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  • राष्ट्रपति मुर्मू का ऐतिहासिक अफ्रीका दौरा: अंगोला में नई साझेदारी!

    राष्ट्रपति मुर्मू का ऐतिहासिक अफ्रीका दौरा: अंगोला में नई साझेदारी!

    परिचय: पहली भारतीय राष्ट्रपति की अंगोला यात्रा

    भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इतिहास रचा है। वह अंगोला की राजकीय यात्रा पर पहुंचीं — यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की इस अफ्रीकी देश की पहली यात्रा है। लुआंडा में राष्ट्रपति जोआओ मैनुअल गोंसाल्वेस लौरेंको से मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने ऊर्जा, तकनीक, रक्षा और युवा कौशल जैसे क्षेत्रों में गहरे सहयोग पर चर्चा की। यह दौरा भारत-अंगोला राजनयिक संबंधों के 40 वर्ष पूरे होने के अवसर पर हो रहा है, जो द्विपक्षीय रिश्तों को नई ऊंचाई देने का प्रतीक है।

    ऊर्जा सुरक्षा: तेल, गैस और रिफाइनरी निवेश

    राष्ट्रपति मुर्मू ने स्पष्ट कहा कि अंगोला भारत की ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत अंगोला के तेल-गैस का प्रमुख आयातक है। भारतीय कंपनियां लंबी अवधि के अनुबंध और नए निवेश में रुचि रखती हैं। मुर्मू ने प्रस्ताव दिया कि भारत, जो पेट्रोलियम रिफाइनिंग में विश्व नेता है, अंगोला में नई रिफाइनरी परियोजनाओं में निवेश कर सकता है। यह कदम दोनों देशों की ऊर्जा जरूरतों को मजबूत करेगा और आपसी निर्भरता बढ़ाएगा।

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    तकनीक और युवा सशक्तिकरण: वंदे भारत से AI तक

    वार्ता में तकनीकी सहयोग प्रमुख रहा। राष्ट्रपति ने भारत की गर्वनीय ‘वंदे भारत’ हाई-स्पीड ट्रेन का जिक्र किया और कहा कि भविष्य में ऐसी ट्रेनें अंगोला को निर्यात की जा सकती हैं। दोनों देशों में युवा आबादी अधिक है, इसलिए कौशल प्रशिक्षण पर जोर दिया गया। रणनीतिक खनिज, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में साझेदारी की रूपरेखा तैयार हुई। यह सहयोग अफ्रीका में भारत की तकनीकी पहुंच को मजबूत करेगा।

    रक्षा और भविष्य की योजनाएं: बोत्सवाना की ओर

    इस साल मई में भारत ने अंगोला की रक्षा क्षमता बढ़ाने के लिए 200 मिलियन डॉलर की लाइन ऑफ क्रेडिट दी थी। अब अंगोला के बाद 11-13 नवंबर को राष्ट्रपति मुर्मू बोत्सवाना जाएंगी — यह भी किसी भारतीय राष्ट्रपति की पहली यात्रा होगी। वहां व्यापार, स्वास्थ्य, ऊर्जा और रक्षा सहयोग पर फोकस रहेगा। ये दौरे भारत की ‘फोकस अफ्रीका’ नीति को सशक्त बनाते हैं।

  • सेलिना जेटली का भाई मेजर विक्रांत UAE में हिरासत में: भावुक अपील और कोर्ट की कार्रवाई

    सेलिना जेटली का भाई मेजर विक्रांत UAE में हिरासत में: भावुक अपील और कोर्ट की कार्रवाई

    कठिन दौर से गुजर रही सेलिना जेटली

    बॉलीवुड अभिनेत्री और पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स सेलिना जेटली इन दिनों बेहद मुश्किल समय से जूझ रही हैं। उनके भाई, रिटायर्ड मेजर विक्रांत कुमार जेटली, पिछले 14 महीनों से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हिरासत में हैं। सितंबर 2024 से विक्रांत को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया था। एक चौथी पीढ़ी के सैनिक और 3 पैरा स्पेशल फोर्सेस के पूर्व अधिकारी विक्रांत 2016 से UAE में रह रहे थे, जहां वे MATITI ग्रुप में व्यापार, सलाहकार और जोखिम प्रबंधन सेवाओं से जुड़े थे। सेलिना ने बताया कि उनके भाई को अबू धाबी के एक मॉल से अज्ञात व्यक्तियों द्वारा अगवा किया गया था, और तब से परिवार उनसे संपर्क साधने में असमर्थ है। यह मामला न केवल परिवार के लिए दर्दनाक है, बल्कि भारतीय नागरिकों की विदेशी हिरासत में सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है।

    इंस्टाग्राम पर भावनात्मक संदेश

    सेलिना ने हाल ही में इंस्टाग्राम पर एक दिल दहला देने वाला पोस्ट शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपने भाई के लिए गहरी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने लिखा, “मेरे डंपि (भाई), मुझे उम्मीद है तुम ठीक हो… मैं तुम्हारे साथ चट्टान की तरह खड़ी हूं, मुझे उम्मीद है तुम जानते हो कि मैं तुम्हारे लिए हर रात रोए बिना नहीं सोई… मैं तुम्हारे लिए सब कुछ त्याग दूंगी… कोई भी हमारे बीच नहीं आ सकता… भगवान आखिरकार हम पर मेहरबान हों… तेरा इंतजार कर रही हूं।” यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसे लाखों लोगों ने शेयर किया। सेलिना ने आगे कहा कि उन्होंने हर संभव कोशिश की है—सरकार से लगातार संपर्क, MADAD पोर्टल पर शिकायत, भारतीय दूतावास को अपील—लेकिन अब तक कोई ठोस राहत नहीं मिली। उन्होंने अपने भाई की सेहत पर चिंता जताई, जो कथित तौर पर मानसिक तनाव और चिकित्सकीय समस्याओं से जूझ रहे हैं।

    दिल्ली हाई कोर्ट का हस्तक्षेप

    इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 4 नवंबर 2025 को सुनवाई के दौरान जस्टिस सचिन दत्ता ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया। कोर्ट ने विदेश मंत्रालय (MEA) को निर्देश दिए कि विक्रांत को प्रभावी कानूनी और चिकित्सकीय सहायता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति का आदेश दिया गया, जो परिवार से नियमित संपर्क में रहेगा और UAE में चल रही कानूनी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। MEA ने कोर्ट को बताया कि विक्रांत को कांसुलर एक्सेस प्रदान किया गया है—मई, जून, अगस्त और सितंबर 2025 में चार मुलाकातें हो चुकी हैं। हालांकि, सेलिना के वकीलों ने पत्नी से दूरी का हवाला देते हुए और अधिक सहायता की मांग की। अगली सुनवाई 4 दिसंबर 2025 को होगी। सेलिना ने कोर्ट के फैसले को “अंधेरे सुरंग के अंत में रोशनी” बताया।

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    MEA और कांसुलर सहायता की स्थिति

    विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारतीय दूतावास UAE के अधिकारियों के संपर्क में है और मामले को पूरी गंभीरता से ले रहा है। विक्रांत की पत्नी से भी संवाद हो रहा है, लेकिन सेलिना ने पेटिशन में दावा किया कि केवल चार कांसुलर विजिट्स पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून और वियना कांसुलर संबंध संधि का हवाला देते हुए तत्काल चिकित्सा और कानूनी मदद की मांग की। MEA के अनुसार, विक्रांत को “एक केस” में गिरफ्तार किया गया, लेकिन विस्तृत जानकारी गोपनीय रखी गई है। सेलिना ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से अपील की है कि उनके भाई को जल्द रिहा किया जाए।

    बॉलीवुड और सोशल मीडिया का समर्थन

    सेलिना के पोस्ट के बाद बॉलीवुड सितारे और फैंस ने उनका साथ दिया। रिटायर्ड मेजर जनरल जी.डी. बख्शी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “हमें उसे वापस लाना होगा! मुझे ISI की साजिश का शक है… उनकी बहन की आंसू देखकर दुख हुआ।” कई सेलेब्स जैसे अनुष्का शर्मा और वरुण धवन ने मैसेज शेयर कर समर्थन जताया। एक्स पर #JusticeForVikrant ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग सरकार से दखल की मांग कर रहे हैं। सेलिना ने कहा, “मैं अभी सेलिना जेटली नहीं, सिर्फ एक सैनिक की बहन हूं।”

    भविष्य की उम्मीदें और अपील

    यह मामला भारतीय नागरिकों की विदेशी हिरासत में सुरक्षा पर बहस छेड़ रहा है। सेलिना की अपील है कि राष्ट्र एकजुट होकर विक्रांत को घर लाए। MEA की सक्रियता और कोर्ट की निगरानी से उम्मीद बंधी है। सबकी दुआ है कि विक्रांत जल्द परिवार के पास लौटें, और यह घटना अन्य भारतीयों के लिए सबक बने। सेलिना का साहस प्रेरणा दे रहा है—एक बहन का भाई के लिए संघर्ष, जो लोकतंत्र की ताकत दिखाता है।

  • असीम मुनीर-ट्रंप लंच पर शशि थरूर की चुटकी: उम्मीद है आतंकवाद पर हुई होगी बात

    असीम मुनीर-ट्रंप लंच पर शशि थरूर की चुटकी: उम्मीद है आतंकवाद पर हुई होगी बात

    पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में हुए लंच पर भारतीय राजनीति में प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है। इस मुलाकात को लेकर कांग्रेस सांसद और जाने-माने लेखक शशि थरूर ने चुटकी लेते हुए बेहद रोचक प्रतिक्रिया दी है।

    थरूर बोले- उम्मीद है लंच में सख्त बातें भी परोसी गई होंगी

    शशि थरूर ने अपने बयान में कहा, “मुझे उम्मीद है कि लंच स्वादिष्ट रहा होगा और इसके साथ-साथ पाक सेना प्रमुख को आतंकवाद पर कुछ कड़े संदेश भी परोसे गए होंगे।” उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जब जनरल को वाइन परोसी जा रही थी, तब उन्हें भारत में फैलाए जाने वाले आतंकवाद की याद दिलाई गई होगी, क्योंकि यह अमेरिका के भी दीर्घकालिक हित में है।

    अमेरिका को नहीं भूला ओसामा बिन लादेन प्रकरण

    थरूर ने अपने बयान में 2011 के ओसामा बिन लादेन ऑपरेशन की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि अमेरिका और उसके नागरिक आज भी यह नहीं भूले हैं कि ओसामा को पाकिस्तान की सेना के गढ़ एबटाबाद में एक सुरक्षित घर में पाया गया था। उन्होंने कहा, “यह भूल और विश्वासघात अमेरिका की सामूहिक स्मृति से इतनी जल्दी नहीं मिटने वाला, और न ही माफ किया जा सकता है।”

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    पाकिस्तान पर अमेरिका का बढ़ता दबाव

    थरूर ने कहा कि पाकिस्तान को लगातार यह संदेश दिया जा रहा है कि वह भारत में आतंकवादियों को भेजना, उन्हें ट्रेनिंग देना और आर्थिक मदद देना बंद करे। उन्होंने उम्मीद जताई कि असीम मुनीर को अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्यों द्वारा इस मुद्दे पर सीधे तौर पर आगाह किया गया होगा।

    ईरान-इज़राइल संघर्ष पर थरूर की संतुलित राय

    थरूर ने अपने बयान में ईरान और इज़राइल के बीच जारी संघर्ष पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भारत के लिए दोनों देश महत्वपूर्ण हैं। “ईरान एक ऐतिहासिक मित्र और पड़ोसी है, जबकि इज़राइल एक विश्वसनीय साझेदार रहा है। हम चाहते हैं कि दोनों देशों के बीच जल्द से जल्द शांति स्थापित हो,” उन्होंने कहा। थरूर ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की और इस संघर्ष को ‘चिंता का विषय’ बताया।

    ट्रंप का असीम मुनीर के प्रति बयान

    पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने असीम मुनीर के साथ लंच से पहले बयान दिया था कि “हमने जनरल मुनीर को इसलिए आमंत्रित किया क्योंकि उन्होंने हालात को शांत रखने में अहम भूमिका निभाई।” ट्रंप ने कहा कि भारत की ओर से प्रधानमंत्री मोदी ने वही भूमिका निभाई। उन्होंने असीम मुनीर को सार्वजनिक रूप से धन्यवाद दिया।

  • G7 शिखर सम्मेलन: भारत-कनाडा तनाव और मोदी की संभावित अनुपस्थिति

    G7 शिखर सम्मेलन: भारत-कनाडा तनाव और मोदी की संभावित अनुपस्थिति

    नई दिल्ली और ओटावा के बीच बढ़ते राजनयिक तनाव के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी G7 शिखर सम्मेलन के लिए कनाडा यात्रा की संभावना कम नजर आ रही है। यह शिखर सम्मेलन, जो 15 से 17 जून 2025 तक कनाडा में आयोजित होगा, विश्व की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण मंच है। G7 में फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा शामिल हैं। इसके अलावा, यूरोपीय संघ (ईयू), अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ), विश्व बैंक और संयुक्त राष्ट्र जैसे संगठन भी इस मंच का हिस्सा हैं। इस बार दक्षिण अफ्रीका, यूक्रेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने कनाडा का निमंत्रण स्वीकार किया है, लेकिन भारत की भागीदारी अभी अनिश्चित बनी हुई है।

    भारत को निमंत्रण का इंतजार

    सूत्रों के अनुसार, भारत को अभी तक G7 शिखर सम्मेलन के लिए कोई आधिकारिक निमंत्रण नहीं मिला है। इसके साथ ही, भारतीय पक्ष ने भी इस आयोजन में भाग लेने के प्रति अधिक उत्साह नहीं दिखाया है। सूत्रों ने स्पष्ट किया कि, “ऐसे किसी उच्च-स्तरीय दौरे से पहले दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार आवश्यक है।” भारत और कनाडा के बीच हाल के महीनों में राजनयिक तनाव बढ़ा है, जिसका प्रभाव इस निर्णय पर पड़ सकता है। दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और विभिन्न मुद्दों पर मतभेद इस अनिश्चितता का प्रमुख कारण हैं।

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    सुरक्षा चिंताएं और राजनयिक चुनौतियां

    सूत्रों ने बताया कि यदि भविष्य में प्रधानमंत्री मोदी कनाडा की यात्रा करते हैं, तो सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान करना अत्यंत आवश्यक होगा। ये चिंताएं दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी को और उजागर करती हैं। भारत ने हमेशा अपनी विदेश नीति में संतुलन और राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है। इस स्थिति में भी भारत उसी रुख को अपनाए हुए है। कनाडा के साथ तनावपूर्ण संबंधों के बीच भारत का यह रुख उसकी कूटनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है, जो राष्ट्रीय हितों और गरिमा को सर्वोपरि रखता है।

    विदेश मंत्रालय का आधिकारिक रुख

    पिछले महीने, भारत के विदेश मंत्रालय ने दो अलग-अलग अवसरों पर स्पष्ट किया था कि, “G7 शिखर सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की कनाडा यात्रा के बारे में कोई जानकारी नहीं है।” यह बयान भारत और कनाडा के बीच मौजूदा तनाव को और रेखांकित करता है। दोनों देशों के बीच संबंधों में सुधार के बिना इस तरह के उच्च-स्तरीय दौरे की संभावना कम ही है। भारत की अनुपस्थिति G7 जैसे महत्वपूर्ण मंच पर वैश्विक चर्चाओं में उसकी भूमिका को प्रभावित कर सकती है, लेकिन यह भारत की स्वतंत्र और सशक्त विदेश नीति का भी प्रतीक है।

    आगे की राह

    G7 शिखर सम्मेलन वैश्विक आर्थिक और सामरिक मुद्दों पर चर्चा का एक महत्वपूर्ण मंच है। भारत, जो पहले भी इस मंच पर अपनी प्रभावी उपस्थिति दर्ज करा चुका है, इस बार अपनी भागीदारी को लेकर सतर्क रुखadopt कर रहा है। भारत और कनाडा के बीच संबंधों में सुधार होने पर ही इस तरह की यात्रा संभव हो सकती है। तब तक, भारत अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेना जारी रखेगा।

  • पहलगाम हमले के बाद कांग्रेस-BJP में तीखी सियासी जंग

    पहलगाम हमले के बाद कांग्रेस-BJP में तीखी सियासी जंग

    पहलगाम हमले के बाद कांग्रेस-BJP में तीखी सियासी जंग
    पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कांग्रेस ने BJP पर तुर्की-चीन जैसे देशों से संबंधों को लेकर सवाल उठाए। ऑपरेशन सिंदूर के निलंबन के बाद शुरू हुई सियासत।

    कांग्रेस का BJP पर पलटवार, तुर्की-चीन के मुद्दे पर सवाल
    पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तुर्की और चीन जैसे देशों के साथ राजनयिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर सवाल खड़े किए हैं…

    BJP का कांग्रेस पर जनभावनाओं से कटे होने का आरोप
    BJP की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया है…

    कांग्रेस का तुर्की और चीन पर BJP को घेरने का प्रयास
    कांग्रेस ने BJP के आरोपों का जवाब देने में देर नहीं की। पवन खेड़ा ने X पर लिखा कि BJP को यह सवाल उठाने से पहले अपनी सरकार से पूछना चाहिए कि क्या तुर्की के साथ सभी राजनयिक और व्यापारिक संबंध तोड़ दिए गए हैं…

    ऑपरेशन सिंदूर और सियासी तनातनी
    जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले महीने हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया…

    तुर्की और चीन के X हैंडल बहाली पर विवाद
    कांग्रेस ने तुर्की के trtworld और चीन के news जैसे X हैंडल्स की बहाली पर भी सवाल उठाए। पवन खेड़ा ने BJP के संगठन महामंत्री बीएल संतोष से पूछा कि इन हैंडल्स पर प्रतिबंध क्यों केवल चार घंटे में हटा लिया गया…

    सियासी बयानबाजी से देश में तनाव
    पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों दलों की बयानबाजी ने देश में सियासी तनाव को बढ़ा दिया है। जहां BJP कांग्रेस को जनभावनाओं से कटा हुआ बता रही है, वहीं कांग्रेस सरकार की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठा रही है…