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  • पुतिन का दावा: रूस के बिना वैश्विक अर्थव्यवस्था और संतुलन संभव नहीं, पश्चिम को चेतावनी

    पुतिन का दावा: रूस के बिना वैश्विक अर्थव्यवस्था और संतुलन संभव नहीं, पश्चिम को चेतावनी

    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में वैश्विक मंच पर एक बार फिर पश्चिमी देशों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में रूस के तेल और गैस के बिना वैश्विक अर्थव्यवस्था और रणनीतिक संतुलन टिक नहीं सकता। पुतिन ने जोर देकर कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद रूस मज़बूती से खड़ा है और दुनिया की आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक धुरी का अहम हिस्सा है।

    तेल और गैस पर तंज और पश्चिमी दावे

    पुतिन ने तंज कसते हुए कहा, “अमेरिका को यूरेनियम बेचना सही है, लेकिन यूरोप को तेल और गैस देना ‘गुनाह’ क्यों माना जाता है?” उनका यह बयान इस बात को दर्शाता है कि रूस अपनी ऊर्जा शक्ति के माध्यम से वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में निर्णायक भूमिका निभा रहा है। पुतिन ने यह भी कहा कि दुनिया की स्थिरता और संतुलन रूस के बिना संभव नहीं है।

    रूस की मजबूती और प्रतिबंधों का सामना

    पुतिन ने कहा कि पश्चिमी प्रतिबंधों और दबावों के बावजूद रूस ने अपनी आर्थिक और रणनीतिक स्थिति को मजबूत बनाए रखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जो देश रूस की रणनीतिक हार का सपना देख रहे हैं, उन्हें जल्द ही अपनी भूल का एहसास होगा। पुतिन के अनुसार, रूस की ऊर्जा नीति और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में योगदान ने पश्चिम को यह समझने पर मजबूर कर दिया है कि रूस को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

    वैश्विक संतुलन पर रूस की भूमिका

    रूस का वैश्विक मंच पर प्रभाव केवल ऊर्जा संसाधनों तक सीमित नहीं है। पुतिन ने कहा कि आर्थिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक स्तर पर रूस दुनिया के संतुलन का अभिन्न हिस्सा है। उनका मानना है कि वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और रणनीतिक निर्णय रूस की भागीदारी के बिना अधूरे हैं। यह बयान उन देशों के लिए चेतावनी है जो रूस को वैश्विक निर्णयों से अलग करने की योजना बना रहे हैं।

    पुतिन का यह बयान रूस की वैश्विक भूमिका को दोबारा स्पष्ट करता है। उन्होंने न केवल पश्चिमी देशों को चुनौती दी, बल्कि यह संदेश भी दिया कि रूस के बिना वैश्विक अर्थव्यवस्था और संतुलन संभव नहीं। ऊर्जा संसाधनों और रणनीतिक शक्ति के माध्यम से रूस ने अपने आप को वैश्विक राजनीति में मजबूती से स्थापित कर लिया है। पुतिन की चेतावनी उन देशों के लिए स्पष्ट है जो रूस को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं—रूस की स्थिरता और वैश्विक भूमिका को कम नहीं आंका जा सकता।

  • जयशंकर का जी-20 में अमेरिका पर अप्रत्यक्ष हमला, वैश्विक शांति और विकास पर जताई चिंता

    जयशंकर का जी-20 में अमेरिका पर अप्रत्यक्ष हमला, वैश्विक शांति और विकास पर जताई चिंता

    विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की हाल ही में हुई बैठक में बिना किसी का नाम लिए अमेरिका पर अप्रत्यक्ष रूप से कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि “विकास को खतरे में डालकर शांति स्थापित नहीं की जा सकती।” जयशंकर के इस बयान में वैश्विक नीति और अंतरराष्ट्रीय न्याय पर केंद्रित स्पष्ट संदेश था।

    वैश्विक दक्षिण देशों पर बढ़ती महंगाई का मुद्दा

    जयशंकर ने दोहरे मापदंडों की निंदा करते हुए यह भी कहा कि वैश्विक दक्षिण देशों पर ऊर्जा, खाद्य और उर्वरक की बढ़ती कीमतों का सबसे ज्यादा बोझ पड़ा है। उनका कहना था कि विकासशील देशों को अक्सर असमान परिस्थितियों में रहकर दुनिया की नीतियों का सामना करना पड़ता है।

    मौजूदा संघर्ष और सप्लाई चेन पर असर

    विदेश मंत्री ने मौजूदा वैश्विक संघर्षों का जिक्र करते हुए कहा कि इन घटनाओं ने सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स को प्रभावित किया है, जिससे हालात और मुश्किल हो गए हैं। उनका संदेश साफ था — आर्थिक स्थिरता और विकास के लिए वैश्विक सहयोग की आवश्यकता है।

    संवाद और कूटनीति की अपील

    जयशंकर ने जोर देकर कहा कि दुनिया को अब टकराव नहीं बल्कि संवाद और कूटनीति की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश, जो दोनों पक्षों के साथ बातचीत कर सकते हैं, उन्हें शांति कायम करने में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।

    आगामी संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण

    विदेश मंत्री 27 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे। यहां वे वैश्विक शांति, विकास और समान अवसरों की दिशा में भारत की स्थिति को और मजबूती से रखेंगे। यह भाषण अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक सक्रियता को भी दर्शाएगा।

  • मेलोनी का भारत पर बड़ा बयान: वैश्विक संघर्षों में भारत की अहम भूमिका, UNGA में जोर

    मेलोनी का भारत पर बड़ा बयान: वैश्विक संघर्षों में भारत की अहम भूमिका, UNGA में जोर

    इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के सत्र के दौरान भारत की वैश्विक शांति स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की है। उन्होंने कहा कि भारत दुनियाभर के चल रहे युद्धों को समाप्त करने में निर्णायक योगदान दे सकता है। यह बयान रूस-यूक्रेन संघर्ष समेत वैश्विक चुनौतियों के बीच आया है, जहां भारत की राजनयिक क्षमता को मेलोनी ने “बहुत महत्वपूर्ण” करार दिया। न्यूयॉर्क में ANI से बातचीत के दौरान मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “मुझे लगता है कि भारत बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।” यह बयान भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हालिया फोन वार्ता के बाद आया है, जिसमें दोनों नेताओं ने यूक्रेन संकट के शांतिपूर्ण समाधान पर जोर दिया।

    भारत की शांति भूमिका पर फोकस

    UNGA के 80वें सत्र के साइडलाइंस पर मेलोनी का यह बयान वैश्विक नेताओं के बीच चर्चा का केंद्र बन गया। उन्होंने भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत को रेखांकित करते हुए कहा कि नई दिल्ली वैश्विक संघर्षों के समाधान में पुल का काम कर सकता है। विशेष रूप से रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए मेलोनी ने भारत की तटस्थता और संवाद की नीति की तारीफ की। यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर रूसी तेल खरीद को लेकर लगाए गए 25% अतिरिक्त टैरिफ के बीच आया, जिसकी भारत ने कड़ी आलोचना की है। मेलोनी ने कहा कि भारत जैसे उभरते शक्ति केंद्रों की भूमिका से ही वैश्विक स्थिरता संभव है। यह बयान न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करता है, बल्कि G20 और अन्य मंचों पर भारत की नेतृत्व क्षमता को भी प्रमाणित करता है।

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    यूक्रेन शांति और रणनीतिक साझेदारी

    यह बयान सितंबर 2025 की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी और मेलोनी के बीच फोन कॉल के ठीक बाद आया। दोनों नेताओं ने वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की, जिसमें यूक्रेन संघर्ष का शांतिपूर्ण समाधान प्रमुख था। मोदी ने राजनयिक प्रयासों में भारत के पूर्ण समर्थन की पुष्टि की, जबकि मेलोनी ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ भारत के फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया। दोनों ने भारत-इटली संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-29 के तहत साझेदारी को गहरा करने पर सहमति जताई। इसमें निवेश, रक्षा, सुरक्षा, अंतरिक्ष, शिक्षा, विज्ञान-प्रौद्योगिकी और आतंकवाद-रोधी सहयोग जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

    मोदी ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया, “प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ उत्कृष्ट बातचीत हुई। हमने भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और यूक्रेन संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने के साझा हित पर पुन: प्रतिबद्धता जताई।” मेलोनी ने भारत के 2026 में आयोजित होने वाले AI इम्पैक्ट समिट की सफलता पर विश्वास व्यक्त किया। इसके अलावा, इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) पहल के तहत कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सहमति बनी, जो व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देगी। यह वार्ता G7 समिट के बाद दोनों नेताओं की मजबूत केमिस्ट्री को दर्शाती है।

    भारत-इटली संबंधों में नई गति

    मेलोनी ने भारत-EU FTA को “परस्पर लाभकारी” बताते हुए इसके शीघ्र निष्कर्ष के लिए इटली का पूर्ण समर्थन दोहराया। यह एग्रीमेंट व्यापार को दोगुना करने और नई निवेश संभावनाओं को खोलेगा। 2026 के AI इम्पैक्ट समिट पर मेलोनी का उत्साह भारत की डिजिटल नेतृत्व क्षमता को मान्यता देता है। दोनों देशों ने IMEC के माध्यम से मध्य पूर्व के साथ आर्थिक एकीकरण पर काम तेज करने का फैसला लिया, जो रूस-यूक्रेन युद्ध से प्रभावित ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करेगा। ये कदम भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत बनाते हैं, खासकर जब अमेरिका के टैरिफ से चुनौतियां बढ़ रही हैं। इटली भारत का छठा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, और 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 15 बिलियन यूरो को पार कर चुका है।

    तीन साल की भयावहता और हालिया अपडेट

    रूस-यूक्रेन युद्ध को फरवरी 2022 से तीन साल हो चुके हैं, और यह अब तक का सबसे घातक संघर्ष साबित हुआ है। यूक्रेनी शहरों पर रूसी मिसाइल और ड्रोन हमलों से हजारों नागरिक मारे गए, बिजली आपूर्ति चरमरा गई। यूक्रेन ने जवाबी कार्रवाई में रूस के आंतरिक इलाकों, जैसे तेल रिफाइनरियों और ऊर्जा सुविधाओं पर ड्रोन हमले किए। सितंबर 2025 तक, यूक्रेन के कमांडर-इन-चीफ ओलेक्सांद्र सिरस्की के अनुसार, रूस को 2025 में ही 2,99,210 सैनिकों का नुकसान हुआ है। रूस ने जापड-2025 अभ्यास में यूक्रेन से सीखे गए ड्रोन युद्ध के सबक बेलारूस के साथ साझा किए।

    हालिया अपडेट्स में रूस ने यूक्रेन के कोजाची लाहेरी में तीन नागरिकों की हत्या की, जो युद्ध अपराधों की कड़ी का हिस्सा है। यूक्रेन की लंबी दूरी की हड़तालों से रूस की तेल उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक तेल बाजार पर दबाव पड़ा। रूस ने यूरोपीय शांति गारंटी को खारिज करते हुए पोलैंड हवाई क्षेत्र उल्लंघन जैसे हाइब्रिड हमले किए। युद्ध से यूक्रेन की थर्मल क्षमता 80% नष्ट हो चुकी है, और रूस ने 73 वर्ग मील क्षेत्र पर कब्जा किया। भारत की तटस्थता ने इसे शांति वार्ता के लिए आदर्श मध्यस्थ बनाया है।

    शांति के लिए भारत की बढ़ती जिम्मेदारी

    मेलोनी का बयान भारत की वैश्विक कूटनीति को नई ऊंचाई देता है। यूक्रेन जैसे संकटों में भारत की भूमिका न केवल द्विपक्षीय संबंध मजबूत करती है, बल्कि बहुपक्षीय मंचों पर उसकी साख बढ़ाती है। जैसे-जैसे युद्ध लंबा खिंचता जा रहा है, भारत-इटली साझेदारी आर्थिक और रणनीतिक स्थिरता का आधार बनेगी। यह समय है कि वैश्विक नेता भारत जैसे देशों के साथ मिलकर शांति प्रयासों को गति दें।

  • भारत-रूस द्विपक्षीय बैठक: मोदी और पुतिन ने मजबूत की साझेदारी

    भारत-रूस द्विपक्षीय बैठक: मोदी और पुतिन ने मजबूत की साझेदारी

    बैठक का महत्व: चीन के तियानजिन में हाल ही में भारत और रूस के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हिस्सा लिया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुई इस बैठक में भारत-रूस संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों, विशेष रूप से यूक्रेन संघर्ष, पर विस्तृत चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ साझेदारी को मजबूत करने पर जोर दिया। यह बैठक दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग की गहरी नींव को दर्शाती है।

    पुतिन के विचार: भारत एक विश्वसनीय साझेदार

    रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस बैठक में भारत को रूस का एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को “मेरे दोस्त” कहकर संबोधित किया और कहा कि इस मुलाकात से दोनों देशों के रिश्तों में और मजबूती आएगी। पुतिन ने जोर देकर कहा कि भारत और रूस के संबंध सिद्धांतों पर आधारित हैं, जो विश्वास और पारस्परिक सम्मान पर टिके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देश अपने संयुक्त प्रयासों को और तेज करेंगे ताकि वैश्विक मंच पर सहयोग को और बढ़ाया जा सके। पुतिन ने भारत के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि दोनों देश एक साथ प्रगति करेंगे। उनकी यह टिप्पणी दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक रिश्तों को रेखांकित करती है।

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    पीएम मोदी की प्रतिबद्धता: शांति और सहयोग की दिशा में

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस बैठक में भारत-रूस संबंधों की मजबूती पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय बैठकें होती रहती हैं, जो आपसी विश्वास को और गहरा करती हैं। मोदी ने रूस को एक ऐसा साझेदार बताया, जो कठिन परिस्थितियों में भी भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा है। यूक्रेन संघर्ष के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि भारत शांति के प्रयासों का समर्थक है और इस दिशा में रूस के साथ लगातार संवाद बनाए हुए है। मोदी ने पुतिन की तारीफ करते हुए कहा कि उनसे मुलाकात हमेशा यादगार होती है और यह दोनों देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान का एक शानदार अवसर प्रदान करती है।

    भविष्य की दिशा: सकारात्मक सहयोग

    बैठक में दोनों नेताओं ने भविष्य में और अधिक सहयोग बढ़ाने पर बल दिया। भारत और रूस के बीच रक्षा, व्यापार, ऊर्जा और तकनीकी क्षेत्रों में सहयोग पहले से ही मजबूत है, और इस बैठक ने इन क्षेत्रों में और प्रगति की नींव रखी। दोनों देशों ने वैश्विक चुनौतियों, जैसे कि शांति स्थापना और आर्थिक सहयोग, पर मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का एक मंच थी, बल्कि वैश्विक स्थिरता और शांति के लिए दोनों देशों की साझा दृष्टि को भी रेखांकित करती है।

  • AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान की हरकतों पर कड़ा रुख अपनाया, FATF ग्रे लिस्ट में वापसी की मांग की

    AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान की हरकतों पर कड़ा रुख अपनाया, FATF ग्रे लिस्ट में वापसी की मांग की

    ओवैसी का तीखा हमला: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान और वहां की सेना के रवैये पर जोरदार हमला बोला है। हाल ही में एक जनसभा के दौरान ओवैसी ने पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर द्वारा एक फर्जी तस्वीर को भारत पर कथित जीत का प्रतीक बताने को “मूर्खतापूर्ण और हास्यास्पद” करार दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की नीयत और नीति दोनों ही संदिग्ध हैं, और भारत जैसे देश से मुकाबला करने के लिए वह सिर्फ दिखावा कर रहा है।

    ओवैसी ने उस तस्वीर का ज़िक्र किया जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ को सेना प्रमुख असीम मुनीर ने भेंट की थी। दावा किया गया कि यह तस्वीर भारत पर पाकिस्तान की जीत की प्रतीक है। लेकिन असल में वह तस्वीर 2019 में चीन द्वारा आयोजित सैन्य अभ्यास की थी। इस फर्जीवाड़े पर ओवैसी ने कहा, “ये बेवकूफ जोकर भारत से प्रतिस्पर्धा करना चाहते हैं। नकल करने के लिए अकल चाहिए, जो इनके पास नहीं है।”

    FATF में वापसी की ज़रूरत
    कुवैत में भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत के दौरान ओवैसी ने फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की भूमिका पर बात करते हुए पाकिस्तान को फिर से ग्रे सूची में डालने की वकालत की। FATF एक अंतरराष्ट्रीय संस्था है जो मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण की निगरानी करती है। ग्रे लिस्ट में शामिल देशों पर वित्तीय निगरानी बढ़ा दी जाती है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है।

    ओवैसी ने कहा कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों के लिए हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अवैध माध्यमों का इस्तेमाल करता है। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान ने मध्य पूर्व में ऐसे नेटवर्क खड़े किए हैं जो आतंकियों को फंडिंग करते हैं। उनके अनुसार, “यह बेहद ज़रूरी है कि पाकिस्तान की इन हरकतों पर नज़र रखी जाए और उसे दोबारा FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाए।”

    IMF फंड का संभावित दुरुपयोग
    ओवैसी ने चेतावनी दी कि पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मिलने वाले 2 बिलियन डॉलर के ऋण का दुरुपयोग आतंकवाद के समर्थन में किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान की निगरानी नहीं की गई, तो यह रकम भारत विरोधी गतिविधियों में लगाई जा सकती है। ओवैसी का यह बयान केवल भारत की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी अहम माना जा रहा है।

    पाकिस्तान की वैश्विक छवि पर प्रहार
    अपने संबोधन में ओवैसी ने पाकिस्तान की गिरती वैश्विक साख पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इस तरह की फर्जी तस्वीरें और झूठे दावे न सिर्फ पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को अगर भारत जैसी मजबूत और लोकतांत्रिक व्यवस्था से प्रतिस्पर्धा करनी है तो उसे अपने आंतरिक सिस्टम और नीतियों में गहराई से सुधार करना होगा।