Hormuz Crisis
Hormuz Crisis: मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम Strait of Hormuz पर दबाव बढ़ा दिया है। फरवरी के अंत से इस जलमार्ग से गुजरने वाले तेल और गैस टैंकरों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। बताया जा रहा है कि ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से भुगतान युआन में करने की मांग कर रहा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस व्यापार के लिए जीवनरेखा माना जाता है। इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ रहा है, जो खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में LPG आयात करते हैं। भारत की करीब 60% LPG सप्लाई इसी क्षेत्र से आती है, इसलिए इस संकट ने घरेलू गैस बाजार में दबाव बढ़ा दिया है।
Hormuz Crisis का इस तरह हो रहा भारत पर असर
इस स्थिति का असर अब भारत के कई राज्यों में दिखने लगा है। Karnataka और Delhi जैसे क्षेत्रों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। कुछ जगहों पर ब्लैक मार्केट में LPG की कीमत 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की खबरें हैं। छोटे होटल और ढाबे मजबूरी में फिर से लकड़ी या कोयले के चूल्हों का सहारा ले रहे हैं। हालांकि राहत की बात यह है कि भारत सरकार ने कूटनीतिक स्तर पर बातचीत कर दो LPG टैंकरों को सुरक्षित रास्ता दिलाने में सफलता हासिल की है।
इस संकट से गरमाई देश की सियासत
जानकारी के लिए बता दे कि Hormuz Crisis को लेकर देश की राजनीति भी गरमा गई है। Narendra Modi सरकार पर विपक्ष हमलावर है और Indian National Congress ने गैस की कतारों का मुद्दा उठाया है। जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक संकटों के लिए केवल सरकार को जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है और उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Jawaharlal Nehru के दौर में भी ऐसे अंतरराष्ट्रीय कारणों का जिक्र किया। सरकार ने फिलहाल रिफाइनरियों का उत्पादन 10% तक बढ़ाने, घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने और जमाखोरी रोकने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि देश में कुल सप्लाई अभी स्थिर है, लेकिन हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।
