उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विदेशी निवेश को आकर्षित करने और प्रदेश को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे आयोजनों के माध्यम से यूपी को निवेश के लिए आकर्षक स्थल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। साथ ही, वैश्विक टैरिफ चुनौतियों से निपटने के लिए भी बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य विदेशी पूंजी को आकर्षित करना, रोजगार सृजन करना और प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।
चीन प्लस वन रणनीति: निवेश का नया द्वार
योगी सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए चीन प्लस वन रणनीति को अपनाया है। यह वैश्विक व्यापार रणनीति मल्टीनेशनल कंपनियों को प्रोत्साहित करती है कि वे अपनी मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन को केवल चीन पर निर्भर न रखें, बल्कि अन्य देशों में भी विस्तार करें। उत्तर प्रदेश इस रणनीति का लाभ उठाने के लिए तैयार है, जहां सस्ता और कुशल श्रम, विशाल घरेलू बाजार और अनुकूल नीतियां उपलब्ध हैं। सरकार ने अब तक अमेरिका, जापान, जर्मनी, फ्रांस, स्विट्जरलैंड, डेनमार्क, चीन और स्पेन की 200 से अधिक कंपनियों के साथ बातचीत की है। इनमें अमेरिका और जर्मनी से 30-30, जापान से 20, चीन से 14, फ्रांस और स्विट्जरलैंड से 7-7, डेनमार्क से 6 और स्पेन से 5 कंपनियां शामिल हैं। भारतीय दूतावासों और अन्य संस्थाओं के सहयोग से इन लीड्स को वास्तविक निवेश में बदलने का प्रयास जारी है।
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निवेश प्रोत्साहन और पीएलआई परियोजनाएं
उत्तर प्रदेश सरकार ने निवेश को बढ़ावा देने के लिए विशेष टीमें और कंट्री-स्पेसिफिक डेस्क बनाए हैं। भारत सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना के तहत 574 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 70 कंपनियां पहले से ही उत्तर प्रदेश में कार्यरत हैं। इसके अलावा, 11 कंपनियों के पास नए प्रोजेक्ट हैं और 20 कंपनियों ने राज्य सरकार के साथ एमओयू साइन किए हैं। सरकार 473 अन्य कंपनियों के साथ लगातार संपर्क में है ताकि और अधिक निवेश को आकर्षित किया जा सके।
निवेशकों के लिए विशेष सुविधाएं
विदेशी निवेशकों को सहूलियत देने के लिए यूपी सरकार ने फॉर्च्यून 500 और इंडिया नेक्स्ट 500 से जुड़ी 814 कंपनियों के लिए समर्पित अकाउंट मैनेजर नियुक्त किए हैं। इनमें शिपिंग, शिप बिल्डिंग, टेलीकॉम, पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल, इंश्योरेंस और पब्लिक सेक्टर बैंक जैसी कंपनियां शामिल हैं। यह कदम निवेशकों को सहज और त्वरित सेवाएं प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
15,525 करोड़ के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी
औद्योगिक निवेश एवं रोजगार प्रोत्साहन नीति 2022 के तहत हाई लेवल एम्पावर्ड कमिटी और इम्पावर्ड कमिटी की बैठकों में 15,525 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों को लेटर ऑफ कंफर्ट की मंजूरी दी गई है। यह लेटर निवेशकों को नीतिगत प्रोत्साहन और समर्थन प्रदान करता है, जिससे निवेश प्रक्रिया को गति मिलती है।
यूपी में रोजगार के नए अवसर
योगी सरकार की इन पहलों से न केवल विदेशी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। सस्ता श्रम, विशाल बाजार और अनुकूल नीतियों के साथ उत्तर प्रदेश मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह पर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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