प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मणिपुर यात्रा के महज़ दो दिन बाद ही राज्य में हालात फिर से गरमा गए हैं। कुकी-जो काउंसिल ने साफ कर दिया है कि इम्फाल से दीमापुर को जोड़ने वाले नेशनल हाईवे-02 पर स्वतंत्र आवाजाही की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह बयान मणिपुर में पहले से मौजूद तनाव और असुरक्षा को और गहरा करता दिखाई दे रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स पर आपत्ति
कुकी-जो काउंसिल का कहना है कि मीडिया में उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। कुछ रिपोर्ट्स में यह बताया गया था कि दोनों समुदायों – मैतेई और कुकी-जो – के बीच समझौते की स्थिति बनी है। जबकि हकीकत में अब तक किसी भी तरह का समझौता नहीं हुआ है। यही वजह है कि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि किसी भी सूरत में बफर ज़ोन को पार नहीं किया जा सकता।
बफर ज़ोन पर सख़्त रुख
काउंसिल ने चेतावनी दी है कि अगर बफर ज़ोन के नियमों का उल्लंघन हुआ तो शांति और सुरक्षा की स्थिति और बिगड़ सकती है। मणिपुर में पिछले एक साल से हिंसा और सामुदायिक टकराव की स्थिति बनी हुई है। बफर ज़ोन को लेकर यह विवाद दोनों समुदायों के बीच गहरे अविश्वास को दर्शाता है।
पीएम मोदी की यात्रा और उम्मीदें
प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में मणिपुर के दौरे पर गए थे, जहां उन्होंने राज्य में शांति और विकास की अपील की थी। इस यात्रा से उम्मीद की जा रही थी कि शायद हालात बेहतर होंगे। लेकिन कुकी-जो काउंसिल के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि हालात अभी सामान्य होने से काफी दूर हैं।
शांति प्रक्रिया की चुनौती
मणिपुर में शांति बहाल करना केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। एक ओर जहां मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच संवाद की कमी है, वहीं दूसरी ओर बार-बार ऐसे बयान और घटनाएं तनाव को और भड़का रही हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक दोनों समुदाय आपसी विश्वास नहीं कायम करते, तब तक शांति प्रक्रिया अधूरी रहेगी।

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