RSS के 100 साल: पीएम मोदी ने जारी किया विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का

आरएसएस के शताब्दी समारोह के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया। 100 साल की लंबी यात्रा में संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आपदा राहत और सामाजिक कल्याण में अहम योगदान दिया। जानिए इस ऐतिहासिक अवसर की पूरी जानकारी।

आरएसएस के 100 साल का ऐतिहासिक महत्व

1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने महाराष्ट्र के नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की नींव रखी। संघ का उद्देश्य था देश में नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना। आज, 100 साल पूरे होने पर संघ की यात्रा ने भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

आरएसएस की स्थापना के बाद से ही संगठन ने नागरिकों में देशभक्ति, नैतिकता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना को बढ़ावा दिया। आजादी के बाद और आधुनिक भारत में संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में अपनी सेवाएं प्रदान की हैं।

पीएम मोदी द्वारा डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी

RSS के 100 साल: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर डाक टिकट और सिक्के में ऐसा क्या  खास, पीएम मोदी ने किया जारी - News18 हिंदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1 अक्टूबर को दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आरएसएस के शताब्दी समारोह में डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी किया। स्मारक सिक्का शुद्ध चांदी का है और 100 रुपये मूल्य का है। इसमें ‘भारत माता’ के सामने पारंपरिक मुद्रा में खड़े आरएसएस स्वयंसेवक को दर्शाया गया है। सिक्के के पिछले हिस्से पर तीन स्वयंसेवक भारत माता को सलामी देते हुए दिखाए गए हैं।

विशेष डाक टिकट में उन राहत कार्यों को भी दिखाया गया है, जिन्हें आरएसएस ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान लोगों की मदद के लिए अंजाम दिया। इस अवसर का शीर्षक रखा गया है – ‘मातृभूमि की सेवा के लिए सदा समर्पित’।

संघ का योगदान: शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत

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पिछली एक सदी में आरएसएस ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। संघ के स्वयंसेवक बाढ़, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं में राहत और पुनर्वास कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं। इसके अलावा, संघ से जुड़े संगठनों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने, स्थानीय समुदायों को मजबूत करने और जनभागीदारी बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाई है।

संघ का यह योगदान न केवल सामाजिक कार्यों तक सीमित है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में भी सहायक रहा है।

पीएमओ की प्रतिक्रिया और राष्ट्रीय संदेश

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने बताया कि आरएसएस को भारत के राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए जनता से जुड़ा अनोखा आंदोलन माना जाता है। संघ मातृभूमि के प्रति समर्पण, अनुशासन, आत्म-संयम, साहस और वीरता का संदेश देता है। PMO के अनुसार, शताब्दी समारोह न केवल संघ की ऐतिहासिक उपलब्धियों का सम्मान है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक यात्रा और राष्ट्रीय एकता में संघ के स्थायी योगदान को भी उजागर करता है।

आरएसएस के 100 साल का शताब्दी समारोह संगठन की लंबी और समर्पित यात्रा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी किया गया डाक टिकट और स्मारक सिक्का इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाता है। संघ ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण और आपदा राहत के क्षेत्र में अपना योगदान दिया है और भविष्य में भी राष्ट्रीय विकास और सांस्कृतिक एकता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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