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  • जम्मू में ब्लैकआउट: ड्रोन अलर्ट पर सेना मुस्तैद

    जम्मू में ब्लैकआउट: ड्रोन अलर्ट पर सेना मुस्तैद

    सीमा पर लगातार बढ़ते तनाव के बीच गुरुवार, 8 मई की रात जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया। जम्मू, सांबा, अखनूर और पुंछ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अचानक ब्लैकआउट कर दिया गया। पूरे क्षेत्र की बिजली काट दी गई, जिससे अंधेरा छा गया। इसके साथ ही सायरन की तेज आवाजें गूंजने लगीं, जिससे लोग अलर्ट हो गए। ब्लैकआउट और सायरन का उद्देश्य लोगों को संभावित खतरे से पहले ही सचेत करना था।

    इन सबके पीछे कारण था पाकिस्तान की ओर से की गई एक और नापाक हरकत। जानकारी के अनुसार, जम्मू के कई इलाकों में ड्रोन देखे गए। सुरक्षा बलों ने तेजी दिखाते हुए उन्हें मार गिराया। जम्मू यूनिवर्सिटी के पास दो पाकिस्तानी ड्रोन को गिराया गया। इसके अलावा जम्मू एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, चन्नी हिम्मत और आरएस पुरा जैसे क्षेत्रों में भी पाकिस्तानी ड्रोन की गतिविधियां देखी गईं, जिन्हें नाकाम कर दिया गया।

    इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों ने बताया कि उन्होंने रात के समय आसमान में आग के गोले जैसे ऑब्जेक्ट देखे। कुछ लोगों ने धमाके जैसी आवाजें भी सुनीं। इन सब घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि पाकिस्तान, भारत में अशांति फैलाने की लगातार नाकाम कोशिशें कर रहा है।

    भारतीय सेना की तत्परता की एक और मिसाल अखनूर और सांबा के इलाकों में देखने को मिली। यहां भी लोगों ने ड्रोन जैसी आकृति को उड़ते हुए देखा। सेना ने इन सभी इलाकों में चौकसी बढ़ा दी है और सायरन बजाकर लोगों को अलर्ट किया जा रहा है। सुरक्षा बल न केवल ड्रोन को गिरा रहे हैं, बल्कि आसपास के लोगों से भी सतर्क रहने और किसी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देने को कहा गया है।

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    इस बीच, जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद्य ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में बताया कि उन्होंने भी धमाकों की आवाजें सुनीं और आसमान में कुछ उड़ता हुआ देखा। उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान की बौखलाहट है, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद और बढ़ गई है। भारत द्वारा की गई सर्जिकल कार्रवाई के बाद पाकिस्तान लगातार सीमावर्ती इलाकों में गोलीबारी और ड्रोन हमले की कोशिश कर रहा है।

    सुरक्षा कारणों से श्रीनगर में बिजली सेवा को भी एहतियात के तौर पर अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। सेना के मुताबिक, यह कदम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में नुकसान को टाला जा सके।

    गौरतलब है कि जम्मू में सेना के कई अहम ठिकाने मौजूद हैं और यहां किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देना ज़रूरी होता है। ड्रोन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर पाकिस्तान भारतीय सैन्य प्रतिष्ठानों और नागरिक इलाकों को निशाना बनाने की साजिश रचता रहा है, लेकिन भारतीय सेना की सतर्कता इन मंसूबों को हर बार नाकाम कर देती है।

    जम्मू-कश्मीर के मौजूदा हालात साफ तौर पर संकेत देते हैं कि भारत को चौकन्ना रहना होगा। सीमाओं पर तैनात जवान हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, लेकिन किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें।

    सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी और आम जनता की जागरूकता ही मिलकर ऐसे खतरे से निपटने में कारगर सिद्ध हो सकती है। पाकिस्तान की इन नापाक कोशिशों के जवाब में भारत हर मोर्चे पर तैयार है और जम्मू की ये रात इसका प्रमाण है।

  • CM उमर अब्दुल्ला ने कांस्टेबल तारिक को दी श्रद्धांजलि

    CM उमर अब्दुल्ला ने कांस्टेबल तारिक को दी श्रद्धांजलि

    जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बहादुर कांस्टेबल तारिक हुसैन को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी हाल ही में ड्यूटी के दौरान वीरगति हो गई। उनकी शहादत ने पूरे राज्य को गमगीन कर दिया है, और राजनीतिक तथा प्रशासनिक गलियारों में इस घटना की कड़ी निंदा हो रही है।

    कौन थे कांस्टेबल तारिक हुसैन?

    कांस्टेबल तारिक हुसैन जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक जांबाज जवान थे, जो लंबे समय से अपनी निडर सेवा के लिए जाने जाते थे। वे आतंकवाद विरोधी अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे और राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे थे। उनकी बहादुरी और कर्तव्यनिष्ठा के चलते वे जनता के बीच काफी लोकप्रिय थे।

    घटना का पूरा विवरण

    सूत्रों के अनुसार, कांस्टेबल तारिक हुसैन एक विशेष अभियान पर तैनात थे, जब आतंकवादियों ने उन पर अचानक हमला कर दिया। इस हमले में वे गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में अस्पताल में इलाज के दौरान शहीद हो गए। सुरक्षा बलों ने जवाबी कार्रवाई की और इलाके में तलाशी अभियान चलाया, जिसमें कई संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है।

    उमर अब्दुल्ला की श्रद्धांजलि

    जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने शोक संदेश में कहा, “कांस्टेबल तारिक हुसैन की शहादत हम सभी के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपने कर्तव्य का पालन करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। ईश्वर उनके परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें।”

    उन्होंने आगे कहा कि आतंकवाद को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और शहीदों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने दिया जाएगा।

    राज्य में शोक की लहर

    कांस्टेबल तारिक हुसैन की शहादत से पूरे राज्य में शोक की लहर है। उनके गांव और जिले में लोग उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में एकत्र हुए। स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किए और उन्हें सलामी दी।

    उनके परिवारजनों ने इस क्षति पर गहरा दुख व्यक्त किया और सरकार से अपील की कि आतंकवाद के खिलाफ और कठोर कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

    सुरक्षा बलों की प्रतिक्रिया

    इस हमले के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके में व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने मिलकर पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और आतंकियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने कहा कि शहीद जवान की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी और दोषियों को जल्द ही पकड़ लिया जाएगा।

    सरकार की ओर से सहायता

    सरकार ने कांस्टेबल तारिक हुसैन के परिवार को हरसंभव सहायता देने की घोषणा की है। उनके परिवार को आर्थिक मदद के साथ-साथ उनके बच्चों की शिक्षा और अन्य सुविधाओं के लिए भी विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं। राज्य सरकार ने शहीद जवान के परिवार को सम्मान देने के लिए उनके नाम पर एक स्मारक बनाने का भी आश्वासन दिया है।

    आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख

    जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार और केंद्रीय एजेंसियां लगातार प्रयास कर रही हैं। पिछले कुछ महीनों में आतंकवादी हमलों में वृद्धि देखी गई है, जिसे रोकने के लिए सुरक्षा बल लगातार गश्त और अभियान चला रहे हैं।

    राजनीतिक नेताओं ने भी आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाने की अपील की है। उमर अब्दुल्ला ने अपने संदेश में कहा, “यह समय एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का है। हमें उन ताकतों को परास्त करना होगा, जो हमारे देश की शांति और सौहार्द को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं।”

    जनता का समर्थन और अपील

    इस दुखद घटना के बाद, आम जनता भी शहीद कांस्टेबल के परिवार के समर्थन में सामने आई है। कई सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने उनके परिवार की आर्थिक सहायता करने की पहल की है।

    लोगों ने सरकार से अपील की है कि राज्य में सुरक्षा को और मजबूत किया जाए और आतंकवादियों के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएं।