बिहार वो राज्य जहां विकास का वादा चुनावी जुमला बन जाता है और नेता बदलते हैं, लेकिन हालात नहीं। और अब 2025 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने एक बार फिर खुद को ‘संजोने’ की कोशिश की है। CWC यानी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में बिहार को लेकर कई रणनीतियाँ बनीं कुछ पुराने चेहरे याद किए गए, कुछ नए नामों पर चर्चा हुई, और कुछ नेता दिल्ली से भेजे जाने की योजना बनी।लेकिन असली सवाल ये है क्या कांग्रेस अब भी केवल बैठकों की पार्टी रह गई है?
CWC की बैठक नीयत साफ, चेहरे गायब
कांग्रेस ने अपनी वर्किंग कमेटी की बैठक में बिहार को “प्राथमिकता” दी है।महागठबंधन से आगे सोचने की बात हुईसंगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने की बात हुई और युवाओं को मौका देने का दावा भी हुआलेकिन दिक्कत ये है मैदान में उतरने वाले नेता अब भी गायब हैं।पोस्टरों में नेता दिख रहे हैं, लेकिन जनता अब पोस्टर से नहीं, परफॉर्मेंस से वोट देती है।
क्या कांग्रेस अकेले लड़ेगी? या फिर “महागठबंधन – चैप्टर 3”?
सबसे बड़ा सस्पेंस यही है क्या कांग्रेस 2025 में बिहार में अकेले चुनाव लड़ेगी?या फिर एक बार फिर ‘महागठबंधन’ के तीसरे संस्करण में शामिल होकर RJD की छांव में खड़ी रहेगी?CWC बैठक में इस पर कोई साफ बात नहीं हुई। हां, इतना ज़रूर तय है कि कांग्रेस को अब अहसास हो गया है कि “सहारे की राजनीति” लंबे वक्त तक नहीं चलती।
ज़मीनी हकीकत जनता अब भाषण नहीं, नतीजे चाहती है
बिहार की जनता ने हर दल को मौका दिया है RJD को मौका दिया, लालू युग देखाJDU और BJP की जोड़ियाँ देखीं, टूटन भी देखीऔर कांग्रेस? बस मीटिंग करती रही।अब जनता थक चुकी है। उसे अब कैंडिडेट नहीं, करामात चाहिए।लोग पूछ रहे हैं कांग्रेस का चेहरा कौन होगा?कौन सा नेता गली-मोहल्ले में दिखेगा?क्या इस बार सिर्फ दिल्ली से भेजे गए नेता ही भाषण देंगे?या बिहार के अपने नेता भी सामने आएंगे?

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