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  • BJP: जल्द होगा बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव! Nitin Naveen राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बेहद करीब!

    BJP: जल्द होगा बीजेपी अध्यक्ष का चुनाव! Nitin Naveen राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बेहद करीब!

    BJP: राजनीतिक गलियारें से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की पूरी तस्वीर साफ हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, यह ऐतिहासिक चुनाव इसी महीने पूरा किया जाएगा। जिसके बाद बीजेपी को अपना नया नेतृत्व मिल जाएगा। वहीं इस खबर को सामने आते ही देश भर मे सियासी हलचल तेज़ हो गई है। और लोग बीजेपी के नए अध्यक्ष के नाम जानने के लिए उत्सुक है। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर। अधिक और पूरी जानकारी के लिए हमारी इस खबर को अंतच तक जरूर पढ़े.

    BJP के वरिष्ट नेता निभाएंगे बड़ी भूमिका

    जानकारी के लिए बता दे कि 19 जनवरी को नामांकन प्रक्रिया पूरी होगी, और 20 जनवरी को मतदान और बैलेट की गिनती के बाद नए राष्ट्रीय अध्यक्ष का नाम घोषित किया जाएगा। यह चुनाव बीजेपी के भविष्य की राजनीति और अगले चुनावी रोडमैप के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों की मानें तो इस चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत करीब 10 वरिष्ठ नेता प्रस्तावक की भूमिका निभाएंगे। यानी यह कोई आम चुनाव नहीं, बल्कि पार्टी के बड़े निर्णय का क्षण है। अब बात करते हैं सबसे चर्चा में रहे नाम की, नितिन नवीन। BJP सूत्रों ने साफ किया कि फिलहाल उनकी दावेदारी सबसे मजबूत है। अगर उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाता है, तो वे सबसे युवा अध्यक्ष बनेंगे। उनका कार्यकाल जनवरी 2029 तक रहेगा, हालांकि लोकसभा चुनाव के कारण इसे आगे बढ़ाए जाने की संभावना भी है।

    जाने कौन है नितिन नवीन?

    नितिन नवीन बिहार सरकार में वर्तमान में सड़क निर्माण मंत्री हैं। बांकीपुर विधानसभा सीट से लगातार पांच बार विधायक चुने जा चुके हैं। उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा भी बीजेपी के वरिष्ठ नेता रह चुके हैं। राजनीति उनके लिए सिर्फ पेशा नहीं, परिवार की विरासत भी है। बीजेपी के संगठनात्मक चुनाव देशभर में लगभग पूरे हो चुके हैं। 37 में से 29 राज्यों में आंतरिक चुनाव अंतिम चरण में हैं। प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय परिषद के सदस्य नितिन नवीन के समर्थन में नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। BJP पार्टी की संविधान प्रक्रिया के अनुसार, चुनाव इलेक्टोरल कॉलेज के माध्यम से होगा। अब बस आधिकारिक ऐलान का इंतजार है। और हम आपको इस पर हर अपडेट तुरंत बताएंगे।

  • असम विधानसभा ने बहुविवाह पर लगाई सख्ती: 10 साल जेल और जुर्माना, UCC की ओर पहला कदम

    असम विधानसभा ने बहुविवाह पर लगाई सख्ती: 10 साल जेल और जुर्माना, UCC की ओर पहला कदम

    असम विधानसभा ने 27 नवंबर 2025 को ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ‘असम बहुविवाह निषेध विधेयक, 2025’ को पारित कर दिया। यह विधेयक बहुविवाह को अपराध घोषित करता है, जिसमें दोषी को अधिकतम 7 साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। अगर कोई अपनी पहली शादी छिपाकर दूसरी करता है, तो सजा 10 साल तक बढ़ सकती है। पीड़ित महिलाओं के लिए 1 लाख रुपये तक का मुआवजा और कानूनी संरक्षण का प्रावधान भी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इसे महिलाओं के अधिकारों की रक्षा का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में पहला कदम है। लेकिन क्या यह विधेयक वाकई सामाजिक न्याय लाएगा या सियासी रंग ले लेगा?

    विधेयक की मुख्य विशेषताएं: सख्त सजाएं और महिलाओं का संरक्षण

    असम बहुविवाह निषेध विधेयक बहुविवाह को पूरी तरह प्रतिबंधित करता है। इसके तहत पहली शादी के दौरान दूसरी शादी करने वाले को 7 साल की कैद और जुर्माना। अगर विवाह के समय मौजूदा शादी छिपाई जाती है, तो सजा 10 साल तक हो सकती है। दोबारा अपराध करने पर सजा दोगुनी। विधेयक में काजी, गांव के मुखिया या अभिभावक जो ऐसी शादी में सहयोग करते हैं, उन्हें 2 साल की जेल और 1 लाख रुपये जुर्माना। काजी को 1.5 लाख रुपये का जुर्माना भी। पीड़ित महिलाओं को मुआवजा और कानूनी सहायता मिलेगी। दोषी सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य होंगे और स्थानीय चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। विधेयक राज्य भर में लागू होगा, लेकिन अनुसूचित जनजाति (ST) सदस्यों और छठी अनुसूची क्षेत्रों को छूट दी गई है, जहां कुछ जनजातीय रीति-रिवाज बहुविवाह की अनुमति देते हैं।

    यह भी पढ़ें : मोगा मेयर बलजीत सिंह चाणी को AAP ने किया निष्कासित: नशा तस्करों से कथित संबंधों पर सख्त कार्रवाई

    विधानसभा में चर्चा: सरमा का दावा, ‘यह इस्लाम विरोधी नहीं’

    विधेयक पेश करने से पहले 25 नवंबर को चर्चा हुई। सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा, “यह विधेयक इस्लाम के खिलाफ नहीं है। असली मुसलमान इसका स्वागत करेंगे। तुर्की, पाकिस्तान जैसे मुस्लिम देशों में भी बहुविवाह प्रतिबंधित है।” उन्होंने UCC का वादा दोहराया, “अगर 2026 चुनाव में दोबारा सत्ता आती है, तो पहले सत्र में UCC लाएंगे।” विपक्षी दलों – कांग्रेस, AIUDF, CPI(M) – ने वॉकआउट किया। AIUDF के अमिनुल इस्लाम ने कहा, “यह संविधान के कुछ अनुच्छेदों का उल्लंघन है।” सरमा ने स्पष्ट किया कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सभी पर लागू होगा। विधेयक पारित होने के बाद सरमा ने ट्वीट किया, “महिलाओं के अधिकारों पर कोई समझौता नहीं। यह नारी शक्ति को मजबूत करेगा।”

    UCC की ओर कदम: सामाजिक सुधार या चुनावी रणनीति?

    यह विधेयक UCC लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। UCC में बाल विवाह रोक, बहुविवाह प्रतिबंध, उत्तराधिकार कानून और लिव-इन रिलेशनशिप पंजीकरण शामिल हैं। असम के बाद उत्तराखंड UCC लागू हो चुका है। सरमा ने कहा, “बहुविवाह निषेध UCC का पहला चरण है।” लेकिन आलोचक इसे 2026 विधानसभा चुनाव से जोड़कर देख रहे हैं। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में BJP की सियासी रणनीति का आरोप लग रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह महिलाओं को सशक्त बनाएगा, लेकिन जनजातीय छूट से असमानता पैदा हो सकती है। असम में बहुविवाह दर पहले से कम है, लेकिन विधेयक से सामाजिक जागरूकता बढ़ेगी।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: स्वागत और विरोध की ध्रुवीकरण

    विधेयक के पारित होने पर BJP समर्थकों ने सराहना की। विपक्ष ने इसे ‘मुस्लिम विरोधी’ बताया। AIUDF ने कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का हनन है। लेकिन सरमा ने तर्क दिया कि असम के मुस्लिम समुदाय ने ही बहुविवाह का विरोध किया। राष्ट्रीय स्तर पर इसे UCC बहस को गति देने वाला माना जा रहा। महिलाओं के संगठनों ने स्वागत किया, कहा कि यह लिंग समानता सुनिश्चित करेगा। अब विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा। क्या यह असम में सामाजिक परिवर्तन लाएगा? जनता की नजरें सरकार पर टिकी हैं।

  • Mamta Banerjee: SIR पर अटका ममता का दिल! बीजेपी पर लगाए ये आरोप…

    Mamta Banerjee: SIR पर अटका ममता का दिल! बीजेपी पर लगाए ये आरोप…

    Mamta Banerjee: देश भर में चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर की प्रक्रिया कराई जा रही है। बिहार के बाद अब चुनाव आयोग पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया शुरु कर चुकी है। प्रक्रिया शुरु होने के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग द्वारा चलाई जा रही इस प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न को अयोजित, अव्यवस्थित और खतरनाक बताया है। साथ ही बीजेपी पर भर्जीवाड़ा का आरोप भी लगाया है। आइए एक नज़र डालते है पूरी खबर पर।

    Mamta Banerjee: ज्ञानेश कुमार को पत्र में ममता ने कही ये बात

    जानकारी के लिए बता दे कि पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया शुरु हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के दिनों में हाकिमपुर समेत कई बॉर्डर पॉइंट्स पर रोज़ सैकड़ों लोग वापस लौट रहे हैं, जो खुद स्वीकार कर रहे हैं कि वे पहले अवैध तरीके से भारत में घुसे थे और कई बार वोट भी डाल चुके हैं। अब इसी प्रक्रिया के वजह से ममता बनर्जी ने BJP पर आरोप लगाया है। आरोप लगाते हुए Mamta Banerjee ने कहा है कि BLOs को ठीक से ट्रेनिंग नहीं दी गई, सर्वर लगातार फेल हो रहा है और शिक्षकों व फ्रंटलाइन स्टाफ जैसे BLOs पर काम का अत्यधिक बोझ डाल दिया गया है।

    जाने बीजेपी ने क्या दिया जवाब

    इसके अलावा टीएमसी ने भाजपा पर वोट चोरी का भी आरोप लगाया है। वहीं बात अगर BJP की करें तो, बीजेपी ने चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया की सराहना की है। बीजेपी ने कहा है कि इससे उन अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को बाहर निकाला जा सकेगा जिन्होंने स्थानीय कैंपों की मदद से फर्जी वोटर आईडी बनवा ली थी। जानकारी के लिए बता दे कि जल्द ही पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव होने वाले। जिसकी तैयारी राज्य में अभी से दिखाई दे रही है।

  • ED का रॉबर्ट वाड्रा पर दूसरा चार्जशीट: संजय भंडारी मनी लॉन्ड्रिंग केस में नया मोड़

    ED का रॉबर्ट वाड्रा पर दूसरा चार्जशीट: संजय भंडारी मनी लॉन्ड्रिंग केस में नया मोड़

    नई दिल्ली: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के पति और प्रमुख कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ एक और बड़ा एक्शन लिया है। एजेंसी ने ब्रिटेन स्थित हथियार सलाहकार संजय भंडारी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वाड्रा को आरोपी बनाते हुए दूसरी पूरक अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दिल्ली की विशेष PMLA अदालत में दाखिल कर दी। यह वाड्रा के खिलाफ ED की कुल तीसरी चार्जशीट है, जो राजनीतिक हलकों में हंगामा मचा रही है। जुलाई 2025 में हरियाणा के शिकोहपुर भूमि सौदे में अनियमितताओं से जुड़े मामले में पहली चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी।

    मामले की शुरुआत: 2016 के आयकर छापों से

    यह केस 2016 में शुरू हुआ, जब आयकर विभाग ने दिल्ली में संजय भंडारी के परिसरों पर छापा मारा। छापों में ईमेल और दस्तावेज बरामद हुए, जो भंडारी के वाड्रा और उनके सहयोगियों से कथित संबंधों की ओर इशारा करते थे। भंडारी, एक प्रमुख हथियार डीलर, छापों के तुरंत बाद लंदन भाग गया। ED ने फरवरी 2017 में PMLA के तहत मामला दर्ज किया, जो आयकर विभाग की ब्लैक मनी एक्ट चार्जशीट पर आधारित था। एजेंसी ने पहले ही भंडारी मामले में दो चार्जशीट दाखिल कर चुकी है—2020 और 2023 में—लेकिन अब वाड्रा को सीधे आरोपी बनाया गया है।

    लंदन संपत्ति पर फोकस: वाड्रा की कथित भूमिका

    ED की जांच का केंद्र बिंदु लंदन के ब्रायनस्टन स्क्वायर पर एक लग्जरी संपत्ति है, जिसे भंडारी ने 2009 में खरीदा था। एजेंसी का दावा है कि वाड्रा ने इस संपत्ति के इंटीरियर को अपने निर्देशों के अनुसार नवीनीकृत करवाया, जिसमें उनके द्वारा प्रदान किए गए फंड्स का इस्तेमाल हुआ। जुलाई 2025 में वाड्रा का PMLA के तहत बयान दर्ज किया गया, जहां उन्हें अंतरराष्ट्रीय साक्ष्यों से सामना कराया गया, लेकिन उनके जवाब असंतोषजनक पाए गए। ED ने कई भारतीय संपत्तियों को जब्त किया है, जो कथित रूप से वाड्रा या उनके जुड़े संस्थानों से लिंक हैं और अपराध की आय का प्रतिनिधित्व करती हैं। जांच में हरियाणा की भूमि लेन-देन भी शामिल हैं, जहां फंड्स को ऑफशोर इकाइयों के जरिए रूट करने का आरोप है।

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    भंडारी का प्रत्यर्पण असफल, भारत में भगोड़ा घोषित

    संजय भंडारी (63 वर्ष) का प्रत्यर्पण ब्रिटेन की अदालत ने खारिज कर दिया था। जुलाई 2025 में दिल्ली की अदालत ने उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी (FEO) घोषित किया। ED का कहना है कि भंडारी ने विदेशी संपत्तियों और अनुचित वित्तीय लेन-देन के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग की। वाड्रा से ED ने पहले कई बार पूछताछ की है, जिसमें 2019 में उन्हें अग्रिम जमानत भी मिली। वाड्रा ने सभी आरोपों का खंडन किया है और कहा है कि लंदन में उनकी कोई संपत्ति नहीं है—न सीधे, न अप्रत्यक्ष रूप से। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और कोर्ट की अगली सुनवाई

    कांग्रेस ने ED के कदम को ‘राजनीतिक साजिश’ बताया है, जबकि भाजपा ने इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा कहा। प्रियंका गांधी ने अभी तक सार्वजनिक बयान नहीं दिया, लेकिन पार्टी नेता इसे विपक्ष को निशाना बनाने की कोशिश बता रहे हैं। विशेष अदालत में चार्जशीट 15 नवंबर 2025 को दाखिल हुई, और अगली सुनवाई 6 दिसंबर 2025 को निर्धारित है। ED की तीन अलग-अलग जांचों में वाड्रा फंसे हैं, जो हरियाणा भूमि डील से जुड़ी हैं। फिलहाल, जांच जारी है और कोर्ट की कार्यवाही पर सबकी नजर टिकी है। क्या यह मामला वाड्रा के कारोबारी साम्राज्य को झकझोर देगा? समय ही बताएगा।

  • बिहार: नीतीश कुमार ने 10वीं बार ली सीएम पद की शपथ, पीएम मोदी ने दी बधाई

    बिहार: नीतीश कुमार ने 10वीं बार ली सीएम पद की शपथ, पीएम मोदी ने दी बधाई

    पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 20 नवंबर 2025 को एक बार फिर इतिहास रचा गया। जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ रिकॉर्ड 10वीं बार ली। यह समारोह न केवल राजनीतिक उत्सव था, बल्कि एनडीए की प्रचंड जीत का प्रतीक भी। हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में एनडीए ने 202 सीटें हासिल कर महागठबंधन को करारी शिकस्त दी। शपथ ग्रहण के बाद नीतीश कुमार ने कहा कि नई सरकार बिहार को विकसित राज्य बनाने के संकल्प को नई गति देगी।

    भव्य समारोह में दिग्गजों की उपस्थिति

    गांधी मैदान में लाखों की भीड़ उमड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ (नोट: उपयोगकर्ता ने सी.पी. राधाकृष्णन का उल्लेख किया, लेकिन वर्तमान संदर्भ में धनखड़ सही), गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ सहित कई राज्यों के नेता मौजूद रहे। राज्यपाल अरिफ मोहम्मद खान ने शपथ दिलाई। समारोह की भव्यता ऐसी थी कि ‘जीविका दीदियां’ और एनडीए कार्यकर्ताओं ने गमछा लहराकर स्वागत किया। पीएम मोदी ने भीड़ का अभिवादन किया और गमछा लहराकर बिहारी संस्कृति से जुड़ाव दिखाया।

    उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट का विस्तार

    नीतीश कुमार के साथ भाजपा के सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। कुल 27 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की, जिनमें भाजपा से विजय कुमार चौधरी, श्रवण कुमार, मंगल पांडेय, दिलीप जायसवाल; जेडीयू से लेशी सिंह, मदन साहनी, नितिन नवीन, राम कृपाल यादव, संतोष कुमार सुमन, सुनील कुमार शामिल हैं। एलजेपी(आरवी), हम और आरएलएम के प्रतिनिधि भी कैबिनेट में हैं। एक मुस्लिम और तीन महिलाओं को जगह मिली, जो समावेशी प्रतिनिधित्व को दर्शाता है। विभागों का बंटवारा जल्द होगा, जिसमें गृह मंत्रालय पर चर्चा तेज है।

    यह भी पढ़ें : पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट SIR पर ममता का तीखा हमला, आत्महत्या तक की नौबत!

    नेताओं के संदेश: एकता और विकास पर जोर

    शपथ के बाद देशभर से बधाई संदेशों की बाढ़ आ गई। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “आदरणीय नीतीश कुमार जी को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर हार्दिक बधाई। नई सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी उतरे और बिहार के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए।” विपक्ष के इस सकारात्मक रुख ने राजनीतिक सौहार्द का संदेश दिया।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “श्री नीतीश कुमार जी को बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने पर बहुत-बहुत बधाई। वे एक कुशल और अनुभवी प्रशासक हैं। राज्य में सुशासन का उनका शानदार ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। नए कार्यकाल के लिए उन्हें मेरी हार्दिक शुभकामनाएं!” पीएम ने सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा को भी बधाई दी, कहा कि इनके जमीनी अनुभव से बिहार मजबूत होगा। उन्होंने नई कैबिनेट को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह टीम बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

    उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने बधाई देते हुए उम्मीद जताई कि नया नेतृत्व विकास और सुशासन का नया दौर लाएगा। पूर्व विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि नीतीश सरकार राज्य की प्रगति को तेज करेगी। मध्य प्रदेश के सीएम मोहन यादव ने एक्स पर पोस्ट कर पीएम मोदी के नेतृत्व में एनडीए के हर वर्ग के उत्थान का जिक्र किया।

    बिहार की राजनीति में नया अध्याय

    नीतीश कुमार का यह 10वां कार्यकाल बिहार के लिए मील का पत्थर है। 2000 से अब तक 19 वर्षों का उनका शासन ‘सुशासन बाबू’ की छवि को मजबूत करता है। चुनौतियां कम नहीं—बेरोजगारी, बाढ़ और प्रवासन। लेकिन एनडीए का वादा है: 1.5 करोड़ लोगों को 2 लाख रुपये की सहायता, शिक्षा-स्वास्थ्य में सुधार। विपक्ष की निगाहें गठबंधन की स्थिरता पर हैं, जबकि जनता विकास की उम्मीदें लेकर इंतजार कर रही है। क्या यह कार्यकाल बिहार को ‘विकसित भारत’ का मजबूत स्तंभ बनाएगा? आने वाले महीने बताएंगे। फिलहाल, पटना से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं।

  • बिहार चुनाव 2025: NDA की प्रचंड जीत, 202 सीटें हासिल!

    बिहार चुनाव 2025: NDA की प्रचंड जीत, 202 सीटें हासिल!

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 243 सीटों वाली विधानसभा में NDA ने 202 सीटें जीतकर तीन-चौथाई बहुमत हासिल कर लिया। चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर सभी सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं। यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘डबल इंजन सरकार’ की लोकप्रियता का प्रमाण है।

    पार्टियों का प्रदर्शन

    सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 101 सीटों पर चुनाव लड़ा और 89 पर विजय प्राप्त की। जनता दल (यूनाइटेड) – JDU को 85 सीटें मिलीं। विपक्षी दलों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को मात्र 25 सीटें, लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) को 19, कांग्रेस को 6 और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को 5 सीटें प्राप्त हुईं।

    हिंदुस्तान अवाम मोर्चा (HAM) ने 5, राष्ट्रीय लोक मोर्चा ने 4, जबकि CPI-ML को 2 सीटें मिलीं। इंडियन इलेक्शन पार्टी (IIP), CPI(M) और बहुजन समाज पार्टी (BSP) को एक-एक सीट पर सफलता मिली। वहीं, प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी (VIP) अपना खाता भी नहीं खोल सकीं।

    नेताओं की प्रतिक्रियाएं

    जीत के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पटना स्थित आवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा रहा। चिराग पासवान अपने नवनिर्वाचित विधायकों के साथ पहुंचे, जबकि JDU के वरिष्ठ नेता एवं केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह भी वहां उपस्थित रहे।

    BJP बिहार अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा, “राहुल गांधी को अपनी अंतरात्मा में झांकना चाहिए।” उन्होंने हार की वजह विपक्ष की नेतृत्वहीनता बताया। पश्चिम बंगाल BJP नेता दिलीप घोष ने कहा, “बिहार के नतीजों से TMC डरी हुई है, अब बंगाल की बारी है।”

    दिल्ली में BJP मुख्यालय पर जश्न का माहौल रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट कर कहा, “बिहार की जनता ने भारी जीत से गर्दा उड़ा दिया है।” उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे विकास पर विश्वास की जीत बताया।

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    जीत के प्रमुख कारक

    नीतीश कुमार की लोकप्रियता ने निर्णायक भूमिका निभाई। महिलाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर मतदान किया। विशेषकर बुजुर्ग वर्ग, जिनकी पेंशन 400 से बढ़ाकर 1100 रुपये की गई, ने गांव-गांव में NDA का समर्थन किया। यह योजना मतदाताओं में चर्चा का विषय बनी और सीधे वोटों में परिवर्तित हुई।

    कुल मिलाकर, बिहार ने इतिहास रच दिया। NDA ने ‘200 पार’ का लक्ष्य हासिल कर सत्ता में मजबूत वापसी की है। यह जीत विकास, स्थिरता और मोदी-नीतीश की जोड़ी पर जनता के अटूट विश्वास को दर्शाती है।

  • बिहार चुनाव: स्पेशल ट्रेनों पर सिब्बल के आरोप, ECI-BJP गठजोड़ का दावा!

    बिहार चुनाव: स्पेशल ट्रेनों पर सिब्बल के आरोप, ECI-BJP गठजोड़ का दावा!

    परिचय: चुनावी माहौल में नया विवाद

    बिहार विधानसभा चुनाव के बीच चुनाव आयोग की एक पहल ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। आयोग ने अन्य राज्यों में रह रहे बिहारी मतदाताओं को वोट डालने के लिए बिहार लौटने में मदद करने की योजना बनाई, लेकिन यह कदम विपक्षी नेताओं को खटक रहा है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और रेलवे मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने दावा किया कि यह सब बीजेपी के फायदे के लिए सुनियोजित है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

    सिब्बल के मुख्य आरोप: संदिग्ध ट्रेनें और वोटरों की वापसी

    3 नवंबर को हरियाणा से बिहार के लिए चार स्पेशल ट्रेनें रवाना हुईं, जिनमें करीब 6,000 यात्री संदिग्ध परिस्थितियों में सवार थे। सिब्बल ने पूछा कि अगर ये असली बिहारी वोटर हैं, तो चुनाव से ठीक पहले स्पेशल ट्रेनों की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने आरोप लगाया कि यह ऑपरेशन बीजेपी की चुनावी रणनीति का हिस्सा है, ताकि बाहर रह रहे समर्थकों को लाकर वोटिंग प्रभावित की जाए। सिब्बल ने कहा, “चुनाव आयोग निष्पक्ष है या बीजेपी का सहयोगी बन गया?” यह सवाल आयोग की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

    छठ पूजा का तर्क और रेल मंत्री पर सवाल

    सिब्बल ने तर्क दिया कि अगर स्पेशल सर्विस वाकई मतदाताओं की सुविधा के लिए थी, तो छठ पूजा जैसे बड़े त्योहार पर ऐसी ट्रेनें क्यों नहीं चलाई गईं? उस समय लाखों बिहारी घर लौटते हैं, लेकिन तब कोई विशेष व्यवस्था नहीं हुई। अब चुनाव के समय अचानक ट्रेनें चलाना संदेहास्पद लगता है। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से जवाब मांगा और चुनाव आयोग की चुप्पी पर कटाक्ष किया। सिब्बल का कहना है कि आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है, इसलिए इस मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

    यह भी पढ़ें : दिल्ली प्रदूषण संकट: इंडिया गेट पर साफ हवा की पुकार, पुलिस की हिरासत ने जगाई सवालों की आग!

    आयोग और सरकार की चुप्पी: आगे क्या?

    फिलहाल, रेल मंत्रालय और चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बिहार का चुनावी माहौल पहले से गर्म है, और सिब्बल के आरोपों ने आग में घी डाल दिया है। क्या यह स्पेशल ट्रेनें वाकई मतदाताओं की मदद के लिए हैं या बीजेपी का ‘स्पेशल प्लान’? विपक्ष इसे चुनावी धांधली का मामला बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे सामान्य सुविधा मान सकता है। देखना यह है कि आयोग जांच का आदेश देता है या नहीं। यह विवाद चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

  • दिल्ली प्रदूषण संकट: इंडिया गेट पर साफ हवा की पुकार, पुलिस की हिरासत ने जगाई सवालों की आग!

    दिल्ली प्रदूषण संकट: इंडिया गेट पर साफ हवा की पुकार, पुलिस की हिरासत ने जगाई सवालों की आग!

    इंडिया गेट पर उभरा गुस्सा: सांसों का संघर्ष

    9 नवंबर 2025 को दिल्ली की सड़कों पर सिर्फ भीड़ नहीं उतरी, बल्कि सांसें उतरीं। मांएं, बच्चे, छात्र, बुजुर्ग—सभी इंडिया गेट पर खड़े होकर साफ हवा की मांग कर रहे थे। दिल्ली का AQI 600 के पार पहुंच चुका था, जो ‘गंभीर’ श्रेणी से कहीं आगे था। पंजाबी बाग में 425, बावना में 410, जहांगीरपुरी में 401—ये आंकड़े न सिर्फ जहर की कहानी बयां करते हैं, बल्कि एक राष्ट्रीय आपदा की चेतावनी देते हैं। प्रदर्शनकारी बैनर थामे नारे लगा रहे थे: ‘स्मॉग से आजादी!’, ‘सांस लेना है हक हमारा!’। पर्यावरण कार्यकर्ता भावरीन खंडारी ने कहा, “हमने मुख्यमंत्री से अपॉइंटमेंट मांगा, लेकिन इंकार मिला। बच्चे सांस नहीं ले पा रहे, स्कूल बंद हैं, अस्पताल भरे पड़े हैं।” यह प्रदर्शन न केवल हवा की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहा था, बल्कि सरकार की निष्क्रियता पर भी चोट कर रहा था।

    शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस का डंडा: हिरासत का सिलसिला

    प्रदर्शन शांतिपूर्ण था—कोई संपत्ति क्षति नहीं, कोई हिंसा नहीं। फिर भी, दिल्ली पुलिस ने दावा किया कि इंडिया गेट ‘प्रदर्शन स्थल नहीं’ है। डीसीपी (नई दिल्ली) देवेश कुमार महला ने कहा, “कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ लोगों को निवारक हिरासत में लिया गया। केवल जंतर-मंतर ही अनुमति प्राप्त प्रदर्शन स्थल है।” दर्जनों लोग, जिनमें बच्चे और महिलाएं शामिल थे, को जबरन पुलिस वाहनों में ठूंस लिया गया। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर तीखा प्रहार किया: “साफ हवा का अधिकार मौलिक है, शांतिपूर्ण प्रदर्शन संवैधानिक। फिर नागरिकों को अपराधी क्यों बनाया जा रहा?” केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, पीएम2.5 मुख्य प्रदूषक था, जो फेफड़ों को सीधा नुकसान पहुंचा रहा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार मॉनिटरिंग स्टेशनों पर पानी छिड़ककर डेटा छिपा रही है। क्लाउड सीडिंग का प्रयास विफल रहा, फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं। यह दृश्य लोकतंत्र पर सवाल खड़ा करता है—विरोध की आवाज को ‘देशविरोधी’ कैसे ठहराया जा सकता है?

    प्रदर्शन का संदेश: सबकी समस्या, सबकी जिम्मेदारी

    इंडिया गेट पर सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए, क्योंकि यहां की दृश्यता अधिक है। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, “ये हमारी नहीं, आपकी-हमारी सबकी दिक्कत है। किसान पराली जलाते हैं, वाहन धुआं उगलते हैं, उद्योग विष फैलाते हैं—लेकिन हल कहां?” एनसीआर में नोएडा का AQI 354, गाजियाबाद 345—पूरी दिल्ली घुट रही थी। मांएं बच्चों को नेबुलाइजर थामे लाईं, प्रिस्क्रिप्शन दिखाए—प्रदूषण का असर साफ। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने कहा, “ये पहली बार है जब बुद्धिजीवी सड़क पर उतरे हैं। विश्वास की कमी है।” प्रदर्शन के बाद कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट के सड़क कुत्तों के पुनर्वास आदेश पर भी विरोध जता रहे थे, जो प्रदूषण से जुड़ी अन्य सामाजिक मुद्दों को उजागर करता है।

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    राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: आरोप-प्रत्यारोप का दौर

    विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस ने इसे ‘प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करो, प्रदूषकों को नहीं’ बताया। एएपी ने समर्थन जताया, जबकि भाजपा सरकार ने कदम बताए—स्कूल बंद, दफ्तरों के समय बदले। पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, “सरकार प्रदूषण रोकने के उपाय कर रही है।” लेकिन सीएक्यूएम ने स्टेज-3 प्रतिबंध न लगाने का फैसला लिया, क्योंकि AQI में ‘सुधार’ का दावा किया। राहुल गांधी ने कहा, “मोदी सरकार को करोड़ों भारतीयों की फिक्र नहीं, जो बच्चे और भविष्य दांव पर हैं।” एक्स पर #JusticeForCleanAir ट्रेंड कर रहा, जहां लोग सरकार से अपील कर रहे।

    आगे की राह: आपदा से सबक, स्थायी हल की जरूरत

    दिल्ली हर सर्दी में विषाक्त हवा से जूझती है—पराली जलाना, वाहन उत्सर्जन, ठंडी हवाओं का जाल। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानकों से 20 गुना अधिक प्रदूषण। प्रदर्शन ने सवाल उठाए: प्रदर्शन स्थल केवल जंतर-मंतर क्यों? क्या सरकार ने अन्य जगहें बनाईं? यह आंदोलन अलार्म है—हवा रोकना मत, आवाज दबाना मत। विशेषज्ञों का कहना है, स्थायी नीतियां जरूरी: इलेक्ट्रिक वाहन, पराली प्रबंधन, हरित ऊर्जा। टैक्स देने वाले नागरिकों का हक है साफ सांस। यदि प्रदर्शनकारी निर्दोष थे, तो हिरासत गलत। दिल्ली की यह ‘आखिरी सांस’ पूरे देश के लिए चेतावनी है। सरकार को सुनना होगा—वरना, दम घुटना जारी रहेगा। सबकी दुआ है, हवा साफ हो, लोकतंत्र सांस ले।

  • बिहार चुनाव 2025: दूसरे चरण का प्रचार थमा, 11 नवंबर को मतदान की बारी!

    बिहार चुनाव 2025: दूसरे चरण का प्रचार थमा, 11 नवंबर को मतदान की बारी!

    प्रचार अभियान का जोरदार समापन

    बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दूसरे और अंतिम चरण का प्रचार रविवार शाम 6 बजे थम गया। अब पूरे राज्य की निगाहें 11 नवंबर को होने वाले मतदान पर टिकी हैं। इस चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर वोटिंग होगी, जहां 1302 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें पुरुषों के अलावा महिलाएं और एक थर्ड जेंडर उम्मीदवार भी शामिल हैं, जो चुनावी विविधता को दर्शाता है। पहले चरण के बाद सभी दलों ने आखिरी दौर में पूरी ताकत लगाई, रैलियां, रोड शो और सोशल मीडिया अभियान चलाए। एनडीए और महागठबंधन दोनों ने जनता से विकास, रोजगार और सुरक्षा के वादों पर वोट मांगे।

    एनडीए की आक्रामक रणनीति

    भाजपा, जेडीयू और सहयोगी दलों ने प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कई रैलियां कीं। मोदी ने बिहार को ‘डबल इंजन’ सरकार का लाभ बताते हुए बुनियादी ढांचे, सड़कें और रोजगार योजनाओं पर जोर दिया। शाह ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि राहुल गांधी घुसपैठियों की चिंता ज्यादा करते हैं, जबकि बिहार के युवाओं की अनदेखी। चिराग पासवान ने प्रचार को शांतिपूर्ण बताते हुए एनडीए की एकजुटता पर भरोसा जताया। जेडीयू ने नीतीश की ‘सुशासन’ छवि को हाइलाइट किया, जबकि भाजपा ने हिंदुत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे उठाए।

    महागठबंधन का जनता से सीधा संवाद

    दूसरी ओर, महागठबंधन ने तेजस्वी यादव और राहुल गांधी के नेतृत्व में जोरदार कैंपेन चलाया। तेजस्वी ने एक्स पर पोस्ट कर एनडीए पर भ्रष्टाचार और बेरोजगारी के आरोप लगाए, युवाओं से 10 लाख नौकरियों का वादा दोहराया। राहुल गांधी ने पूर्णिया रैली में मोदी, शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त पर ‘वोट चोरी’ की साजिश का गंभीर आरोप लगाया, कहा कि लोकतंत्र खतरे में है। प्रियंका गांधी ने महिलाओं से अपील की, जबकि अन्य नेता गांव-गांव घूमे। गठबंधन ने आरक्षण, किसान कल्याण और महंगाई जैसे मुद्दों पर फोकस किया, एनडीए को ‘झूठी सरकार’ बताया।

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    मुद्दे जो बनाएंगे नई सरकार

    चुनाव में मुख्य मुद्दे विकास, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य रहे। बिहार की जनता बाढ़ नियंत्रण, प्रवासी मजदूरों की समस्याओं और महिलाओं की सुरक्षा पर फैसला करेगी। एनडीए ‘विकास और स्थिरता’ का दावा कर रही, तो महागठबंधन ‘परिवर्तन और न्याय’ की बात। थर्ड जेंडर उम्मीदवार की मौजूदगी सामाजिक समावेश को रेखांकित करती है। प्रचार शांतिपूर्ण रहा, कोई बड़ी हिंसा नहीं हुई, जो लोकतंत्र की मजबूती दिखाता है।

    मतदान की तैयारियां और उम्मीदें

    11 नवंबर को सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक वोटिंग होगी। ईवीएम और वीवीपैट का इस्तेमाल होगा, सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम। मतदाता आईडी, आधार या अन्य दस्तावेज लेकर आएं। पहले चरण में अच्छा turnout रहा, उम्मीद है दूसरे में भी। नतीजे 13 नवंबर को आएंगे, जो बिहार की नई दिशा तय करेंगे। जनता किसे चुनेगी—स्थिरता या बदलाव? अब वोटरों की बारी है, जो लोकतंत्र की असली ताकत हैं। बिहार का भविष्य मतपेटी में कैद है!

  • पुणे कोरेगांव भूमि घोटाला: अजीत पवार के बेटे पार्थ पर 1800 करोड़ का सवाल, FIR में नाम क्यों नहीं?

    पुणे कोरेगांव भूमि घोटाला: अजीत पवार के बेटे पार्थ पर 1800 करोड़ का सवाल, FIR में नाम क्यों नहीं?

    घोटाले की जड़: महार वतन भूमि का अवैध सौदा

    महाराष्ट्र की राजनीति में एक और बड़ा भूमि घोटाला सामने आ गया है, जो उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के बेटे पार्थ पवार से जुड़ा हुआ है। पुणे के मुंधवा-कोरेगांव पार्क इलाके में लगभग 40 एकड़ (16.19 हेक्टेयर) कीमती सरकारी जमीन का सौदा विवादों में घिर गया है। यह भूमि मूल रूप से ‘महार वतन भूमि’ है, जो 1958 के बॉम्बे इन्फीरियर विलेज वतन एबोलिशन एक्ट के तहत अनुसूचित जाति (महार समुदाय) के लिए आरक्षित थी। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को बॉटनिकल गार्डन प्रोजेक्ट के लिए आवंटित यह जमीन 2006 में निजी कारोबारी शीतल तिवानी के नाम कैसे दर्ज हुई, यह पहला बड़ा सवाल है। फिर, मई 2025 में यह सौदा पार्थ पवार की कंपनी अमेडिया एंटरप्राइजेज LLP (जिसमें पार्थ की 99% हिस्सेदारी है) को 300 करोड़ रुपये में ट्रांसफर कर दिया गया। बाजार मूल्य 1800 करोड़ रुपये होने के बावजूद स्टांप ड्यूटी मात्र 500 रुपये दिखाई गई, जबकि 5.89 करोड़ रुपये की होनी चाहिए थी। इससे सरकार को सैकड़ों करोड़ का नुकसान हुआ। यह सौदा IT पार्क और डेटा सेंटर के लिए था, लेकिन अब रद्द हो चुका है।

    पार्थ पवार की कंपनी: 1 लाख कैपिटल से 1800 करोड़ की डील?

    पार्थ पवार, जो NCP नेता हैं और अजीत पवार के बेटे, अमेडिया होल्डिंग्स LLP के डायरेक्टर हैं। कंपनी का शेयर कैपिटल मात्र 1 लाख रुपये है, फिर भी यह विशाल सौदा कैसे संभव हुआ? पार्थ के बिजनेस पार्टनर दिग्विजय अमरसिंह पाटिल (1% हिस्सेदारी) के नाम पर दस्तावेज साइन हुए। 12 फरवरी 2024 से 1 जुलाई 2025 के बीच पुणे के तहसीलदार ने अवैध आदेश जारी कर स्वामित्व का दावा करवाया। स्टांप ड्यूटी विभाग ने अमेडिया को 43 करोड़ रुपये का नोटिस जारी किया है, जिसमें बकाया और जुर्माना शामिल है। पार्थ ने सफाई दी, “मैंने कोई गलत काम नहीं किया।” लेकिन विपक्ष का कहना है कि कंपनी का रजिस्टर्ड एड्रेस पार्थ के पुणे निवास से मेल खाता है, जो संयोग नहीं हो सकता। यह सौदा 27 दिनों में पूरा हुआ, जिसमें उद्योग निदेशालय ने 48 घंटों में स्टांप ड्यूटी माफ की।

    FIR और जांच: तीन नाम, पार्थ का नाम गायब

    पुणे पुलिस ने बावधान थाने में FIR दर्ज की, जिसमें शीतल तिवानी (पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर), दिग्विजय पाटिल और सस्पेंडेड सब-रजिस्ट्रार रविंद्र तारू के नाम हैं। आरोप: स्टांप ड्यूटी चोरी, धोखाधड़ी और साजिश। लेकिन पार्थ का नाम क्यों नहीं? अजीत पवार ने कहा, “FIR केवल साइन करने वालों पर होती है। पार्थ ने साइन नहीं किया।” CM देवेंद्र फडणवीस ने EOW (इकोनॉमिक ऑफेंस विंग) को जांच सौंपी और कहा, “कोई बख्शा नहीं जाएगा।” रेवेन्यू विभाग और IGR (इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन) की अंतरिम रिपोर्ट में अनियमितताओं का जिक्र है। उच्चस्तरीय समिति एक महीने में रिपोर्ट देगी। दूसरी FIR बोपोदी की 13 एकड़ कृषि विभाग की जमीन पर भी दिग्विजय के खिलाफ है। विपक्ष ने इसे ‘कवर-अप’ बताया।

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    अजीत पवार का बचाव: ‘सौदा रद्द, कोई पैसा नहीं बदला’

    उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने दावा किया, “सौदा रद्द हो चुका है, एक पैसा भी नहीं बदला। पार्थ और दिग्विजय को जमीन सरकारी होने की जानकारी नहीं थी।” उन्होंने CM फडणवीस से बात कर निष्पक्ष जांच की मांग की और कहा, “मैं नियम तोड़ने वालों को बख्शूंगा नहीं, चाहे परिवार ही क्यों न हो।” अजीत ने इसे ‘परिवार का मामला’ बताते हुए खुद को अलग रखा। लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाया, “पिता उपमुख्यमंत्री हैं, बेटा निर्दोष कैसे?” पार्थ के पिछले विवादों का जिक्र भी हो रहा है, जैसे 2020 में पुणे गैंगस्टर गजानन मार्ने से मिलना और सुशांत सिंह राजपूत केस में CBI पूछताछ। अजीत ने तब भी सफाई दी थी।

    विपक्ष का हल्ला: इस्तीफे की मांग, महायुति पर सवाल

    कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने अजीत पवार का इस्तीफा मांगा और पार्थ पर क्रिमिनल केस की मांग की। शिवसेना (UBT) के अम्बादास दानवे ने कहा, “1 लाख कैपिटल वाली कंपनी 1800 करोड़ की जमीन कैसे खरीदेगी?” NCP (शरद पवार गुट) ने इसे ‘भूमि चोरी’ बताया और दलित आरक्षण का उल्लंघन कहा। विपक्ष का आरोप: महायुति सरकार (BJP-NCP-शिवसेना) पार्थ को बचा रही है। फडणवीस के बचाव पर सवाल उठे। यह घोटाला पुणे नगर निगम चुनावों से पहले आया, जहां NCP-BJP की प्रतिस्पर्धा तेज है। विपक्ष इसे वोट बैंक के लिए इस्तेमाल कर सकता है।