दक्षिण कश्मीर के सबसे लोकप्रिय टूरिस्ट डेस्टिनेशनों में से एक, पहलगाम की शांत और हसीन वादियों में उस वक़्त अफरा-तफरी मच गई, जब बैसरन के घास के मैदानों में कुछ ही पलों में सन्नाटा छा गया। पर्यटक जहां सुकून की तलाश में पहुंचे थे, वहीं अचानक गोलियों की आवाज़ों ने सब कुछ बदल दिया। सूत्रों के मुताबिक, ये हमला जम्मू-कश्मीर में आम नागरिकों को निशाना बनाकर किए गए हाल के वर्षों के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक है। घटना में एक दर्जन से ज़्यादा पर्यटक घायल हो गए हैं, जिनमें कई की हालत नाज़ुक बताई जा रही है।
हमले के वक्त क्या हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि लोग कैमरों में नज़ारे कैद कर रहे थे, बच्चे घास पर खेल रहे थे और कुछ पर्यटक घोड़ों की सवारी का आनंद ले रहे थे। तभी अचानक फायरिंग शुरू हुई और चीख-पुकार मच गई। चारों तरफ भगदड़ मच गई और बैसरन की हरियाली खून से लाल हो गई।
इलाके में सर्च ऑपरेशन जारी
हमले के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया है और सर्च ऑपरेशन जारी है। स्थानीय प्रशासन और सेना इस बात की जांच कर रही है कि हमलावर किस संगठन से जुड़े हैं और उनका निशाना क्या था।
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पर्यटन पर असर और डर का माहौल
पहलगाम को ‘मिनी स्विट्जरलैंड’ कहा जाता है और हर साल हजारों पर्यटक यहां आते हैं। लेकिन इस हमले के बाद लोगों में डर और असुरक्षा का माहौल है। घाटी में टूरिज़्म को बढ़ावा देने की कोशिशों को भी इस घटना से बड़ा झटका लग सकता है।
जवाबदेही जरूरी है
सरकार और सुरक्षाबलों से लोग यह सवाल पूछ रहे हैं — आखिर ऐसे संवेदनशील पर्यटन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था इतनी ढीली क्यों है? क्या आम नागरिकों और पर्यटकों की जान इतनी सस्ती हो गई है?घायलों के जल्द ठीक होने की दुआ के साथ, पूरे देश की निगाहें अब कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था पर टिकी हैं।
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