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  • उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: इंडिया गठबंधन ने गी सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, ममता बनर्जी की चली

    उपराष्ट्रपति चुनाव 2025: इंडिया गठबंधन ने गी सुदर्शन रेड्डी को बनाया उम्मीदवार, ममता बनर्जी की चली

    देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद यानी उपराष्ट्रपति के चुनाव के लिए विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ने अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। कांग्रेस की अगुवाई वाले इस गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश गी सुदर्शन रेड्डी को अपना साझा उम्मीदवार चुना है। इस फैसले के पीछे तृणमूल कांग्रेस (TMC) की प्रमुख ममता बनर्जी की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।

    एनडीए की ओर से तमिलनाडु से भाजपा के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन के नाम की घोषणा पहले ही की जा चुकी है। ऐसे में इंडिया गठबंधन की ओर से तमिल बनाम तमिल मुकाबले से बचने के लिए रणनीतिक फैसला लिया गया है।

    गैर-राजनीतिक चेहरे पर सहमति

    सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की बैठकों में कई नामों पर चर्चा हुई थी।

    • एनसीपी ने महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी का नाम प्रस्तावित किया था।
    • डीएमके ने अपने वरिष्ठ नेता तिरुचि शिवा को मैदान में उतारने की कोशिश की।
    • वहीं एक नाम पूर्व इसरो वैज्ञानिक एम. अन्नादुरई का भी चर्चा में रहा।

    लेकिन आखिरकार ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने जोर दिया कि विपक्ष को एक गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष छवि वाले व्यक्ति को उम्मीदवार बनाना चाहिए। उनका यह भी तर्क था कि यदि विपक्ष तमिलनाडु से ही किसी नेता को मैदान में उतारता है, तो मुकाबला तमिल बनाम तमिल बन जाएगा, जिससे भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

    ममता बनर्जी की निर्णायक भूमिका

    TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने गठबंधन की बैठक में स्पष्ट रूप से कहा कि उपराष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद के लिए राजनीति से दूर व्यक्ति को ही चुना जाना चाहिए।
    उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को NDA के जाल में नहीं फंसना चाहिए, जिसमें वे क्षेत्रीय समीकरणों के आधार पर सियासी लाभ उठाना चाहते हैं।

    TMC की इस दलील को कांग्रेस, एनसीपी और अन्य दलों ने भी अंततः स्वीकार कर लिया और गी सुदर्शन रेड्डी के नाम पर सर्वसम्मति बन गई।

    गी सुदर्शन रेड्डी कौन हैं?

    गी सुदर्शन रेड्डी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं और वे न्यायपालिका में अपनी निष्पक्षता, निष्कलंक छवि और ईमानदारी के लिए जाने जाते हैं। वे राजनीति से दूर रहे हैं और सार्वजनिक जीवन में उनकी प्रतिष्ठा बहुत मजबूत रही है। विपक्ष को उम्मीद है कि एक साफ-सुथरी छवि वाला उम्मीदवार NDA के खिलाफ एक मजबूत नैतिक चुनौती पेश करेगा।

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    टीएमसी की बदली भूमिका

    2022 में हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में TMC ने वोटिंग से दूरी बनाई थी और उस वक्त कांग्रेस उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को बड़ा झटका लगा था। TMC ने तब आरोप लगाया था कि उम्मीदवार तय करते समय उनसे सलाह नहीं ली गई थी।

    लेकिन इस बार TMC पूर्ण सक्रियता के साथ गठबंधन की बैठकों में शामिल रही और न केवल उम्मीदवार के चयन में बल्कि चुनावी रणनीति तय करने में भी मुख्य भूमिका निभाई।

  • कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप केस: सियासत गरम, TMC पर बीजेपी का बड़ा हमला

    कोलकाता लॉ कॉलेज गैंगरेप केस: सियासत गरम, TMC पर बीजेपी का बड़ा हमला

    कोलकाता के प्रतिष्ठित लॉ कॉलेज में एक छात्रा से गैंगरेप की घटना ने न केवल राज्य को हिला कर रख दिया है, बल्कि इसके चलते राजनीतिक हलचल भी तेज हो गई है। अब तक इस मामले में चार लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जिनमें एक कॉलेज का सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल है, जो घटना के वक्त ड्यूटी पर था।

    इस दर्दनाक मामले ने कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने इस मुद्दे पर टीएमसी सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने घटना को “राज्य में महिलाओं की असुरक्षा” का प्रतीक बताया और सीधा सवाल पूछा – “जहां एक महिला मुख्यमंत्री हैं, वहां छात्राओं के साथ ऐसी बर्बरता क्यों?”

    मुख्य आरोपी TMC से जुड़ा

    बीजेपी का आरोप है कि गैंगरेप का मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा टीएमसी की छात्र इकाई का पूर्व सचिव और कॉलेज का पूर्व छात्र है। वह वकालत करता है और टीएमसी नेताओं के साथ उसकी कई तस्वीरें सामने आई हैं।
    अन्य आरोपियों में जैब अहमद और प्रमीत मुखर्जी शामिल हैं, जो लॉ कॉलेज के मौजूदा छात्र हैं।

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    पीड़िता की चिट्ठी ने खोली दर्द की परतें

    संबित पात्रा ने पीड़िता द्वारा लिखे गए नोट का हवाला देते हुए बताया कि किस तरह सात लड़कों ने पीड़िता को घेरा और उसे प्रेम प्रस्ताव ठुकराने की सजा दी।
    घटना गार्ड रूम के अंदर हुई, जहां सिक्योरिटी गार्ड मौजूद था लेकिन उसे बाहर भेज दिया गया।
    पीड़िता पर हॉकी स्टिक से हमला किया गया और उसे अस्पताल तक नहीं ले जाया गया।

    ममता सरकार पर बीजेपी का सीधा निशान

    बीजेपी नेताओं ने इस केस को लेकर ममता बनर्जी की चुप्पी पर भी सवाल खड़े किए हैं।
    बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने चार सदस्यीय जांच समिति बनाई है जो घटना स्थल का दौरा कर पार्टी को रिपोर्ट सौंपेगी।
    पार्टी का कहना है कि ममता सरकार को इस जघन्य अपराध की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए।

    सुवेंदु अधिकारी का तीखा बयान

    विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता के शासन में कोई भी महिला सुरक्षित नहीं है।
    उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी बार-बार ऐसे मामलों को “छोटी घटना” बता कर टाल देती हैं और आरोपियों को संरक्षण देती हैं
    उन्होंने राज्य की जनता से अपील की कि वे इस अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाएं और लोकतंत्र की रक्षा करें।

  • ममता बनर्जी का पीएम मोदी को करारा जवाब, बंगाल पर बयानबाजी पर रोक

    ममता बनर्जी का पीएम मोदी को करारा जवाब, बंगाल पर बयानबाजी पर रोक

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। हाल ही में पीएम मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार पर लगाए गए आरोपों और ऑपरेशन सिंदूर एवं आतंकवाद के मुद्दों पर किए गए बयानों को ममता ने न केवल स्तब्ध करने वाला बताया, बल्कि इसे दुर्भाग्यपूर्ण भी कहा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल के खिलाफ इस प्रकार की बयानबाजी बिलकुल स्वीकार्य नहीं है और यह केंद्र सरकार की “बांटो और राज करो” की राजनीति का हिस्सा है।

    ममता बनर्जी ने बताया कि विपक्षी दल देश के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अपने भतीजे और टीएमसी के वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी का उदाहरण देते हुए कहा कि वे विदेशों में आतंकवाद के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहे हैं। ममता ने कहा कि पीएम मोदी विपक्ष को दोषी ठहराकर और ऑपरेशन सिंदूर जैसे मामलों को राजनीतिक रंग देकर भाजपा को एक “जुमला पार्टी” के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

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    ममता बनर्जी का पीएम मोदी पर हमला, दी चुनावी चुनौती

    मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी पर झूठ बोलने और देश की जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पीएम मोदी की नीति हमेशा से बांटने और राज करने की रही है। ऑपरेशन सिंदूर का नामकरण भी उनकी राजनीतिक चाल है।” हालांकि, उन्होंने इस मामले पर कोई विस्तृत टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि हर महिला का सम्मान होना चाहिए और इस तरह की बयानबाजी अनुचित है।

    ममता बनर्जी ने पीएम मोदी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें हिम्मत है, तो वे ‘ऑपरेशन बंगाल’ के तहत चुनाव मैदान में उतरें। उन्होंने जोर देकर कहा कि बंगाल की जनता उनकी चुनौती स्वीकार करने के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही उन्होंने कहा कि पूरे विपक्ष के आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार का समर्थन करने के समय पीएम मोदी का बंगाल की आलोचना करना अनुचित है।

    “बंगाल पर बयानबाजी से ममता नाराज, पीएम को दी चुनौती”

    वहीं, दूसरी ओर पीएम मोदी ने अलीपुरद्वार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए टीएमसी सरकार पर हमला किया। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता टीएमसी सिस्टम पर विश्वास खो चुकी है और अब केवल न्यायालय पर भरोसा करती है। पीएम ने नारा दिया, “बंगाल में मची चीख-पुकार, नहीं चाहिए निर्मम सरकार।” इस पर ममता ने कहा कि यह बयान बंगाल के लोगों का अपमान है और केंद्र की नीतियां केवल राजनीतिक स्वार्थ के लिए हैं।

    ममता बनर्जी ने यह भी साफ किया कि उनकी सरकार आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार के साथ है, लेकिन केंद्र सरकार की मंशा स्पष्ट नहीं है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के नामकरण पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे जानबूझकर राजनीतिक कारणों से चुना गया है। ममता ने यह भी कहा कि उनकी सरकार हमेशा बंगाल के लोगों के हितों को सर्वोपरि रखती है और किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार है।

    यह विवाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है। ममता बनर्जी और टीएमसी ने केंद्र सरकार के खिलाफ एक सशक्त और मुखर प्रतिरोध का संदेश दिया है। वहीं, भाजपा और पीएम मोदी की रणनीति बंगाल में टीएमसी के शासन को कमजोर करने की दिशा में स्पष्ट नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह राजनीतिक संघर्ष किस दिशा में बढ़ता है।

  • पीएम मोदी का ममता सरकार पर हमला: भ्रष्टाचार और कुप्रशासन को लेकर तीखा प्रहार

    पीएम मोदी का ममता सरकार पर हमला: भ्रष्टाचार और कुप्रशासन को लेकर तीखा प्रहार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने हालिया पश्चिम बंगाल दौरे में राज्य की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राज्य में फैलते भ्रष्टाचार, कुप्रशासन और सरकारी योजनाओं के गलत क्रियान्वयन को लेकर ममता बनर्जी की सरकार की तीखी आलोचना की। पीएम मोदी ने जनता से अपील की कि वे अब इस ‘निर्मम शासन’ के खिलाफ आवाज उठाएं और राज्य को भ्रष्टाचार के अंधकार से बाहर निकालें।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने शिक्षक भर्ती घोटाले का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि इस घोटाले ने न केवल युवाओं के भविष्य को बर्बाद किया, बल्कि कई परिवारों को आर्थिक और मानसिक संकट में डाल दिया। उन्होंने कहा कि यह घोटाला टीएमसी सरकार के भ्रष्ट शासन की असली तस्वीर पेश करता है, जिसमें नौकरियों के नाम पर पैसे की खुली लूट की गई।

    पीएम मोदी का टीएमसी पर आरोप

    पीएम मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि टीएमसी सरकार में ‘कट-मनी’ और ‘कमीशन’ की संस्कृति को संस्थागत रूप दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार में बैठे नेता और अधिकारी जनता की गाढ़ी कमाई को लूट रहे हैं और आम लोगों के विकास की कोई परवाह नहीं कर रहे। यह व्यवस्था गरीबों और मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि टीएमसी की नीतियों के कारण पश्चिम बंगाल का विकास रुक गया है। जहां कभी यह राज्य शिक्षा, संस्कृति और नवाचार का केंद्र हुआ करता था, आज वहां भ्रष्टाचार और राजनीतिक हिंसा का बोलबाला है। उन्होंने कहा कि यह समय है जब जनता को जागरूक होकर लोकतंत्र की ताकत से बदलाव लाना चाहिए।

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    PM मोदी: बंगाल गौरवशाली, पर शासन ने छवि धूमिल की

    मोदी ने पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह राज्य देश का गौरव है। लेकिन वर्तमान शासन ने इसकी छवि को धूमिल कर दिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार बंगाल के विकास के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और राज्य की जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने केंद्र सरकार की योजनाओं का भी जिक्र किया, जैसे कि आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि आदि। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं देशभर में गरीबों के जीवन में बदलाव ला रही हैं, लेकिन पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार इनके क्रियान्वयन में अड़चनें खड़ी कर रही है, जिससे राज्य की जनता को इनका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।

    PM मोदी का आह्वान: बंगाल में बदलाव लाएं युवा और जनता

    पीएम मोदी ने युवाओं और शिक्षकों से खासतौर पर अपील की कि वे इस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ खड़े हों और बदलाव की आवाज बुलंद करें। उन्होंने कहा कि आज जरूरत है एक ऐसी सरकार की जो जनता के हित में काम करे, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दे और बंगाल को फिर से उसकी खोई हुई गरिमा दिला सके।

    अंत में, प्रधानमंत्री ने बंगाल की जनता से आह्वान किया कि वे इस भ्रष्ट और जनविरोधी शासन को हटाकर एक नए युग की शुरुआत करें, जहां विकास, न्याय और जनकल्याण को सर्वोपरि माना जाए।

  • सीएम ममता बनर्जी का तीखा हमला, योगी आदित्यनाथ को बताया सबसे बड़ा भोगी

    सीएम ममता बनर्जी का तीखा हमला, योगी आदित्यनाथ को बताया सबसे बड़ा भोगी

    लोकसभा चुनावी संग्राम के बीच नेताओं के तीखे शब्दबाण लगातार सामने आ रहे हैं। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बड़ा हमला बोला है।  एक चुनावी रैली के दौरान ममता बनर्जी ने योगी को “देश का सबसे बड़ा भोगी” करार देते हुए कहा कि “जो खुद संन्यासी होने का दावा करते हैं, वो सत्ता के भोग में सबसे आगे हैं।

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    ममता बनर्जी का बयान

    जो खुद को त्यागी कहते हैं वो असल में सबसे बड़े भोगी हैं। जनता को धर्म के नाम पर गुमराह किया जा रहा है। ये चुनाव देश की आत्मा बचाने का चुनाव है।हालांकि  योगी आदित्यनाथ की ओर से अब तक इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन भाजपा खेमे में हलचल बढ़ गई है। हाल के दिनों में बंगाल और यूपी में चुनावी बयानबाज़ी तेज़ हुई है। टीएमसी और बीजेपी के बीच लगातार जुबानी जंग देखने को मिल रही है। ममता बनर्जी का यह बयान इसी सिलसिले की एक कड़ी माना जा रहा है।

    क्या बोले लोग

    सोशल मीडिया पर इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। कुछ लोग ममता बनर्जी की स्पष्टवादिता की सराहना कर रहे हैं । तो वहीं बीजेपी समर्थक इसे अभद्र भाषा बता रहे हैं।

  • “योगी सबसे बड़े भोगी हैं”—ममता बनर्जी का तीखा हमला, वक्फ हिंसा पर गरमाई सियासत

    “योगी सबसे बड़े भोगी हैं”—ममता बनर्जी का तीखा हमला, वक्फ हिंसा पर गरमाई सियासत

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच वक्फ अधिनियम को लेकर शुरू हुई जुबानी जंग अब तूल पकड़ चुकी है। मुर्शिदाबाद में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा पर टिप्पणी करते हुए योगी आदित्यनाथ ने जहां बंगाल को “जलता हुआ राज्य” बताया और ममता बनर्जी पर “दंगाइयों को संरक्षण” देने का आरोप लगाया, वहीं ममता ने आज करारा पलटवार करते हुए कहा, “योगी सबसे बड़े भोगी हैं।”

    ममता का पलटवार: योगी पर ‘महाकुंभ’ और ‘मुठभेड़ों’ का तंज

    कोलकाता में इमामों की एक सभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा,
    “योगी बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, लेकिन वह सबसे बड़े भोगी हैं। महाकुंभ में भगदड़ से कितनी मौतें हुईं, इसकी कोई चर्चा नहीं करता। उत्तर प्रदेश में मुठभेड़ों में न जाने कितनी जाने गई हैं। वहां की सरकार रैलियां भी नहीं निकालने देती, जबकि बंगाल में सभी को आजादी है।”

    ममता ने ये भी जोड़ा कि योगी आदित्यनाथ ‘धर्मनिरपेक्षता’ की बात करते हुए बंगाल को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन बंगाल में जो हो रहा है वह लोगों की भावनाओं का स्वाभाविक उभार है। उन्होंने यूपी सरकार के ‘कठोर रवैये’ की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतंत्र में “डंडा” कोई समाधान नहीं हो सकता।

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    योगी आदित्यनाथ का बयान: “दंगाइयों के लिए डंडा ही इलाज”

    योगी आदित्यनाथ ने मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था,
    “बंगाल जल रहा है और वहां की मुख्यमंत्री चुप हैं। वह दंगाइयों को ‘शांति दूत’ कह रही हैं। लातों के भूत बातों से नहीं मानते। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर दंगाइयों को छूट दी जा रही है।”

    उन्होंने साफ किया कि उत्तर प्रदेश में जो मॉडल अपनाया गया है, वह दंगों पर पूरी तरह लगाम लगाने वाला मॉडल है, और पश्चिम बंगाल को उससे सीखना चाहिए।

    भाजपा की प्रतिक्रिया: “ममता ने दंगाइयों को पाला”

    योगी आदित्यनाथ की टिप्पणियों के समर्थन में उत्तर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा,
    “योगीजी ने जो कहा, वह सच्चाई है। ममता बनर्जी को यह बात इसलिए चुभी क्योंकि उन्होंने इन दंगाइयों को संरक्षण दिया है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ ने राज्य को दंगा-मुक्त बनाया है। ममता को उत्तर प्रदेश मॉडल से सीखना चाहिए।”

    भाजपा नेताओं का मानना है कि बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है और सरकार जानबूझकर आंखें मूंदे बैठी है।

    सुवेंदु अधिकारी का समर्थन: “योगी बंगाल आकर जनता को करें संबोधित”

    बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी योगी आदित्यनाथ के बयान का समर्थन किया और कहा,
    “मैं योगीजी का आभार व्यक्त करता हूं कि उन्होंने बंगाल में अराजकता के खिलाफ खुलकर बोला। NHRC और NCW का भी धन्यवाद जिन्होंने बंगाल की स्थिति पर संज्ञान लिया।”
    उन्होंने यह भी मांग की कि योगी आदित्यनाथ को बंगाल आकर लोगों को सच्चाई बतानी चाहिए।

    क्या है वक्फ संशोधन अधिनियम विवाद?

    वक्फ अधिनियम में केंद्र सरकार द्वारा किए गए संशोधनों को लेकर देश के कई हिस्सों में मुस्लिम समुदाय में असंतोष देखा जा रहा है। बंगाल में इस अधिनियम के विरोध में प्रदर्शन के दौरान मुर्शिदाबाद में हिंसा भड़क उठी। इसके बाद भाजपा ने राज्य सरकार पर कड़ी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया।

    राजनीतिक टकराव या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण?

    ममता बनर्जी और योगी आदित्यनाथ की यह राजनीतिक जंग केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए दोनों राज्यों की राजनीतिक दिशा और ध्रुवीकरण को भी एक दिशा मिलती दिखाई दे रही है। एक तरफ भाजपा ‘कानून व्यवस्था’ और ‘सख्ती’ के नाम पर वोटर को साधने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ ममता बनर्जी ‘धर्मनिरपेक्षता’ और ‘स्वतंत्रता’ की भाषा बोलकर अपनी साख मजबूत करने की कोशिश कर रही हैं।

    योगी बनाम ममता की यह सियासी जंग फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रही। एक तरफ योगी आदित्यनाथ बंगाल की स्थिति पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं ममता बनर्जी उनकी कार्यशैली पर तीखा हमला कर रही हैं। दोनों के बयानों से साफ है कि 2024 के बाद भी 2025 की सियासत में यह टकराव एक बड़ी कहानी बन चुका है—जहां ‘डंडे की राजनीति’ बनाम ‘जनता की आज़ादी’ का विमर्श लगातार गर्माता जा रहा है।

  • लंदन में ममता बनर्जी का प्रदर्शनकारियों, आरजी कार और संदेशखली को लेकर उठे सवाल

    लंदन में ममता बनर्जी का प्रदर्शनकारियों, आरजी कार और संदेशखली को लेकर उठे सवाल

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लंदन दौरे के दौरान ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के केलॉग कॉलेज में प्रदर्शनकारियों के विरोध का सामना करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने आरजी कार मेडिकल कॉलेज विवाद और संदेशखली हिंसा को लेकर उनसे तीखे सवाल पूछे।

    क्या है पूरा मामला?

    ममता बनर्जी लंदन में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं, जब कुछ लोगों के एक समूह ने उनसे पश्चिम बंगाल में कथित चुनाव बाद की हिंसा और आरजी कर मेडिकल कॉलेज विवाद को लेकर सवाल किए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है और राज्य सरकार इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है।

    अमित मालवीय ने वीडियो किया साझा

    बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि प्रदर्शनकारियों में शामिल लोग बंगाली हिंदू समुदाय के थे, जिन्होंने ममता बनर्जी से ऑक्सफोर्ड में तीखे सवाल पूछे।

    मालवीय ने ट्वीट किया  ममता बनर्जी को लंदन में भी विरोध का सामना करना पड़ा। बंगाल में जिस तरह से हिंसा और अराजकता फैली है, उसकी गूंज अब विदेशों में भी सुनाई देने लगी है।

    आरजी कर मेडिकल कॉलेज विवाद क्या है?

    कोलकाता के प्रसिद्ध आरजी कर मेडिकल कॉलेज में छात्र आंदोलन और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर भारी विवाद हुआ था। छात्रों ने हॉस्टल और कॉलेज प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था, जिसे लेकर सरकार की आलोचना हो रही थी।

    संदेशखली हिंसा पर सवाल

    प्रदर्शनकारियों ने संदेशखली हिंसा पर भी ममता बनर्जी से जवाब मांगा। संदेशखली में भूमि विवाद, तृणमूल नेताओं पर महिलाओं के उत्पीड़न के आरोप और हिंसा को लेकर ममता सरकार पहले से ही विपक्ष के निशाने पर है।

    टीएमसी का पलटवार

    तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस विरोध प्रदर्शन को बीजेपी की साजिश करार दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि ममता बनर्जी जहां भी जाती हैं, बीजेपी उनके खिलाफ दुष्प्रचार करने की कोशिश करती है।

    टीएमसी प्रवक्ता ने कहा यह विरोध सुनियोजित था। बीजेपी चाहती है कि बंगाल की छवि खराब हो लेकिन लोग सच्चाई जानते हैं।

    क्या है सियासी मायने?

    ममता बनर्जी को लंदन में हुए इस विरोध का सामना ऐसे समय में करना पड़ा है, जब पश्चिम बंगाल में 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी लगातार राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रही है और अब अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी यह बहस छिड़ गई है। अब देखना होगा कि इस घटना का बंगाल की राजनीति पर क्या असर पड़ता है और ममता बनर्जी इस मुद्दे पर क्या जवाब देती हैं।