जब देश की राजधानी दिल्ली बारिश से बेहाल थी, ट्रैफिक जाम और पानी भरी सड़कों से लोग जूझ रहे थे — ठीक उसी समय देश की उत्तरी सीमा पर, कुपवाड़ा के केरन सेक्टर में हमारी सेना आतंक से लड़ रही थी। रविवार सुबह दो आतंकियों को सीमा पार घुसने की कोशिश में ढेर कर दिया गया।यह हमला अचानक नहीं था, बल्कि एक महीना पहले गुरेज़ सेक्टर में हुई घुसपैठ की नाकाम कोशिश का दूसरा भाग था। और इस बार सेना ने सिर्फ आतंकी नहीं मारे — बल्कि एक सख़्त संदेश भी भेजा: “घुसपैठ की कोई गारंटी नहीं, लेकिन वापसी की एक ही गारंटी है लकड़ी का डिब्बा।”
‘ह्यूमन GPS’ आतंक का गाइड
31 अगस्त को गुरेज़ सेक्टर में जो दो आतंकी मारे गए थे, उनमें से एक की उम्र 60 साल थी। नाम नहीं पता, लेकिन काम साफ था ‘ह्यूमन GPS’।उसका काम था आतंकियों को रास्ता दिखाना, जैसे किसी शादी में लाइट वाले चलते हैं… लेकिन फर्क ये कि ये रास्ता गोलियों की रौशनी में दिखाया जाता था।ये दिखाता है कि अब घुसपैठ एक प्लानिंग के साथ की जा रही है, और पाकिस्तान की तरफ से सिर्फ बंदूक वाले नहीं, बल्कि गाइड, लोकेशन एक्सपर्ट्स और सप्लाई देने वाले भी भेजे जा रहे हैं।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ नाम भी सटीक, निशाना भी
सेना ने इस बार ऑपरेशन का नाम रखा है ऑपरेशन सिंदूर।सिंदूर’ यानी सीमा को लाल नहीं, शांत रखने का प्रतीक।इस ऑपरेशन के तहत सिर्फ घुसपैठिए नहीं मारे जा रहे, बल्कि उन्हें सपोर्ट देने वाले नेटवर्क को भी टारगेट किया जा रहा है — चाहे वो गाइड हो, रसद पहुंचाने वाला हो या रास्ता बताने वाला।सेना का फोकस अब सिर्फ गोलीबारी नहीं, पूरे आतंकवादी इंफ्रास्ट्रक्चर को नेस्तनाबूद करना है।
कब रुकेंगे ये घुसपैठिए?
हर बार यही सवाल होता है ये कब आएंगे?अब सवाल बदल गया है ये कब रुकेंगे?सीमा पर लगातार घुसपैठ की कोशिशें दिखाती हैं कि पाकिस्तान अभी भी शांति के मूड में नहीं है। LOC (लाइन ऑफ कंट्रोल) को मानना उसके लिए सिर्फ एक कागज़ी बात है, जमीनी हकीकत में वो अब भी भारत को अस्थिर करने की कोशिश में जुटा है..सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सेना की कार्रवाई अपने आप में सबसे बड़ा संदेश है।
सेना जाग रही है ताकि देश चैन की नींद सो सके
जब शहरों में लोग बारिश से परेशान थे, सोशल मीडिया पर मीम्स बन रहे थे, वहीं ऊंची पहाड़ियों पर, सुनसान जंगलों में हमारी सेना खड़ी थी हर घुसपैठ का जवाब देने के लिए।हम सो सकते हैं, क्योंकि वो नहीं सोते।हम चैन से जी सकते हैं, क्योंकि वो हर वक़्त सीमा पर मौत को मात दे रहे हैं।

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