Tag: BJP Government

  • ममता का केंद्र पर तीखा प्रहार: ‘जय हिंद-वंदे मातरम’ पर बैन जैसी सलाह बर्दाश्त नहीं!

    ममता का केंद्र पर तीखा प्रहार: ‘जय हिंद-वंदे मातरम’ पर बैन जैसी सलाह बर्दाश्त नहीं!

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यसभा सचिवालय के उस बुलेटिन पर कड़ा एतराज जताया है जिसमें सांसदों को सदन के अंदर “जय हिंद”, “वंदे मातरम”, “थैंक यू” या “थैंक्स” जैसे नारे लगाने से मना किया गया था। ममता ने इसे स्वतंत्रता संग्राम के नारों का अपमान करार दिया और केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कुचलने का गंभीर आरोप लगाया।

    स्वतंत्रता संग्राम के नारों पर पाबंदी अस्वीकार्य

    ममता बनर्जी ने कोलकाता में संवाददाताओं से कहा, “जय हिंद और वंदे मातरम हमारे आजादी के नारे हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘जय हिंद’ दिया, बैंकिम बाबू ने ‘वंदे मातरम’ लिखा। इन नारों को संसद में बोलने से रोकना मतलब देश की आजादी की भावना का अपमान करना है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सांसद अपने मन की बात कह सकते हैं, तो ये राष्ट्रीय नारे क्यों नहीं बोल सकते?

    बंगाल की अस्मिता और समाज को बांटने का आरोप

    मुख्यमंत्री ने केंद्र पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार बंगाल की संस्कृति और पहचान को जानबूझकर कमजोर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर समाज को बांटा जा रहा है और दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक हो या आम हिंदू, हर वर्ग में डर और असुरक्षा का माहौल बनाया जा रहा है।

    यह भी पढ़ें : Bigg Boss 19: हिंसा के चलते फरहाना भट्ट होंगी घर से बेघर?

    CAA-NRC से नागरिकता छिनने का डर

    ममता ने CAA और NRC को फिर से मुद्दा बनाते हुए कहा कि इन कानूनों के जरिए लोगों में यह डर पैदा किया जा रहा है कि वे अपनी नागरिकता और घर खो देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां देश में अस्थिरता और अविश्वास को बढ़ावा दे रही हैं।

    राज्यसभा बुलेटिन विवाद ने एक बार फिर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच तनाव को उजागर कर दिया है। ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया से साफ है कि वे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाती रहेंगी। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि केंद्र सरकार और राज्यसभा सचिवालय इस विवाद पर क्या जवाब देते हैं।

  • सपा में शामिल हुए चौधरी अमर सिंह और अन्य दिग्गज, 2027 चुनाव की तैयारी तेज

    सपा में शामिल हुए चौधरी अमर सिंह और अन्य दिग्गज, 2027 चुनाव की तैयारी तेज

    उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) ने न केवल संगठन को मज़बूत करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, बल्कि प्रदेश के दिग्गज नेताओं को पार्टी में शामिल कर बड़ी तैयारी शुरू कर दी है। गुरुवार को लखनऊ स्थित सपा मुख्यालय में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता पार्टी में शामिल हुए।

    कार्यक्रम में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल और वरिष्ठ नेता लाल जी वर्मा ने शामिल नेताओं का स्वागत किया और उन्हें पार्टी की विचारधारा से अवगत कराया। इस अवसर पर ‘मेंहदी में तलवार’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।

    जनता अब बदलाव चाहती है : सपा मुखिया

    सपा मुखिया अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा किसानों, मजदूरों, नौजवानों और पिछड़े वर्ग की आवाज़ रही है। उन्होंने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि पिछले नौ सालों में केवल जनता को धोखा देने का काम किया गया। महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार ने आम लोगों का जीवन कठिन कर दिया है। अखिलेश ने स्पष्ट किया कि जनता अब बदलाव चाहती है और समाजवादी पार्टी ही इसका असली विकल्प है।

    कार्यक्रम में शामिल नेताओं ने बताया कि उन्होंने पार्टी की नीतियों और विचारधारा से प्रभावित होकर सपा में शामिल होने का निर्णय लिया है। उनका मानना है कि अखिलेश यादव के नेतृत्व में प्रदेश का भविष्य सुरक्षित और विकास की नई राह खुलेगी।

    कौन-कौन हुए शामिल:

    पूर्व विधायक चौधरी अमर सिंह और सुधीर चौहान अपने समर्थकों के साथ सपा में शामिल हुए। इसके अलावा 2022 के विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेने वाले विद्यासागर और बसपा के पूर्व कॉर्डिनेटर लाल जी वर्मा ने भी सपा का दामन थामा। यह कदम साफ संकेत है कि पार्टी हर वर्ग और क्षेत्र के नेताओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है।

    सुधीर चौहान ने कहा कि समाजवादी पार्टी देश की सबसे बड़ी तीसरी पार्टी है और इसमें शामिल होकर उन्हें खुशी है। उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि किसानों की जमीन अधिग्रहण के नाम पर छीनी जा रही है। युवा वर्ग बेरोजगारी और अंधकारपूर्ण हालात में जी रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि लोकल बॉडी के चुनाव में देरी और प्रशासनिक समस्याओं ने जनता को प्रभावित किया है।

    2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़े नेताओं का सपा में शामिल

    सपा का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना बेहद जरूरी है। पार्टी प्रदेशभर में जनसभाओं, सम्मेलन और कार्यकर्ता बैठकों के माध्यम से जनता से सीधे संपर्क करेगी। इससे सपा की नीतियों और कार्यक्रमों का संदेश सीधे आम लोगों तक पहुंचेगा और पार्टी का संदेश अधिक प्रभावी होगा।

    विशेष रूप से सपा इस रणनीति पर ध्यान दे रही है कि किसानों, मजदूरों, युवा और पिछड़े वर्ग की समस्याओं को सामने लाया जाए। इसके साथ ही पार्टी जातिगत और धर्म आधारित राजनीति से हटकर विकास और सामाजिक न्याय की ओर केंद्रित रहेगी।

    उत्तर प्रदेश में राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बड़े नेताओं का सपा में शामिल होना पार्टी के लिए रणनीतिक लाभ साबित हो सकता है। यह न केवल पार्टी संगठन को मजबूत करता है, बल्कि जनता के बीच विश्वास और लोकप्रियता भी बढ़ाता है। अखिलेश यादव ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समाजवादी पार्टी ही वह विकल्प है जो हर वर्ग की आवाज़ उठाने में सक्षम है।

  • मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, प्रियंका गांधी ने केंद्र की चुप्पी पर उठाए सवाल

    मणिपुर में फिर भड़की हिंसा, प्रियंका गांधी ने केंद्र की चुप्पी पर उठाए सवाल

    मणिपुर एक बार फिर हिंसा और तनाव की गिरफ्त में है। बीते दो वर्षों से इस पूर्वोत्तर राज्य में जातीय संघर्ष, हत्याएं, पलायन और बलात्कार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हज़ारों परिवार बेघर हो चुके हैं। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने रविवार (8 जून) को केंद्र सरकार की चुप्पी और निष्क्रियता पर तीखा हमला किया।

    विरोध प्रदर्शन के बाद इंटरनेट बंद, कर्फ्यू लागू

    शनिवार को मणिपुर की राजधानी इंफाल के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए, जिन पर नियंत्रण पाने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए। पांच जिलों में इंटरनेट सेवाएं पांच दिन के लिए बंद कर दी गई हैं। इसके अलावा, चार जिलों में धारा 144 लागू कर दी गई है ताकि लोगों के सार्वजनिक स्थानों पर इकट्ठा होने पर रोक लगाई जा सके। एक जिले में कर्फ्यू भी लगा दिया गया है।

    प्रियंका गांधी का केंद्र सरकार पर सीधा सवाल

    प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा:

    “मणिपुर एक बार फिर से हिंसा की चपेट में है। करीब दो साल से राज्य के लोग हिंसा, हत्या, बलात्कार और पलायन झेल रहे हैं। सैकड़ों मौतें हो चुकी हैं, हजारों लोग बेघर हैं। आखिर क्या कारण है कि केंद्र का शासन होने के बावजूद वहाँ शांति बहाली नहीं हो पा रही है?”

    प्रियंका ने केंद्र सरकार पर सीधा आरोप लगाया कि मणिपुर में शांति बहाली के लिए कोई ठोस और प्रभावी प्रयास नहीं किए जा रहे। उन्होंने कहा कि केंद्र की निष्क्रियता चिंताजनक है और इससे लोकतंत्र में आमजन का विश्वास डगमगाता है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी उठाए सवाल

    प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौन नीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने लिखा:

    “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मणिपुर को उसके हाल पर क्यों छोड़ दिया है? न उन्होंने मणिपुर का दौरा किया, न किसी प्रतिनिधि से मिले, न शांति की अपील की और न ही कोई ठोस पहल की। यह संवेदनहीनता लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है।”

    यह बयान केंद्र सरकार की जवाबदेही को कटघरे में खड़ा करता है, खासकर जब राज्य सीधे केंद्र शासन के अधीन है।

    यह भी पढ़ें :हिंजेवाड़ी आईटी पार्क बना जलसमूह, बारिश ने बिगाड़ा हाल, वाहनों की लंबी कतार

    मणिपुर में शांति की राह चुनौतीपूर्ण

    मणिपुर में जारी संकट को देखते हुए यह स्पष्ट हो जाता है कि इंटरनेट बंद करना या कर्फ्यू लगाना केवल अस्थायी समाधान हैं। स्थायी शांति के लिए सभी पक्षों से संवाद आवश्यक है। जनजातीय समूहों, स्थानीय संगठनों और प्रशासन के बीच विश्वास बहाल करना अब समय की मांग है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सरकार सामाजिक समरसता, न्याय और विकास पर आधारित नीतियाँ लागू नहीं करती, तब तक मणिपुर को स्थायी राहत नहीं मिल पाएगी।