विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ ने रिलीज़ होते ही पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल ला दिया है।भाजपा का आरोप है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फिल्म से डर गई हैं और उन्होंने इसे पर्दे पर रोकने का प्रयास किया। भाजपा का कहना है कि यह फ्रीडम ऑफ स्पीच पर हमला है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
टीएमसी का पलटवार
लेकिन दूसरी तरफ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने पलटवार किया है। उनका कहना है कि सरकार ने किसी तरह का बैन नहीं लगाया।
वे कहते हैं कि यह फैसला थिएटर मालिकों का है, जिन्होंने अपने हिसाब से फिल्म को न दिखाने का विकल्प चुना।
विवाद के कारण और सवाल
अब सवाल उठता है कि अगर सरकार ने बैन नहीं लगाया, तो थिएटर मालिक अचानक क्यों पीछे हट गए? क्या उनके ऊपर किसी तरह का दबाव था? या फिर यह पूरी रणनीति फिल्म को ज्यादा चर्चा में लाने की सियासी चाल थी?विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के विवादों से फिल्म को मीडिया में लगातार जगह मिलती है और राजनीतिक दल इसे जनता के बीच संदेश देने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
राजनीतिक जंग बन गया मुद्दा
मामला अब सिर्फ फिल्म का नहीं रहा।यह पूरी तरह से राजनीतिक जंग बन चुका है।भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाकर ममता सरकार को घेरने की कोशिश कर रही है। वहीं टीएमसी हर आरोप को झूठा और भ्रामक बता रही है।राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला आने वाले समय में और साफ और स्पष्ट हो सकता है।

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