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  • अमृतसर में रक्षा बंधन: पीएम मोदी को सैकड़ों राखियां भेजीं

    अमृतसर में रक्षा बंधन: पीएम मोदी को सैकड़ों राखियां भेजीं

    एकता और आभार का प्रतीक

    अमृतसर के लोहरी गेट इलाके में 8 अगस्त 2025 को रक्षा बंधन के पावन अवसर पर सैकड़ों महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राखी भेजकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। यह आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चला, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। महिलाओं ने इन राखियों को “धन्यवाद का धागा” नाम दिया, जो पीएम मोदी के नेतृत्व और विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के प्रति उनके आभार का प्रतीक था। इस ऑपरेशन को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक जवाब के रूप में सराहा गया, जिसने देश की सुरक्षा और एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    ‘ऑपरेशन सिंदूर’: आतंकवाद पर करारा प्रहार

    महिलाओं ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को आतंकवाद के खिलाफ भारत की सख्त नीति का एक मजबूत उदाहरण बताया। इस ऑपरेशन के जरिए भारत ने पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश दिया कि वह निर्दोष नागरिकों के खिलाफ किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं करेगा। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, जो इस आयोजन में मौजूद थे, ने कहा कि यह रक्षा बंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि देश की महिलाओं और प्रधानमंत्री के बीच गहरे रिश्ते का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि अमृतसर की महिलाओं ने राखी भेजकर न केवल पीएम मोदी के प्रति सम्मान व्यक्त किया, बल्कि देश की एकता और अखंडता के लिए उनके प्रयासों को भी सराहा।

    सर्जिकल स्ट्राइक: भारत की ताकत का प्रदर्शन

    तरुण चुघ ने इस अवसर पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे निर्णायक कदमों की प्रशंसा की, जिन्होंने विश्व मंच पर भारत की ताकत को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है, जिससे देश की सुरक्षा को नई मजबूती मिली है। अमृतसर की बहनों ने भी इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई करके देशवासियों को गर्व का अनुभव कराया है। यह आयोजन न केवल रक्षा बंधन का उत्सव था, बल्कि देशभक्ति और एकता का एक शक्तिशाली संदेश भी था।

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    आम आदमी पार्टी पर निशाना

    इस अवसर पर तरुण चुघ ने आम आदमी पार्टी (आप) पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार ने पंजाब में किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश की है। उन्होंने घोषणा की कि 19 अगस्त के बाद पंजाब बीजेपी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा के नेतृत्व में राज्यव्यापी विरोध आंदोलन शुरू होगा। चुघ ने कहा, “हम इस लड़ाई को गांव-गांव तक ले जाएंगे और सुनिश्चित करेंगे कि पंजाब की एक इंच जमीन भी गलत तरीके से न ली जाए।” यह बयान पंजाब के किसानों के हितों की रक्षा के लिए बीजेपी की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

  • ट्रंप के दावों पर कांग्रेस का हमला: मोदी की चुप्पी पर सवाल

    ट्रंप के दावों पर कांग्रेस का हमला: मोदी की चुप्पी पर सवाल

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार यह दावा करने कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका, भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बयान पर कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बीजेपी और पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों से बीजेपी एक फिल्म बना रही थी, जिसे वे ‘मुकद्दर का सिकंदर’ बता रहे थे, लेकिन अब यह ‘नरेंदर का सरेंडर’ बनकर सामने आई है। खेड़ा ने कहा कि बहादुरी कोई इंजेक्शन से नहीं आती, यह चरित्र से प्रकट होती है, और बीजेपी-आरएसएस का इतिहास कायरता से भरा हुआ है।

    ट्रंप के दावों पर सवाल

    पवन खेड़ा ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने 12 बार कहा कि उनकी मध्यस्थता के कारण भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुका। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, “ट्रंप का फोन आया और नरेंद्र मोदी मिमियाते हुए सरेंडर कर गए। 22 दिनों में ट्रंप ने एक दर्जन बार दावा किया कि उन्होंने सीजफायर कराया, लेकिन पीएम मोदी एक बार भी जवाब नहीं दे सके। यह ‘नाम नरेंद्र, काम सरेंडर’ की हकीकत है।” उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।

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    चीन के मुद्दे पर भी हमला

    कांग्रेस प्रवक्ता ने चीन के मुद्दे पर भी पीएम मोदी को घेरा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार चीन के सामने डरी हुई है। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, “अगर आप सचमुच बहादुर हैं, तो चीन से मुकाबले की नीति बनाइए। केवल डायलॉग देने से कुछ नहीं होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी को डायलॉग देने की ट्रेनिंग अभिनेता परेश रावल से मिली है, जिन्हें बीजेपी ने सांसद भी बनाया था। खेड़ा ने विदेश मंत्री एस जयशंकर पर भी कटाक्ष किया, उन्हें “पराजय शंकर” कहकर संबोधित किया और कहा कि वे चुप हैं क्योंकि बोलने पर ट्रोल हो जाते हैं।

    चीन के एयरबेस और सरकार की चुप्पी

    खेड़ा ने चीन द्वारा बांग्लादेश की सीमा के पास एयरबेस बनाने पर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां डर से प्रेरित हैं, और डर से कोई मजबूत नीति नहीं बनती। कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह सवालों से डरती है और विपक्ष के सामने आने से बच रही है।

    प्रधानमंत्री सेना नहीं, जवाबदेह नेता

    बीजेपी के इस आरोप कि कांग्रेस सेना का अपमान कर रही है, खेड़ा ने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री पर सवाल उठाना सेना पर सवाल उठाने के बराबर नहीं है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री देश के नेता हैं, सेना नहीं। उनसे सवाल पूछना हमारा अधिकार है। अगर हम अपने पीएम से सवाल नहीं पूछेंगे, तो क्या पाकिस्तान से पूछेंगे?”

    विपक्ष से डरती है सरकार

    खेड़ा ने कहा कि विपक्ष संसद के विशेष सत्र की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार डर के मारे इसे बुलाने से कतरा रही है। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, “वे विपक्ष से डरते हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस से डरते हैं, और सवालों से डरते हैं, क्योंकि उनके पास सच का सामना करने की हिम्मत नहीं है।”

  • राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ बयान पर बीजेपी का तीखा हमला: ऑपरेशन सिंदूर विवाद

    राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ बयान पर बीजेपी का तीखा हमला: ऑपरेशन सिंदूर विवाद

    कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को ‘सरेंडर’ कहने वाले बयान ने भारतीय राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इस बयान को सेना का अपमान बताते हुए राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी की गंभीरता और परिपक्वता पर सवाल उठाए, साथ ही उनके बयान को खतरनाक मानसिकता का परिचायक बताया।

    त्रिवेदी ने कहा कि एक ओर भारत का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं, वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रख रहा है। वहीं, दूसरी ओर राहुल गांधी ‘स्तरहीन और ओछी’ टिप्पणियों के जरिए नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को ‘सरेंडर’ से जोड़कर न केवल अपनी अपरिपक्वता दिखाई, बल्कि भारतीय सेना का अपमान भी किया।” त्रिवेदी ने जोर देकर कहा कि यह बयान इतना गंभीर है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख या किसी आतंकी संगठन ने भी ऐसी बात नहीं कही।

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    बीजेपी सांसद ने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या राहुल गांधी का यह बयान सेना का अपमान नहीं है? उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर की घोषणा भारतीय सेना ने की थी, न कि बीजेपी ने। त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयान को राष्ट्र की एकजुटता के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह बयान न केवल राजनीतिक रूप से गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी हानिकारक है।

    इस विवाद ने भारतीय राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। जहां बीजेपी ने इसे सेना और देश के सम्मान से जोड़ा, वहीं कांग्रेस के लिए यह बयान एक बड़े विवाद का कारण बन गया है। त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को अपने शब्दों के लिए जवाब देना होगा, क्योंकि यह बयान भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर कमजोर कर सकता है।

  • ऑपरेशन सिंदूर पर गरमाई सियासत, अमित शाह ने ममता पर साधा निशाना, TMC ने माँगा इस्तीफा

    ऑपरेशन सिंदूर पर गरमाई सियासत, अमित शाह ने ममता पर साधा निशाना, TMC ने माँगा इस्तीफा

    एक तरफ आतंकवाद के खिलाफ भारत का कड़ा जवाब ऑपरेशन सिंदूर,तो दूसरी ओर देश की सियासत में उस पर छिड़ी जबरदस्त बहस।केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच अब सीधा टकराव सामने आया है।

    क्या बोले अमित शाह?

    रविवार को एक जनसभा में अमित शाह ने ममता बनर्जी पर आरोप लगाते हुए कहाममता दीदी ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध मुस्लिम वोटबैंक को खुश करने के लिए किया। यह राष्ट्रहित के खिलाफ है।उन्होंने ये भी जोड़ा कि जब भारत आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर रहा था, तब तृणमूल कांग्रेस ने उसका समर्थन करने की बजाय सवाल उठाए।

    TMC का पलटवार

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया और गृह मंत्री से इस्तीफे की मांग कर डाली।पार्टी प्रवक्ता ने कहापहलगाम हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई। गृह मंत्रालय की विफलता है ये। अमित शाह पहले अपनी जिम्मेदारी लें और इस्तीफा दें

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     क्या है ऑपरेशन सिंदूर?

    अप्रैल को पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) में हुए आतंकी हमले में 26 नागरिक मारे गए ।7 मई को भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ लॉन्च किया  । इसमें भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और POK में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसे सर्जिकल स्ट्राइक 2.0 भी कहा जा रहा है

     राजनीति बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा

    यह पहली बार नहीं है जब आतंकवाद पर कार्रवाई के बाद राजनीतिक बयानबाज़ी शुरू हुई हो।जहाँ केंद्र सरकार इसे “सख्त और निर्णायक नीति” बता रही है, वहीं विपक्ष पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है।ऑपरेशन सिंदूर पर देश गर्व कर रहा है, लेकिन इससे जुड़े सियासी आरोप-प्रत्यारोप अब नई बहस को जन्म दे रहे हैं।क्या ये मुद्दा राष्ट्र सुरक्षा की चर्चा को पीछे छोड़ देगा?

  • भारत-पाक तनाव: शांगरी-ला डायलॉग में आतंकवाद और कश्मीर पर चर्चा

    भारत-पाक तनाव: शांगरी-ला डायलॉग में आतंकवाद और कश्मीर पर चर्चा

    सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौ revered हान ने पाकिस्तान को आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की है और विरोधियों को इससे सबक लेना चाहिए। जनरल चौहान ने स्पष्ट किया कि भारत पिछले दो दशकों से प्रॉक्सी वॉर का सामना कर रहा है, जिसमें कई लोगों की जान गई है। अब भारत इस खतरे को पूरी तरह समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “हमने आतंक के खिलाफ एक नई लाइन खींच दी है। मुझे उम्मीद है कि हमारे विरोधी भारत के संयम की सीमा को समझ गए होंगे।”

    ऑपरेशन सिंदूर: भारत की आतंकवाद के खिलाफ मजबूत कार्रवाई

    ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की एक ऐसी कार्रवाई थी, जिसने आतंकवाद के खिलाफ भारत की दृढ़ता को दर्शाया। पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी, जिसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकियों को ढेर किया गया। पाकिस्तानी सेना ने इसके जवाब में भारत पर हमले की कोशिश की, लेकिन भारतीय सेना ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया। यह ऑपरेशन भारत की आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का प्रतीक है।

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    पाकिस्तान ने फिर उठाया कश्मीर का मुद्दा

    शांगरी-ला डायलॉग में पाकिस्तान के जनरल साहिर शमशाद मिर्जा ने भी हिस्सा लिया और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाया। उन्होंने दावा किया कि कश्मीर का मसला वहां के लोगों की इच्छा और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) के प्रस्तावों के आधार पर सुलझाया जाना चाहिए। मिर्जा ने कहा, “विवाद को खत्म करने के लिए इसका समाधान देखना चाहिए। जब विवाद नहीं होगा, तब कश्मीर के मुद्दे पर बातचीत संभव है।” उनके इस बयान को भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान की पुरानी रणनीति के रूप में देखा, जिसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को घेरना है।

    भारत की रणनीति और भविष्य

    जनरल चौहान के बयान से स्पष्ट है कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को और तेज करेगा। ऑपरेशन सिंदूर जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि भारत अब रक्षात्मक रुख के बजाय सक्रिय और आक्रामक रणनीति अपना रहा है। पाकिस्तान की ओर से बार-बार कश्मीर मुद्दे को उठाना और आतंकवाद को बढ़ावा देना क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर यह स्पष्ट कर दिया है कि वह शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। शांगरी-ला डायलॉग में भारत ने न केवल अपनी ताकत दिखाई, बल्कि यह भी जता दिया कि वह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करने के लिए तैयार है।

  • राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर दिया

    राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति पर जोर दिया

    भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को आईएनएस विक्रांत पर भारतीय नौसेना के जवानों को संबोधित करते हुए पाकिस्तान को आतंकवाद के समर्थन को लेकर कड़ी चेतावनी दी। सिंह ने पाकिस्तान से स्पष्ट कहा कि वह मसूद अजहर, हाफिज सईद जैसे आतंकवादियों को भारत के हवाले करे, अन्यथा भारत आतंकवाद के खिलाफ सख्त और निर्णायक कदम उठाएगा।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद से पाकिस्तान आतंकवाद का जो खेल खेल रहा था, वह अब समाप्त हो चुका है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है और इस खतरे से निपटने के लिए हर संभव साधन का उपयोग करेगा। उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत के कदम इतने सख्त होंगे कि पाकिस्तान के लिए उन्हें अनुमान लगाना भी कठिन होगा।

    ऑपरेशन सिंदूर: आतंकवाद पर निर्णायक प्रहार

    रक्षा मंत्री ने हाल ही में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए इसे भारत के आतंकवाद विरोधी संकल्प का प्रतीक बताया। इस ऑपरेशन के तहत भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों को कम समय में ध्वस्त कर दिया। सिंह ने भारतीय नौसेना की भूमिका की विशेष प्रशंसा की और बताया कि वायु सेना के हमलों के दौरान नौसेना की आक्रामक तैनाती ने पाकिस्तान को अपने तटीय क्षेत्र में सीमित कर दिया।

    इस रणनीति ने पाकिस्तान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक बाधित कर दिया और आतंकवादी ठिकानों को निशाना बना कर भारत ने एक स्पष्ट संदेश दिया कि आतंकवाद के लिए कोई स्थान नहीं है। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर न केवल सैन्य कार्रवाई थी, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ भारत का प्रभावी और निर्णायक हमला था।

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    संघर्ष विराम और भारत की शर्तें

    सिंह ने 10 मई को भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम पर भी बात की। उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत को युद्ध रोकने के लिए दबाव डालने के दावे को पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत ने अपनी शर्तों पर ही सैन्य कार्रवाई रोकी है, जो भारत की स्वतंत्र और मजबूत नीति का परिचायक है।

    भारतीय नौसेना की ताकत और आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई

    रक्षा मंत्री ने भारतीय नौसेना के जवानों की बहादुरी और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी तैनाती ने न केवल भारत की समुद्री सीमाओं को सुरक्षित किया, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने साफ कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई में कोई समझौता नहीं करेगा और पाकिस्तान को आतंकवाद के समर्थन की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

  • रक्षा मंत्री: पीओके जल्द होगा भारत का हिस्सा

    रक्षा मंत्री: पीओके जल्द होगा भारत का हिस्सा

    29 मई 2025 को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन-2025 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि एक दशक पहले भारत का रक्षा निर्यात 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, जो अब बढ़कर 23,500 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह उपलब्धि भारत के ‘मेक-इन-इंडिया’ अभियान की सफलता का प्रतीक है। सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की स्वदेशी रक्षा प्रणालियों ने वैश्विक मंच पर अपनी ताकत और क्षमता का प्रदर्शन किया है। यह केवल रक्षा उपकरणों का निर्माण नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी की युद्ध प्रौद्योगिकियों की तैयारी भी है। भारत एक मजबूत और भविष्य के लिए तैयार रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रहा है, जो देश को वैश्विक स्तर पर और सशक्त बनाएगा।

    पीओके के साथ भारत का अटूट सांस्कृतिक बंधन

    रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के साथ भारत के गहरे सांस्कृतिक और भावनात्मक रिश्ते पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “भारत हमेशा दिलों को जोड़ने की बात करता है, उन्हें तोड़ने की नहीं।” सिंह ने विश्वास जताया कि पीओके के लोग भारत के साथ गहरा जुड़ाव महसूस करते हैं और केवल कुछ लोग ही गुमराह हैं। उन्होंने पीओके के लोगों की तुलना महाराणा प्रताप के भाई शक्ति सिंह से की, जो भौगोलिक और राजनीतिक रूप से अलग होने के बावजूद दिल से भारत के साथ हैं। सिंह ने कहा, “वह दिन दूर नहीं जब पीओके खुद ही भारत में वापस लौट आएगा और कहेगा, ‘मैं भारत हूं, मैं वापस आया हूं।’” यह विश्वास भारत की एकता और साझा विरासत के दृष्टिकोण पर आधारित है।

    आतंकवाद पर कड़ा रुख और बातचीत का नया दायरा

    आतंकवाद के मुद्दे पर राजनाथ सिंह ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वालों को भारी कीमत चुकानी पड़ती है, जैसा कि पाकिस्तान को अब अनुभव हो रहा है। सिंह ने स्पष्ट किया कि भारत ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के दायरे को फिर से परिभाषित किया है। अब बातचीत केवल आतंकवाद और पीओके के मुद्दों पर केंद्रित होगी। उन्होंने कहा, “हमने आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति को नया स्वरूप दिया है। पीओके के लोग हमारे अपने हैं, हमारे परिवार का हिस्सा हैं।” यह बयान भारत की दृढ़ नीति और एकता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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    एक भारत, श्रेष्ठ भारत का संकल्प

    रक्षा मंत्री ने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और आर्थिक समृद्धि पीओके के एकीकरण की नींव है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का लक्ष्य न केवल अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करना है, बल्कि अपने लोगों के दिलों को जोड़ना भी है। पीओके का भारत में एकीकरण केवल समय की बात है, क्योंकि यह सांस्कृतिक और भावनात्मक बंधनों पर आधारित है। भारत का यह दृष्टिकोण एकता, प्रेम और साझा विरासत पर केंद्रित है, जो इसे वैश्विक मंच पर और अधिक शक्तिशाली बनाता है।

  • कश्मीर पर पीएम मोदी: 1947 में होनी चाहिए थी सख्त कार्रवाई

    कश्मीर पर पीएम मोदी: 1947 में होनी चाहिए थी सख्त कार्रवाई

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात की एक जनसभा में कश्मीर मुद्दे को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने 1947 के घटनाक्रम की ओर इशारा करते हुए कहा कि भारत के विभाजन के समय जो निर्णय लिए गए, वे आज भी देश को प्रभावित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उस समय आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती और देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की सलाह को माना गया होता, तो कश्मीर की स्थिति आज बिल्कुल अलग होती।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए कहा कि 1947 में जब भारत आज़ाद हुआ, उसी रात कश्मीर पर पहला आतंकवादी हमला हुआ। पाकिस्तान ने ‘मुजाहिद्दीन’ के नाम पर आतंकी भेजकर कश्मीर के एक हिस्से पर कब्जा कर लिया। उन्होंने कहा कि वह हमला न केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष था, बल्कि भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला था। उस समय इन तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

    सरदार पटेल की चेतावनी को नज़रअंदाज़ किया गया

    पीएम मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल के दृष्टिकोण का ज़िक्र करते हुए कहा कि पटेल की स्पष्ट राय थी कि जब तक पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को भारत में वापस नहीं लाया जाता, तब तक सेना को पीछे नहीं हटना चाहिए था। लेकिन तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने उनकी इस राय को दरकिनार कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि कश्मीर आज भी आतंकवाद और अलगाववाद से जूझ रहा है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक भूल केवल राजनीतिक नहीं थी, बल्कि यह सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी चूक थी, जिसने भारत को दशकों तक अस्थिरता के हवाले कर दिया। उन्होंने इस बात पर भी अफसोस जताया कि कई सरकारें इस मुद्दे पर केवल राजनीतिक फायदा उठाने में लगी रहीं और ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस पहल नहीं की गई।

    अनुच्छेद 370 हटाने का ऐतिहासिक कदम

    पीएम मोदी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों की चर्चा करते हुए अनुच्छेद 370 हटाने को ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला अनुच्छेद 370, वहां की अस्थिरता का एक बड़ा कारण था। इसे हटाकर केंद्र सरकार ने न केवल कश्मीर को मुख्यधारा से जोड़ा, बल्कि वहां विकास और निवेश के नए द्वार भी खोले।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि आज का भारत पहले जैसा कमजोर नहीं है। भारत अब आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। चाहे ऑपरेशन बालाकोट हो या हाल के सुरक्षा बलों के जवाबी हमले, भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सीमाओं और नागरिकों की रक्षा के लिए हर कदम उठाने को तैयार है।

    युवाओं को दी प्रेरणा

    पीएम मोदी ने अपने भाषण के अंत में युवाओं से सरदार पटेल जैसे महान नेताओं से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने की जिम्मेदारी अब नई पीढ़ी के कंधों पर है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल राजनीति से नहीं, बल्कि देशभक्ति और दूरदर्शिता से ही हम एक सशक्त भारत का निर्माण कर सकते हैं।

  • बांग्लादेश में सियासी संकट: यूनुस का इस्तीफा, हसीना की वापसी?

    बांग्लादेश में सियासी संकट: यूनुस का इस्तीफा, हसीना की वापसी?

    बांग्लादेश एक बार फिर राजनीतिक अस्थिरता के भंवर में फंस गया है। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस ने 22 मई 2025 को अपनी सलाहकार परिषद की बैठक में इस्तीफे की धमकी दी। उन्होंने कहा कि यदि राजनीतिक दलों के बीच चुनावी सुधारों पर सहमति नहीं बनी, तो वह अपने पद से हट जाएंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब बांग्लादेश पहले ही आर्थिक असमानता, सामाजिक उथल-पुथल और सियासी अनिश्चितता से जूझ रहा है। दूसरी ओर, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी की अटकलों ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।

    2024 का छात्र आंदोलन: सत्ता का पतन

    अगस्त 2024 में बांग्लादेश में छात्र आंदोलनों ने शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार को उखाड़ फेंका। यह आंदोलन सरकारी नौकरियों में आरक्षण प्रणाली के खिलाफ शुरू हुआ, जो जल्द ही हिंसक प्रदर्शनों में बदल गया। इस दौरान 32 से अधिक लोगों की जान गई और सैकड़ों घायल हुए। बढ़ते दबाव के चलते शेख हसीना को इस्तीफा देकर भारत में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद सेना ने हस्तक्षेप कर एक अंतरिम सरकार बनाई, जिसके प्रमुख सलाहकार के रूप में 84 वर्षीय अर्थशास्त्री मोहम्मद यूनुस को नियुक्त किया गया।

    यूनुस का नेतृत्व और सामने आई चुनौतियां

    मोहम्मद यूनुस, जिन्हें 2006 में माइक्रोक्रेडिट के लिए नोबेल शांति पुरस्कार मिला था, ने देश में स्थिरता और लोकतंत्र की बहाली का वादा किया था। उनकी नियुक्ति को छात्र आंदोलनकारियों ने समर्थन दिया, जो उन्हें एक तटस्थ और सम्मानित व्यक्तित्व मानते थे। लेकिन नौ महीने बाद भी उनकी सरकार कई चुनौतियों से घिरी है। चुनावी सुधारों पर असहमति, सेना के साथ तनाव और कट्टरपंथी संगठनों का दबाव उनकी स्थिति को कमजोर कर रहा है।

    इस्तीफे की धमकी के पीछे कारण

    यूनुस ने अपनी नाराजगी के कई कारण बताए। सबसे बड़ा मुद्दा है चुनावी सुधारों पर असहमति। उन्होंने 2026 तक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने का वादा किया था, लेकिन बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) तत्काल चुनाव की मांग कर रही है। बीएनपी ने यूनुस पर सत्ता को लंबे समय तक अपने पास रखने का आरोप लगाया। इसके अलावा, सेना के साथ उनके तनावपूर्ण संबंध भी एक बड़ा कारण हैं। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमान ने दिसंबर 2025 तक चुनाव कराने का निर्देश दिया है। म्यांमार के साथ मानवीय गलियारे और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर भी मतभेद सामने आए हैं।

    कट्टरपंथी दबाव और हसीना की वापसी की अटकलें

    यूनुस पर जमात-ए-इस्लामी और हिफाजत-ए-इस्लाम जैसे कट्टरपंथी संगठनों का समर्थन लेने के आरोप हैं। इन संगठनों के दबाव में वह खुद को “बंधक जैसा” महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर, शेख हसीना की वापसी की अटकलों ने सियासी माहौल को और गरमा दिया है। भारत में रह रही हसीना ने अपनी पार्टी अवामी लीग को संगठित करने और सक्रिय राजनीति में लौटने की इच्छा जताई है। उनकी पार्टी ने 1 फरवरी 2025 से देशव्यापी प्रदर्शनों की घोषणा की थी, जिसमें यूनुस सरकार के इस्तीफे की मांग की गई। हालांकि, यूनुस सरकार ने अवामी लीग पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया, जिसे कई विश्लेषकों ने राजनीतिक प्रतिशोध माना।

    भविष्य की अनिश्चितता

    यूनुस के इस्तीफे की धमकी और हसीना की वापसी की अटकलों ने बांग्लादेश को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है। यदि यूनुस इस्तीफा देते हैं, तो सत्ता का शून्य पैदा हो सकता है, जिसका फायदा कट्टरपंथी ताकतें उठा सकती हैं। वहीं, हसीना की वापसी से हिंसा और अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। बांग्लादेश की जनता, जो पहले ही आर्थिक और सामाजिक संकटों से जूझ रही है, अब स्थिरता और शांति की उम्मीद कर रही है।

  • यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने पाक के लिए जासूसी कबूली, देश की सुरक्षा पर बड़ा खतरा

    यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने पाक के लिए जासूसी कबूली, देश की सुरक्षा पर बड़ा खतरा

    पाकिस्तान के लिए जासूसी के गंभीर आरोप में पकड़ी गईं यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा ने जांच एजेंसियों के सामने अपने सारे डार्क सीक्रेट्स उगल दिए हैं। उनके कबूलनामे ने देश भर में हड़कंप मचा दिया है। ज्योति, जो अपने यूट्यूब चैनल ‘ट्रैवल विद जो’ के लिए जानी जाती हैं, ने बताया कि वो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के इशारों पर काम कर रही थीं। उन्होंने भारत की कई गोपनीय जानकारियां सीमा पार भेजीं, जिसकी शुरुआत दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन जाने के बाद हुई। यह मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा है, और ज्योति के खुलासों ने जांच एजेंसियों को भी हैरान कर दिया है।

    पाकिस्तान हाई कमीशन से शुरू हुआ जासूसी का खेल
    ज्योति ने अपने बयान में बताया कि साल 2023 में वो पाकिस्तान का वीजा लेने के लिए दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन गई थीं। वहां उनकी मुलाकात अहसान-उर-रहीम उर्फ दानिश नाम के एक अधिकारी से हुई। दानिश के साथ उनकी बातचीत शुरू हुई, और जल्द ही वो लगातार संपर्क में आ गईं। ज्योति ने बताया कि दानिश के कहने पर वो दो बार पाकिस्तान गईं। वहां उनकी मुलाकात अली हसन नाम के एक शख्स से हुई, जिसने उनके रहने और घूमने का पूरा इंतजाम किया। अली ने ज्योति को पाकिस्तान की सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एजेंसी के अधिकारियों से मिलवाया। इनमें शाकिर और राणा शहबाज जैसे लोग शामिल थे। ज्योति ने शाकिर का नंबर ‘जट रंधावा’ के नाम से अपने फोन में सेव किया था, ताकि किसी को उनके असली मकसद का शक न हो। जांच एजेंसियों के मुताबिक, शाकिर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का एक अहम अधिकारी है।

    सोशल मीडिया के जरिए भेजीं देश विरोधी जानकारियां
    ज्योति ने अपने कबूलनामे में यह भी बताया कि वो व्हाट्सऐप, स्नैपचैट और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए पाकिस्तानी अधिकारियों से लगातार संपर्क में थीं। इन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से उन्होंने देश की कई संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान भेजीं। ज्योति ने यह भी स्वीकार किया कि वो दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन में दानिश से कई बार मिलीं और उसके इशारों पर काम करती रहीं। उनके इस बयान ने जांच एजेंसियों को चौंका दिया है, क्योंकि यह एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा प्रतीत होता है।

    देश की सुरक्षा के लिए खतरा
    ज्योति मल्होत्रा का यह मामला देश की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चेतावनी है। एक यूट्यूबर, जो अपनी ट्रैवल वीडियोज के लिए जानी जाती थी, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी के साथ जुड़ाव और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होना बेहद चिंताजनक है। जांच एजेंसियां अब इस मामले की गहराई से पड़ताल कर रही हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ज्योति ने और कौन-कौन सी जानकारियां लीक कीं और इस साजिश में कितने लोग शामिल थे।

    यह खबर न सिर्फ चौंकाने वाली है, बल्कि यह भी दिखाती है कि देश की सुरक्षा के लिए हमें कितना सतर्क रहने की जरूरत है।