पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित अंदरूनी कलह और संभावित टूट की अटकलों के बीच पार्टी के वरिष्ठ सांसद सौगत रॉय का बड़ा बयान सामने आया है। सौगत रॉय ने दावा किया कि कुछ सांसद यह कह रहे हैं कि उन्होंने किसी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर नहीं किए, लेकिन इसके बावजूद उनके नाम का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को “अनैतिक” और “गलत” करार देते हुए कहा कि मीडिया में हस्ताक्षरों की सूची प्रसारित हो रही है, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि वास्तव में 18, 19 या 20 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि दो-तिहाई बहुमत के फॉर्मूले की चर्चा हो रही है, लेकिन उनकी दिलचस्पी केवल इस बात में है कि जो कुछ भी हो रहा है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
सौगत रॉय ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह पूरा मामला कथित “ऑपरेशन लोटस” का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जिन सांसदों के नाम सामने आ रहे हैं, वे सभी तृणमूल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतकर संसद पहुंचे हैं और पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी ने उनके लिए प्रचार किया था। रॉय ने सवाल उठाया कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि अब कुछ सांसद पार्टी छोड़ने की सोच रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि कुछ नेता केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर रहे हैं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने की योजना बना रहे हैं। रॉय के मुताबिक भाजपा अपनी संख्या बढ़ाने के लिए विपक्षी दलों के सांसदों को अपने पक्ष में लाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने शुभेंदु अधिकारी की सक्रियता का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि वे इस कथित अभियान को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं।
इसी बीच शुक्रवार को 19 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाले तीन पन्ने सामने आने से राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। दावा किया जा रहा है कि ये सांसद लोकसभा में पार्टी के मुख्य और बहुमत वाले समूह का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि अभी तक इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। कथित दस्तावेज़ में काकोली घोष और शताब्दी रॉय के अलावा बापी हलदर, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश वर्मा बसुनिया, असित मल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी (देव), जून मालिया, पार्थ भौमिक, खलीलुर रहमान, ताहिर खान, युसूफ पठान, मिताली बाग, माला रॉय, रचना बनर्जी और सयोनी घोष के नाम शामिल बताए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम ने बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में TMC के भीतर की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।