके चलते संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही थी।

सरकार और विपक्ष के बीच मध्यस्थता की कोशिश

लगातार हंगामे को देखते हुए सत्तापक्ष ने गतिरोध को समाप्त करने के लिए सक्रिय कदम उठाए। केंद्रीय संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने इस मामले में पहल करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस मुलाकात में संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने पर चर्चा हुई। इसके बाद रिजिजू और संसदीय कार्य राज्यमंत्री अर्जुन मेघवाल ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात की। इन बैठकों का उद्देश्य संसद में उत्पन्न गतिरोध को खत्म करना और दोनों पक्षों के बीच सहमति स्थापित करना था।

सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के नेतृत्व में शुक्रवार को दिन में 12:30 बजे एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में सभी दलों के फ्लोर लीडर्स ने हिस्सा लिया और संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने पर सहमति जताई। विपक्ष ने भी सदन को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी सहमति दे दी। इस बैठक के बाद यह माना जा रहा है कि संसद में चल रहा गतिरोध अब समाप्त हो गया है। इस सहमति के तहत सोमवार को लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर चर्चा होगी, जो विपक्ष द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों में से एक है।

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आगे की राह और संसद की कार्यवाही

मॉनसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्ष विभिन्न मुद्दों पर तत्काल चर्चा की मांग करता रहा है, जिसके कारण संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों ने विपक्ष को आक्रामक रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, सर्वदलीय बैठक के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि संसद की कार्यवाही सुचारू रूप से चलेगी। सोमवार को होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट होगा कि क्या दोनों पक्ष सहमति के आधार पर संसद के कामकाज को आगे बढ़ा पाएंगे। यह सत्र न केवल विधायी कामकाज के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि देश के विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए भी अहम माना जा रहा है।

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