TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद: ममता बनर्जी ने सौंपे नए नाम और सिंबल के विकल्प
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TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद के बीच ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश का जवाब दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार रात 11:36 बजे पार्टी की ओर से तीन पसंदीदा नाम और चुनाव चिह्न के विकल्प आयोग को सौंपे गए। यह जवाब कड़े विरोध के साथ दिया गया। चुनाव आयोग ने इससे पहले दोनों गुटों को शुक्रवार सुबह 11 बजे तक अपनी पसंद के नाम और सिंबल देने का निर्देश दिया था।
TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद में आयोग का अंतरिम आदेश
TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद तब सामने आया जब चुनाव आयोग ने गुरुवार को पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा क्षेत्रों में 6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव को लेकर अंतरिम आदेश जारी किया। आयोग ने ममता बनर्जी और दूसरे गुट, दोनों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और उसके आरक्षित ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया। दोनों गुटों को उपचुनाव के लिए अलग नाम और चुनाव आयोग की सूची में उपलब्ध अलग चुनाव चिह्न चुनने को कहा गया है।
TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद में दोनों गुट आमने-सामने
TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद के बीच आयोग ने अपने आदेश में कहा कि उसके रिकॉर्ड के अनुसार पार्टी में दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं। एक गुट का नेतृत्व ममता बनर्जी कर रही हैं, जबकि दूसरे गुट का नेतृत्व अरूप रॉय के पास बताया गया है। दोनों ही खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे हैं। आयोग ने कहा कि इस विवाद पर चुनाव चिह्न संबंधी 1968 के आदेश के पैराग्राफ 15 के तहत ठोस फैसला करना होगा।
TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद पर बागी गुट का रुख
बागी खेमे ने चुनाव आयोग के अंतरिम आदेश का स्वागत किया है। बागी गुट के नेता और TMC विधायक अखरुज्जमां अंसारी के मुताबिक, उनका गुट अंतरिम व्यवस्था का पालन करेगा। उन्होंने भरोसा जताया कि अंतिम रूप से पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न उसे मिल जाएगा। वहीं, ममता बनर्जी के गुट ने नए नाम और सिंबल के विकल्प आयोग को विरोध के साथ सौंपे हैं।
TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद की आगे की प्रक्रिया
TMC नाम और चुनाव चिह्न विवाद के बीच फिलहाल दोनों गुटों को आगामी उपचुनाव के लिए अलग पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा। विवाद की अंतिम स्थिति पर चुनाव आयोग को आगे फैसला करना है। यह मामला पार्टी के भीतर हुए विभाजन और दोनों पक्षों की ओर से पार्टी पर नियंत्रण के दावे से जुड़ा है। ममता बनर्जी के गुट की ओर से बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका भी दायर की गई है और इस मामले से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट में भी लंबित बताया गया है।
