S Jaishankar
S Jaishankar: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक संतुलन के जरिए अपने हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की है. Subrahmanyam Jaishankar ने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे भारतीय झंडे वाले जहाजों के लिए ईरान के साथ कोई नया समझौता नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि हर भारतीय जहाज को अलग-अलग अनुमति दी जा रही है और यह प्रक्रिया दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे भरोसे और सहयोग का परिणाम है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और तेल बाजार पर दबाव बढ़ा है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी रणनीतिक जलमार्ग से गुजरता है।
S Jaishankar: जाने जयशंकर ने क्या कुछ कहा
जयशंकर ने एक इंटरव्यू में कहा कि भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के बदले भारत ने ईरान को कोई विशेष लाभ नहीं दिया है। उनके मुताबिक यह किसी प्रकार का लेन-देन नहीं बल्कि भारत और Iran के बीच पुराने संबंधों और संवाद की कूटनीति का परिणाम है। पिछले सप्ताह दो भारतीय झंडाधारी एलपीजी टैंकरों को हॉर्मुज से गुजरने की अनुमति मिली थी। यह अनुमति Narendra Modi और Masoud Pezeshkian के बीच हुई फोन पर बातचीत के कुछ ही घंटे बाद दी गई थी। इसके अलावा जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री Abbas Araghchi के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई।
ईरान ने भी अपना रुख किया साफ
ईरान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि Strait of Hormuz केवल अमेरिका और इस्राइल से जुड़े जहाजों के लिए बंद है, जबकि अन्य देशों के जहाजों को अनुमति दी जा सकती है। इस बीच Donald Trump ने सहयोगी देशों से हॉर्मुज की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की थी, लेकिन जापान और ऑस्ट्रेलिया समेत कई देशों ने इससे दूरी बनाई। ऐसे माहौल में भारत ने सैन्य विकल्प के बजाय संवाद की रणनीति अपनाई है, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार की सुरक्षा बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
