भारत के पूर्व कप्तान और ‘प्रिंस ऑफ कोलकाता’ के नाम से मशहूर सौरव गांगुली ने इंग्लैंड के खिलाफ चल रही पांच टेस्ट मैचों की सीरीज में बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव को न खिलाए जाने पर निराशा जताई है। गांगुली का मानना है कि कुलदीप को लॉर्ड्स, मैनचेस्टर और बर्मिंघम जैसे अहम टेस्ट मैचों में मौका देना चाहिए था। उनके अनुसार, कुलदीप की अनूठी स्पिन गेंदबाजी टेस्ट मैच के चौथे और पांचवें दिन निर्णायक साबित हो सकती थी। गांगुली ने इस बात पर जोर दिया कि बिना शानदार स्पिन गेंदबाजी के किसी भी टीम के लिए टेस्ट मैच के अंतिम दो दिनों में विपक्षी टीम को आउट करना बेहद मुश्किल होता है।
मैनचेस्टर टेस्ट का उदाहरण
गांगुली ने मैनचेस्टर टेस्ट का उदाहरण देते हुए अपनी बात को और स्पष्ट किया। इस टेस्ट में भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए मैच ड्रॉ करा लिया। गांगुली ने बताया कि उस पिच पर ज्यादा टर्न नहीं था, लेकिन इंग्लैंड के पास एक भी प्रभावशाली स्पिनर नहीं था, जिसके चलते वे भारत के 20 विकेट लेने में असफल रहे। गांगुली का कहना है कि अगर कुलदीप को मौका मिला होता, तो उनकी कलाई की स्पिन गेंदबाजी इंग्लैंड के बल्लेबाजों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती थी। उन्होंने कहा, “कुलदीप एक ऐसे गेंदबाज हैं, जिन्हें भारत को भविष्य में जरूर मौका देना चाहिए। उनकी गेंदबाजी किसी भी परिस्थिति में खेल को पलट सकती है।”
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रविंद्र जडेजा और वाशिंगटन सुंदर की भूमिका
इस सीरीज में रविंद्र जडेजा ने गेंद और बल्ले दोनों से शानदार प्रदर्शन किया है। उनकी ऑलराउंड क्षमता ने भारतीय टीम को मजबूती दी। दूसरी ओर, वाशिंगटन सुंदर को भी उनकी बल्लेबाजी और गेंदबाजी की दोहरी क्षमता के कारण प्लेइंग-11 में जगह मिली। भारतीय टीम प्रबंधन विदेशी पिचों पर ऐसे खिलाड़ियों को प्राथमिकता देता है, जो गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी में भी योगदान दे सकें। यही कारण है कि कुलदीप को इस सीरीज में एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला और वे पूरी सीरीज में बेंच पर ही रहे।
कुलदीप की अनदेखी: एक गलती?
कुलदीप यादव को दुनिया के सबसे खतरनाक स्पिनरों में से एक माना जाता है। उनकी कलाई की स्पिन गेंदबाजी किसी भी मैदान पर विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान करने की क्षमता रखती है। गांगुली का मानना है कि कुलदीप को बाहर रखना एक बड़ी भूल थी। उन्होंने कहा, “टेस्ट क्रिकेट में आखिरी दो दिन बहुत अहम होते हैं, और ऐसे में कुलदीप जैसे गेंदबाज खेल को पूरी तरह बदल सकते हैं।” गांगुली ने यह भी जोड़ा कि भारतीय टीम को भविष्य में कुलदीप जैसे खिलाड़ियों पर भरोसा दिखाना होगा ताकि वे अपनी प्रतिभा को पूरी तरह से प्रदर्शित कर सकें।
भविष्य की उम्मीदें
गांगुली की टिप्पणियों ने भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। कुलदीप यादव जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी को लगातार नजरअंदाज करना निश्चित रूप से सवाल उठाता है। क्या भारतीय टीम प्रबंधन भविष्य में कुलदीप को अधिक मौके देगा? क्या उनकी गेंदबाजी को टेस्ट क्रिकेट में वह महत्व मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं? ये सवाल आने वाले समय में भारतीय क्रिकेट के लिए अहम होंगे। गांगुली की सलाह और कुलदीप की प्रतिभा को देखते हुए, यह जरूरी है कि भारतीय टीम उनके कौशल का सही उपयोग करे ताकि वे बड़े मंच पर अपनी छाप छोड़ सकें।

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