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  • ममता का केंद्र पर तीखा प्रहार: ‘जय हिंद-वंदे मातरम’ पर बैन जैसी सलाह बर्दाश्त नहीं!

    ममता का केंद्र पर तीखा प्रहार: ‘जय हिंद-वंदे मातरम’ पर बैन जैसी सलाह बर्दाश्त नहीं!

    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्यसभा सचिवालय के उस बुलेटिन पर कड़ा एतराज जताया है जिसमें सांसदों को सदन के अंदर “जय हिंद”, “वंदे मातरम”, “थैंक यू” या “थैंक्स” जैसे नारे लगाने से मना किया गया था। ममता ने इसे स्वतंत्रता संग्राम के नारों का अपमान करार दिया और केंद्र सरकार पर लोकतंत्र को कुचलने का गंभीर आरोप लगाया।

    स्वतंत्रता संग्राम के नारों पर पाबंदी अस्वीकार्य

    ममता बनर्जी ने कोलकाता में संवाददाताओं से कहा, “जय हिंद और वंदे मातरम हमारे आजादी के नारे हैं। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने ‘जय हिंद’ दिया, बैंकिम बाबू ने ‘वंदे मातरम’ लिखा। इन नारों को संसद में बोलने से रोकना मतलब देश की आजादी की भावना का अपमान करना है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सांसद अपने मन की बात कह सकते हैं, तो ये राष्ट्रीय नारे क्यों नहीं बोल सकते?

    बंगाल की अस्मिता और समाज को बांटने का आरोप

    मुख्यमंत्री ने केंद्र पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा सरकार बंगाल की संस्कृति और पहचान को जानबूझकर कमजोर करना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्म के नाम पर समाज को बांटा जा रहा है और दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक हो या आम हिंदू, हर वर्ग में डर और असुरक्षा का माहौल बनाया जा रहा है।

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    CAA-NRC से नागरिकता छिनने का डर

    ममता ने CAA और NRC को फिर से मुद्दा बनाते हुए कहा कि इन कानूनों के जरिए लोगों में यह डर पैदा किया जा रहा है कि वे अपनी नागरिकता और घर खो देंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी नीतियां देश में अस्थिरता और अविश्वास को बढ़ावा दे रही हैं।

    राज्यसभा बुलेटिन विवाद ने एक बार फिर केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच तनाव को उजागर कर दिया है। ममता बनर्जी की तीखी प्रतिक्रिया से साफ है कि वे इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाती रहेंगी। अब सबकी नजरें इस पर हैं कि केंद्र सरकार और राज्यसभा सचिवालय इस विवाद पर क्या जवाब देते हैं।

  • पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट SIR पर ममता का तीखा हमला, आत्महत्या तक की नौबत!

    पश्चिम बंगाल: वोटर लिस्ट SIR पर ममता का तीखा हमला, आत्महत्या तक की नौबत!

    पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को सीधा पत्र लिखकर इस प्रक्रिया को तुरंत रोकने की मांग की है। उन्होंने इसे “खतरनाक, बिना तैयारी और अमानवीय” करार दिया है।

    तीन साल का काम तीन महीने में?

    ममता का सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो काम हर तीन साल में होता था, उसे अचानक तीन महीने में पूरा करने का दबाव क्यों? इसका सबसे ज्यादा असर बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) पर पड़ रहा है। राज्य भर में हजारों BLO दिन-रात सर्वर फेल होने, अप्रशिक्षित होने और अव्यवहारिक डेडलाइन के बीच कुचले जा रहे हैं। ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि आम लोग परेशान हैं।

    जलपाईगुड़ी में आंगनवाड़ी वर्कर ने की आत्महत्या

    सबसे दर्दनाक घटना जलपाईगुड़ी के माल इलाके की है। एक आंगनवाड़ी वर्कर, जो BLO का काम भी देख रही थी, मानसिक दबाव में आत्महत्या कर ली। ममता ने दावा किया कि ऐसी कई और घटनाएं सामने आ रही हैं। कई BLO को धमकियां मिल रही हैं, नोटिस थमाए जा रहे हैं।

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    किसान खेत में, फॉर्म कौन भरेगा?

    मुख्यमंत्री ने कृषि मौसम का भी हवाला दिया। अभी बंगाल में धान की कटाई और आलू की बुआई का पीक सीजन चल रहा है। लाखों किसान खेतों में डटे हैं। ऐसे में उनसे ऑनलाइन फॉर्म भरने की उम्मीद रखना व्यावहारिक नहीं है। अगर जल्दबाजी में प्रक्रिया चली तो लाखों वैध मतदाताओं के नाम कट जाएंगे, जिससे लोकतंत्र को गहरा नुकसान होगा।

    ममता की चार बड़ी मांगें

    1. SIR को तुरंत रोका जाए
    2. BLO को पूरी और सही ट्रेनिंग दी जाए
    3. समय सीमा को यथार्थवादी बनाया जाए
    4. पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा हो

    राज्य के कई इलाकों में लोग सड़कों पर उतरकर SIR के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस इसे चुनाव से पहले मतदाताओं को डराने-हटाने की साजिश बता रही है, जबकि विपक्ष इसे पारदर्शिता का कदम मानता है।

    फिलहाल पूरा बंगाल और चुनाव आयोग की अगली प्रतिक्रिया पर नजर टिकी है। क्या SIR रुकेगा या और तेज होगा? यह सवाल अब 2026 के रण को प्रभावित करने वाला है।

  • बिहार चुनाव: स्पेशल ट्रेनों पर सिब्बल के आरोप, ECI-BJP गठजोड़ का दावा!

    बिहार चुनाव: स्पेशल ट्रेनों पर सिब्बल के आरोप, ECI-BJP गठजोड़ का दावा!

    परिचय: चुनावी माहौल में नया विवाद

    बिहार विधानसभा चुनाव के बीच चुनाव आयोग की एक पहल ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। आयोग ने अन्य राज्यों में रह रहे बिहारी मतदाताओं को वोट डालने के लिए बिहार लौटने में मदद करने की योजना बनाई, लेकिन यह कदम विपक्षी नेताओं को खटक रहा है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और रेलवे मंत्रालय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिब्बल ने दावा किया कि यह सब बीजेपी के फायदे के लिए सुनियोजित है, जिससे निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।

    सिब्बल के मुख्य आरोप: संदिग्ध ट्रेनें और वोटरों की वापसी

    3 नवंबर को हरियाणा से बिहार के लिए चार स्पेशल ट्रेनें रवाना हुईं, जिनमें करीब 6,000 यात्री संदिग्ध परिस्थितियों में सवार थे। सिब्बल ने पूछा कि अगर ये असली बिहारी वोटर हैं, तो चुनाव से ठीक पहले स्पेशल ट्रेनों की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने आरोप लगाया कि यह ऑपरेशन बीजेपी की चुनावी रणनीति का हिस्सा है, ताकि बाहर रह रहे समर्थकों को लाकर वोटिंग प्रभावित की जाए। सिब्बल ने कहा, “चुनाव आयोग निष्पक्ष है या बीजेपी का सहयोगी बन गया?” यह सवाल आयोग की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।

    छठ पूजा का तर्क और रेल मंत्री पर सवाल

    सिब्बल ने तर्क दिया कि अगर स्पेशल सर्विस वाकई मतदाताओं की सुविधा के लिए थी, तो छठ पूजा जैसे बड़े त्योहार पर ऐसी ट्रेनें क्यों नहीं चलाई गईं? उस समय लाखों बिहारी घर लौटते हैं, लेकिन तब कोई विशेष व्यवस्था नहीं हुई। अब चुनाव के समय अचानक ट्रेनें चलाना संदेहास्पद लगता है। उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से जवाब मांगा और चुनाव आयोग की चुप्पी पर कटाक्ष किया। सिब्बल का कहना है कि आयोग की जिम्मेदारी निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना है, इसलिए इस मामले की स्वतंत्र जांच जरूरी है।

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    आयोग और सरकार की चुप्पी: आगे क्या?

    फिलहाल, रेल मंत्रालय और चुनाव आयोग की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। बिहार का चुनावी माहौल पहले से गर्म है, और सिब्बल के आरोपों ने आग में घी डाल दिया है। क्या यह स्पेशल ट्रेनें वाकई मतदाताओं की मदद के लिए हैं या बीजेपी का ‘स्पेशल प्लान’? विपक्ष इसे चुनावी धांधली का मामला बता रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे सामान्य सुविधा मान सकता है। देखना यह है कि आयोग जांच का आदेश देता है या नहीं। यह विवाद चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

  • रूस और नाटो तनाव रूसी ड्रोन की घुसपैठ के बाद यूरोप में सुरक्षा समीकरण बदलने की तैयारी

    रूस और नाटो तनाव रूसी ड्रोन की घुसपैठ के बाद यूरोप में सुरक्षा समीकरण बदलने की तैयारी

    यूरोप में रूस और नाटो के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में खबर आई कि रूसी ड्रोन नाटो की एयरस्पेस के करीब घुसपैठ करने का प्रयास कर रहे थे। इस घटना ने सुरक्षा स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यूरोप के कई देशों में अलर्ट जारी कर दिया गया है और नाटो ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।

    तुर्की का तुरंत एक्शन

    घुसपैठ की खबर मिलते ही तुर्की ने बड़ा कदम उठाया। तुर्की ने लिथुआनिया में तुरंत एक चेतावनी विमान तैनात कर दिया, ताकि किसी भी संभावित खतरे का तुरंत मुकाबला किया जा सके। तुर्की के इस कदम को यूरोप में सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी माना जा रहा है। यह कदम रूस के लिए भी स्पष्ट संदेश है कि नाटो अपने हवाई क्षेत्र की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं करेगा।

    पोलैंड के नए सुरक्षा नियम

    इस बीच पोलैंड ने भी अपने सुरक्षा नियम बदलने की योजना बनाई है। नई नीति के तहत पोलिश सेना को अधिकार दिया जा सकता है कि वह रूसी ड्रोन को सीधे मार गिरा सके, वह भी नाटो की मंजूरी के बिना। यह बदलाव न केवल पोलैंड की सुरक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि यूरोप में सामरिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है।

    यूरोप में सुरक्षा समीकरण पर असर

    ये दोनों कदम यूरोप में सुरक्षा समीकरण को पूरी तरह बदल सकते हैं। नाटो और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच, तुर्की और पोलैंड जैसे सदस्य देशों की सक्रिय भूमिका महत्त्वपूर्ण साबित होगी। इससे रूस के लिए यूरोप में अपने सैन्य और हवाई प्रयासों को बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।रूस और नाटो के बीच यह तनाव सिर्फ़ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पर भी असर डाल सकता है। यूरोप के देशों द्वारा लिए जा रहे कदम यह दर्शाते हैं कि अब सुरक्षा केवल नाटो की कमान तक सीमित नहीं है, बल्कि सदस्य देशों की सक्रिय भागीदारी और तत्काल निर्णय क्षमता भी अहम भूमिका निभा रही है। रूस के लिए यह एक सीधी चुनौती है, जबकि नाटो और यूरोप के लिए यह अवसर है कि वे अपनी रणनीति और सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करें।

  • पश्चिम बंगाल विधानसभा में हंगामा: ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच तीखी टक्कर

    पश्चिम बंगाल विधानसभा में हंगामा: ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच तीखी टक्कर

    विधानसभा में ममता बनर्जी की आक्रामक नारेबाजी

    पश्चिम बंगाल विधानसभा का विशेष सत्र आज उस समय हंगामे की भेंट चढ़ गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सदन के भीतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ममता ने “मोदी चोर, बीजेपी चोर” और “बीजेपी हटाओ, देश बचाओ” जैसे नारे लगभग बीस बार दोहराए। यह नारेबाजी करीब 40 सेकंड तक चली, जिसने विधानसभा का माहौल पूरी तरह से गरमा दिया। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिसके बाद सदन में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

    बीजेपी विधायकों का निलंबन और धक्का-मुक्की

    हंगामे के बीच विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी समेत पांच बीजेपी विधायकों को निलंबित कर दिया। इस दौरान सबसे गंभीर घटना तब हुई, जब बीजेपी विधायक शंकर घोष को सदन से बाहर निकालने की कोशिश में मार्शलों के साथ उनकी धक्का-मुक्की हो गई। इस हंगामे में शंकर घोष बेहोश होकर फर्श पर गिर पड़े और उन्हें तुरंत एम्बुलेंस से अस्पताल ले जाया गया। बीजेपी ने इस घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए और दावा किया कि यह सब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर हुआ। बीजेपी ने इसे पूरे समुदाय का अपमान करार दिया और ममता पर “मोदी समुदाय” को गाली देने का आरोप लगाया। सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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    ममता बनर्जी का पलटवार

    ममता बनर्जी ने बीजेपी के आरोपों का करारा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “बीजेपी बंगालियों के उत्पीड़न पर चर्चा नहीं करना चाहती। यह भ्रष्ट और वोट चोरों की पार्टी है।” ममता ने संसद में टीएमसी सांसदों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार का हवाला देते हुए बीजेपी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी ने उनके सांसदों को दबाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का दुरुपयोग किया। ममता ने यह भी भविष्यवाणी की कि बीजेपी की सरकार जल्द ही गिरने वाली है और अगले चुनाव में जनता बीजेपी को वोट नहीं देगी। उन्होंने कहा, “आने वाले समय में बीजेपी का एक भी विधायक विधानसभा में नहीं बचेगा।”

    विशेष सत्र का उद्देश्य और राजनीतिक गर्मी

    यह विशेष सत्र बंगाली भाषी प्रवासी मजदूरों पर कथित हमलों के विरोध में बुलाया गया था। हालांकि, सत्र शुरू होने के बाद से ही यह हंगामे और राजनीतिक टकराव का केंद्र बन गया है। पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले यह घटनाक्रम राजनीतिक माहौल को और गर्म कर रहा है। ममता बनर्जी का यह आक्रामक रुख क्या टीएमसी को फायदा पहुंचाएगा, या बीजेपी इस हमले का और तेजी से जवाब देगी? यह सवाल अब सभी के मन में है।

    आगे क्या?

    इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। ममता बनर्जी की आक्रामक रणनीति और बीजेपी के जवाबी हमले ने दोनों दलों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। अगले कुछ महीनों में दोनों पार्टियों की रणनीति और जनता की प्रतिक्रिया पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

  • उत्तर प्रदेश विधानसभा: मॉनसून सत्र में गोरखपुर विरासत गलियारा पर हंगामा

    उत्तर प्रदेश विधानसभा: मॉनसून सत्र में गोरखपुर विरासत गलियारा पर हंगामा

    मॉनसून सत्र का पहला दिन: गोरखपुर में तनाव

    उत्तर प्रदेश विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन, 11 अगस्त 2025 को, सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने गोरखपुर में निर्माणाधीन विरासत गलियारा के मुद्दे को उठाया। उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गोरखपुर के व्यापारियों से मिलने की बात कही। पांडेय ने बताया कि व्यापारियों ने अपनी दुकानों को तोड़े जाने और मुआवजे की कमी की शिकायत की थी। हालांकि, इस दौरान उनके साथ कथित तौर पर बदसलूकी हुई, जिसे उन्होंने लोकतंत्र के लिए अनुचित बताया। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की।

    पांडेय का आरोप: पुलिस और कार्यकर्ताओं की बदसलूकी

    माता प्रसाद पांडेय ने सदन में विस्तार से बताया कि गोरखपुर में उनकी गाड़ी को रोका गया और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस की गाड़ी खराब होने का बहाना बनाकर पीछे रह गई। पांड़े हाता पहुंचने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कार्यकर्ताओं ने उन्हें रोका और नारेबाजी की। उनकी गाड़ी का बोनट पीटा गया और फाटक खोलकर खींचने की कोशिश की गई। पांडेय ने कहा कि पुलिस मूकदर्शक बनी रही और बाद में उनके समर्थकों के पहुंचने पर स्थिति को नियंत्रित किया गया। उन्होंने इस घटना को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया और मुख्यमंत्री से इसकी जांच की मांग की।

    योगी का जवाब: सपा और लोकतंत्र दो अलग-अलग छोर

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांडेय के आरोपों का जवाब देते हुए समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि सपा और लोकतंत्र नदी के दो अलग-अलग छोर हैं। योगी ने सपा के शासनकाल में कथित अराजकता का जिक्र करते हुए कहा कि गोरखपुर में विरासत गलियारा क्षेत्र के विकास के लिए बनाया जा रहा है, लेकिन सपा इसमें बाधा डाल रही है। उन्होंने दावा किया कि गोरखपुर के व्यापारियों ने ही पांडेय का विरोध किया, क्योंकि सपा के शासन में व्यापारियों से गुंडा टैक्स वसूला जाता था। योगी ने यह भी कहा कि उन्होंने स्वयं विरासत गलियारा का दौरा किया था और व्यापारियों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया था।

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    सपा का विरोध और जांच की मांग

    योगी के जवाब से नाराज सपा सदस्यों ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया। माता प्रसाद पांडेय ने दोहराया कि पांड़े हाता, जटाशंकर चौराहा और घंटाघर पर हुई घटनाओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर वे दोषी हैं तो उन पर कार्रवाई हो, अन्यथा दोषियों को सजा मिले। सपा सदस्यों ने धमकी देने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन लोकतंत्र को बचाना सबकी जिम्मेदारी है।

    विकास बनाम राजनीति

    गोरखपुर का विरासत गलियारा विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इस मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तनाव ने विधानसभा में गरमागरम बहस को जन्म दिया। यह घटना न केवल गोरखपुर के व्यापारियों की चिंताओं को उजागर करती है, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में विकास और विरोध के बीच के टकराव को भी दर्शाती है।

  • ट्रंप के दावों पर कांग्रेस का हमला: मोदी की चुप्पी पर सवाल

    ट्रंप के दावों पर कांग्रेस का हमला: मोदी की चुप्पी पर सवाल

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बार-बार यह दावा करने कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध को रोका, भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बयान पर कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बीजेपी और पीएम मोदी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों से बीजेपी एक फिल्म बना रही थी, जिसे वे ‘मुकद्दर का सिकंदर’ बता रहे थे, लेकिन अब यह ‘नरेंदर का सरेंडर’ बनकर सामने आई है। खेड़ा ने कहा कि बहादुरी कोई इंजेक्शन से नहीं आती, यह चरित्र से प्रकट होती है, और बीजेपी-आरएसएस का इतिहास कायरता से भरा हुआ है।

    ट्रंप के दावों पर सवाल

    पवन खेड़ा ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे पर भी निशाना साधा, जिसमें उन्होंने 12 बार कहा कि उनकी मध्यस्थता के कारण भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध रुका। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, “ट्रंप का फोन आया और नरेंद्र मोदी मिमियाते हुए सरेंडर कर गए। 22 दिनों में ट्रंप ने एक दर्जन बार दावा किया कि उन्होंने सीजफायर कराया, लेकिन पीएम मोदी एक बार भी जवाब नहीं दे सके। यह ‘नाम नरेंद्र, काम सरेंडर’ की हकीकत है।” उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं।

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    चीन के मुद्दे पर भी हमला

    कांग्रेस प्रवक्ता ने चीन के मुद्दे पर भी पीएम मोदी को घेरा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार चीन के सामने डरी हुई है। खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा, “अगर आप सचमुच बहादुर हैं, तो चीन से मुकाबले की नीति बनाइए। केवल डायलॉग देने से कुछ नहीं होगा।” उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी को डायलॉग देने की ट्रेनिंग अभिनेता परेश रावल से मिली है, जिन्हें बीजेपी ने सांसद भी बनाया था। खेड़ा ने विदेश मंत्री एस जयशंकर पर भी कटाक्ष किया, उन्हें “पराजय शंकर” कहकर संबोधित किया और कहा कि वे चुप हैं क्योंकि बोलने पर ट्रोल हो जाते हैं।

    चीन के एयरबेस और सरकार की चुप्पी

    खेड़ा ने चीन द्वारा बांग्लादेश की सीमा के पास एयरबेस बनाने पर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां डर से प्रेरित हैं, और डर से कोई मजबूत नीति नहीं बनती। कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह सवालों से डरती है और विपक्ष के सामने आने से बच रही है।

    प्रधानमंत्री सेना नहीं, जवाबदेह नेता

    बीजेपी के इस आरोप कि कांग्रेस सेना का अपमान कर रही है, खेड़ा ने जवाब दिया कि प्रधानमंत्री पर सवाल उठाना सेना पर सवाल उठाने के बराबर नहीं है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री देश के नेता हैं, सेना नहीं। उनसे सवाल पूछना हमारा अधिकार है। अगर हम अपने पीएम से सवाल नहीं पूछेंगे, तो क्या पाकिस्तान से पूछेंगे?”

    विपक्ष से डरती है सरकार

    खेड़ा ने कहा कि विपक्ष संसद के विशेष सत्र की मांग कर रहा है, लेकिन सरकार डर के मारे इसे बुलाने से कतरा रही है। उन्होंने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, “वे विपक्ष से डरते हैं, प्रेस कॉन्फ्रेंस से डरते हैं, और सवालों से डरते हैं, क्योंकि उनके पास सच का सामना करने की हिम्मत नहीं है।”

  • राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ बयान पर बीजेपी का तीखा हमला: ऑपरेशन सिंदूर विवाद

    राहुल गांधी के ‘सरेंडर’ बयान पर बीजेपी का तीखा हमला: ऑपरेशन सिंदूर विवाद

    कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को ‘सरेंडर’ कहने वाले बयान ने भारतीय राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है। बीजेपी ने इस बयान को सेना का अपमान बताते हुए राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी की गंभीरता और परिपक्वता पर सवाल उठाए, साथ ही उनके बयान को खतरनाक मानसिकता का परिचायक बताया।

    त्रिवेदी ने कहा कि एक ओर भारत का सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें कांग्रेस के सांसद भी शामिल हैं, वैश्विक मंचों पर भारत का पक्ष मजबूती से रख रहा है। वहीं, दूसरी ओर राहुल गांधी ‘स्तरहीन और ओछी’ टिप्पणियों के जरिए नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा को ठेस पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को ‘सरेंडर’ से जोड़कर न केवल अपनी अपरिपक्वता दिखाई, बल्कि भारतीय सेना का अपमान भी किया।” त्रिवेदी ने जोर देकर कहा कि यह बयान इतना गंभीर है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख या किसी आतंकी संगठन ने भी ऐसी बात नहीं कही।

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    बीजेपी सांसद ने कांग्रेस से सवाल किया कि क्या राहुल गांधी का यह बयान सेना का अपमान नहीं है? उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर की घोषणा भारतीय सेना ने की थी, न कि बीजेपी ने। त्रिवेदी ने राहुल गांधी के बयान को राष्ट्र की एकजुटता के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह बयान न केवल राजनीतिक रूप से गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर भी हानिकारक है।

    इस विवाद ने भारतीय राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है। जहां बीजेपी ने इसे सेना और देश के सम्मान से जोड़ा, वहीं कांग्रेस के लिए यह बयान एक बड़े विवाद का कारण बन गया है। त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को अपने शब्दों के लिए जवाब देना होगा, क्योंकि यह बयान भारत की छवि को वैश्विक स्तर पर कमजोर कर सकता है।

  • पहलगाम हमले के बाद कांग्रेस-BJP में तीखी सियासी जंग

    पहलगाम हमले के बाद कांग्रेस-BJP में तीखी सियासी जंग

    पहलगाम हमले के बाद कांग्रेस-BJP में तीखी सियासी जंग
    पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद कांग्रेस ने BJP पर तुर्की-चीन जैसे देशों से संबंधों को लेकर सवाल उठाए। ऑपरेशन सिंदूर के निलंबन के बाद शुरू हुई सियासत।

    कांग्रेस का BJP पर पलटवार, तुर्की-चीन के मुद्दे पर सवाल
    पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद देश में सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तुर्की और चीन जैसे देशों के साथ राजनयिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर सवाल खड़े किए हैं…

    BJP का कांग्रेस पर जनभावनाओं से कटे होने का आरोप
    BJP की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि तुर्की और अजरबैजान जैसे देशों ने पाकिस्तान का समर्थन किया है…

    कांग्रेस का तुर्की और चीन पर BJP को घेरने का प्रयास
    कांग्रेस ने BJP के आरोपों का जवाब देने में देर नहीं की। पवन खेड़ा ने X पर लिखा कि BJP को यह सवाल उठाने से पहले अपनी सरकार से पूछना चाहिए कि क्या तुर्की के साथ सभी राजनयिक और व्यापारिक संबंध तोड़ दिए गए हैं…

    ऑपरेशन सिंदूर और सियासी तनातनी
    जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले महीने हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात को ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। इस ऑपरेशन में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया…

    तुर्की और चीन के X हैंडल बहाली पर विवाद
    कांग्रेस ने तुर्की के trtworld और चीन के news जैसे X हैंडल्स की बहाली पर भी सवाल उठाए। पवन खेड़ा ने BJP के संगठन महामंत्री बीएल संतोष से पूछा कि इन हैंडल्स पर प्रतिबंध क्यों केवल चार घंटे में हटा लिया गया…

    सियासी बयानबाजी से देश में तनाव
    पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों दलों की बयानबाजी ने देश में सियासी तनाव को बढ़ा दिया है। जहां BJP कांग्रेस को जनभावनाओं से कटा हुआ बता रही है, वहीं कांग्रेस सरकार की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल उठा रही है…