नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर: वडनगर से गुजरात के मुख्यमंत्री बनने तक की कहानी
नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं। इसी के साथ नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर भी एक अहम पड़ाव से जुड़ता है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद 2026 में सत्ता के शीर्ष पर उनके 25 साल पूरे हो रहे हैं। बीजेपी ने इस मौके पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ चलाने की घोषणा की है। लेकिन मुख्यमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी का सफर कई सामाजिक, संगठनात्मक और राजनीतिक पड़ावों से होकर गुजरा।
नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर: वडनगर से शुरू हुई कहानी
नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर गुजरात के वडनगर से शुरू हुआ, जहां उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ। स्कूल के दिनों में वे पिता की चाय की दुकान पर मदद करते थे। 1962 के भारत-चीन युद्ध का भी उनके जीवन पर प्रभाव पड़ा और उन्होंने सैनिक स्कूल में दाखिले के लिए आवेदन किया, हालांकि दाखिला नहीं हो सका। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान उनकी वेबसाइट के अनुसार, वे मेहसाणा रेलवे स्टेशन पर सैनिकों को चाय पिलाते थे। करीब 17 साल की उम्र में उन्होंने घर छोड़ दिया और आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़े।
आध्यात्मिक यात्रा से सेवा के रास्ते तक
1968 में नरेंद्र मोदी बेलूर मठ पहुंचे और रामकृष्ण मिशन से जुड़ने की इच्छा जताई, लेकिन उन्हें पढ़ाई पूरी करने की सलाह दी गई। इसके बाद उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की। 1969 में उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान समेत कई क्षेत्रों का दौरा किया। राजकोट के रामकृष्ण मिशन में स्वामी आत्मस्थानंद ने उन्हें संन्यास के बजाय सेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने की सलाह दी। करीब 18 महीने की यात्रा के बाद 1970 में वे वडनगर लौटे और फिर अहमदाबाद चले गए। यहीं से नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर संगठनात्मक दिशा में आगे बढ़ा।
RSS से भाजपा तक पहुंचा नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर
अहमदाबाद में पुराने परिचितों और आरएसएस कार्यकर्ताओं से मुलाकात के बाद नरेंद्र मोदी संगठन के काम में सक्रिय हुए। 1971 में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान दिल्ली में जनसंघ के सत्याग्रह में शामिल हुए और गिरफ्तार होकर कुछ समय तिहाड़ जेल में रहे। 1972 में उन्होंने आरएसएस के लिए काम करने का फैसला किया। इसके बाद नवनिर्माण आंदोलन और आपातकाल के दौरान भी वे सक्रिय रहे। 1987 में वे भाजपा के गुजरात संगठन से जुड़े और संगठन सचिव की जिम्मेदारी संभाली। 1995 में गुजरात विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद 1998 में उन्हें राष्ट्रीय महासचिव संगठन बनाया गया। इस तरह नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर गुजरात से निकलकर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा।
7 अक्टूबर 2001: मुख्यमंत्री बनने के साथ नया अध्याय
नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर 7 अक्टूबर 2001 को एक बड़े पड़ाव पर पहुंचा, जब उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उस समय गुजरात जनवरी 2001 के भुज भूकंप से हुए नुकसान और पुनर्वास की चुनौती से गुजर रहा था। गुजरात राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के जरिए प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए मालिक-आधारित पुनर्वास मॉडल लागू किया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस पुनर्वास व्यवस्था का अनुभव बाद में देश के आपदा प्रबंधन ढांचे में भी इस्तेमाल हुआ और 2005 के आपदा प्रबंधन अधिनियम के संदर्भ में इसे जोड़ा गया। यही वह पड़ाव था, जहां नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर संगठनात्मक राजनीति से सीधे सरकार चलाने की जिम्मेदारी तक पहुंचा।
