पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में चल रहे व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच मानवाधिकार उल्लंघन और कथित सैन्य कार्रवाई को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्टों के अनुसार, मुजफ्फराबाद सहित कई इलाकों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में कई लोगों के मारे जाने और दर्जनों के घायल होने की खबरें सामने आई हैं। हालात को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों द्वारा बल प्रयोग और कथित गोलीबारी की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच भारत सरकार ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पाकिस्तान पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और मानवाधिकार उल्लंघनों से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए झूठा प्रचार और भ्रामक सूचनाएं फैला रहा है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoJK में नागरिकों पर कथित दमन और बल प्रयोग की रिपोर्टें बेहद चिंताजनक हैं। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह इन घटनाओं पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद करता है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय पाकिस्तान को उसके कथित मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराएगा। साथ ही भारत ने इसे पाकिस्तान की “सुनियोजित दुष्प्रचार रणनीति” करार दिया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, PoJK के मीरपुर, रावलकोट, गिलगित-बाल्टिस्तान और अन्य क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन तेजी से फैल रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज किया है, जबकि प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगाया है। इस बीच यह मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गूंजने लगा है, जहां ब्रिटेन में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर विरोध प्रदर्शन हुए और कुछ सांसदों ने भी चिंता जताई है। भारत ने एक बार फिर कहा है कि पाकिस्तान को अपने ही नागरिकों के खिलाफ कथित अत्याचारों पर जवाब देना होगा और दुनिया को वास्तविक स्थिति को समझना चाहिए।