September 2, 2026

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Pakistan Temple Demolition: नारोवाल में 125 साल पुराने हिंदू मंदिर को गिराने का आरोप

Pakistan Temple Demolition

Pakistan Temple Demolition

Pakistan Temple Demolition: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नारोवाल जिले में एक 100 से 125 साल पुराने हिंदू पूजास्थल को ढहाए जाने के आरोपों ने विवाद खड़ा कर दिया है। सिराज गांव में स्थित इस मंदिर को लेकर अल्पसंख्यक संगठनों ने चरमपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान यानी टीएलपी से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि मंदिर की जमीन पर कब्जा करने और पास के मदरसे का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। हालांकि, प्रशासन और संबंधित अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए भारी बारिश के कारण पुराने और जर्जर ढांचे के ढहने की बात कही है।

अल्पसंख्यक संगठनों ने लगाया साजिश का आरोप 

स्थानीय हिंदू प्रतिनिधियों और अल्पसंख्यक संगठनों का दावा है कि मंदिर को कथित तौर पर सोची-समझी साजिश के तहत गिराया गया। उनके अनुसार, मंदिर की करीब 1,000 वर्ग मीटर भूमि को लेकर विवाद था। पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी के अध्यक्ष असलम परवेज सहोत्रा ने आरोप लगाया कि मंदिर विध्वंस में टीएलपी से जुड़े लोग शामिल थे। वहीं, हिंदू समुदाय के नेता रतन लाल ने मंदिर परिसर के आसपास भय का माहौल होने की बात कही और प्रशासन पर सुरक्षा व अवैध कब्जे हटाने में विफल रहने का आरोप लगाया।

क्या है तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान?

Pakistan Temple Demolition विवाद के बाद टीएलपी एक बार फिर चर्चा में है। यह पाकिस्तान का एक कट्टरपंथी और अति-दक्षिणपंथी इस्लामी राजनीतिक संगठन है। संगठन के संस्थापक खादिम हुसैन रिजवी की वर्ष 2020 में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद संगठन का नेतृत्व उनके परिवार के सदस्यों के हाथों में बताया जाता है। टीएलपी पाकिस्तान के सख्त ईशनिंदा कानूनों पर अपने कट्टर रुख और हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के कारण लंबे समय से विवादों में रहा है।

हिंसक प्रदर्शनों और सियासी पैठ से बनी ताकत

टीएलपी पहले आसिया बीबी ईशनिंदा मामले के दौरान व्यापक रूप से चर्चा में आया था। संगठन पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर ईसाई और अहमदिया समुदाय को निशाना बनाने के आरोप भी लगते रहे हैं। पाकिस्तान में प्रतिबंधों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बावजूद संगठन का समर्थक आधार मजबूत बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, टीएलपी ने 2018 और 2024 के आम चुनावों में भी भाग लिया और लाखों वोट हासिल किए, जिससे उसकी राजनीतिक और सामाजिक पैठ का अंदाजा लगाया जाता है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक पूजा स्थलों की सुरक्षा पर सवाल

नारोवाल मंदिर विवाद ने पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों की सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्टों में मंदिरों को निशाना बनाए जाने के पीछे जमीन कब्जाने, आर्थिक स्वार्थ, ऐतिहासिक तनाव, धार्मिक कट्टरता और प्रशासनिक विफलता जैसे कारणों का उल्लेख किया गया है। फिलहाल मंदिर के ढहने को लेकर दो अलग-अलग दावे सामने हैं। एक पक्ष इसे कथित तौर पर सुनियोजित कार्रवाई बता रहा है, जबकि प्रशासन इसे भारी बारिश के कारण जर्जर ढांचे का गिरना बता रहा है। ऐसे में इस मामले ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर नई बहस छेड़ दी है।

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