August 29, 2026

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क्या ₹25 करोड़ में दिल्ली की हवा होगी साफ? IIT Kanpur की क्लाउड सीडिंग तकनीक पर नई उम्मीद

हर सर्दी, दिल्ली और NCR एक ही संकट से जूझते हैं—बढ़ता हुआ प्रदूषण, धुंध, सांस लेने की परेशानी और खतरनाक AQI स्तर। लेकिन इसी बीच IIT Kanpur के डायरेक्टर प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल ने एक ऐसा प्रस्ताव रखा है, जिसने उम्मीद की एक नई किरण जगा दी है। प्रश्न बड़ा है क्या सिर्फ़ ₹25 करोड़ खर्च करके दिल्ली की हवा साफ़ की जा सकती है?

क्लाउड सीडिंग क्या है? वैज्ञानिक तकनीक की आसान व्याख्या

क्लाउड सीडिंग एक तकनीक है जिसमें बादलों में खास केमिकल जैसे सिल्वर आयोडाइड या सोडियम क्लोराइड छिड़ककर कृत्रिम बारिश कराई जाती है।इस बारिश का उद्देश्य

  • हवा में मौजूद धूल, स्मॉग और प्रदूषण को नीचे गिराना
  • वातावरण को साफ़ करना
  • AQI स्तर को कम करना

कई देशों में यह तकनीक पहले से सफल रही है, और भारत में भी इसे सीमित स्तर पर टेस्ट किया गया है।प्रोफेसर मनिंद्र अग्रवाल के अनुसार, यदि सर्दियों के पूरे मौसम (लगभग 3 महीने) में लगातार क्लाउड सीडिंग की जाए,
तो इसका कुल खर्च सिर्फ़ ₹25 करोड़ के आसपास आएगा।इन 25 करोड़ में शामिल है:

  • क्लाउड सीडिंग विमान का उपयोग
  • केमिकल सामग्री
  • मौसम विश्लेषण और वैज्ञानिक मॉनिटरिंग
  • ऑपरेशन टीम और कंट्रोल सेंटर

दिल्ली जैसी महानगर के लिए यह लागत बहुत अधिक नहीं मानी जाती, खासकर तब जब प्रदूषण से हर साल लाखों लोग बीमार होते हैं, और अरबों रुपये स्वास्थ्य पर खर्च होते हैं।

कर्नाटक और महाराष्ट्र में मिल चुकी है सफलता

IIT Kanpur की यह तकनीक नई नहीं है।इसे पहले कर्नाटक और महाराष्ट्र में सफलतापूर्वक टेस्ट किया जा चुका है।
इन राज्यों में बारिश को बढ़ाने सूखे इलाकों में राहत पहुंचाने प्रदूषण घटाने जैसे प्रयोगों में सकारात्मक नतीजे मिले थे।इसी अनुभव के आधार पर वैज्ञानिक अब मानते हैं कि दिल्ली-NCR के लिए यह तकनीक गेमचेंजर साबित हो सकती है।

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