INDIA गठबंधन से आम आदमी पार्टी की दूरी, केजरीवाल की नई सियासी चाल या विपक्ष में दरार?

नई दिल्ली-देश की राजनीति एक बार फिर करवट ले रही है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने अब साफ कर दिया है कि वह INDIA गठबंधन का हिस्सा नहीं है। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक टीवी चैनल से बातचीत में बड़ा बयान देते हुए कहा INDIA गठबंधन लोकसभा चुनाव तक के लिए था। अब चुनाव खत्म हो चुके हैं और हमने हरियाणा, दिल्ली, पंजाब और गुजरात में अकेले लड़ाई लड़ी। हम अब इस गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष को एकजुट रखने की कोशिशें जारी थीं। ऐसे में सवाल उठता है क्या AAP की ये दूरी विपक्षी एकता को कमजोर करेगी? या फिर ये अरविंद केजरीवाल की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है?

बाहर अकेले, अंदर गठजोड़?

संजय सिंह ने यह भी संकेत दिए कि संसद के भीतर AAP अब भी TMC, DMK जैसी विपक्षी पार्टियों के साथ सामंजस्य बना सकती है। इसका मतलब है । सड़क पर अलग राह, सदन में संभावित साथ यह रणनीति यह बताने के लिए काफी है कि AAP पूरी तरह से विपक्ष से अलग नहीं हो रही है, लेकिन वह अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता और पहचान बनाए रखना चाहती है।

बीजेपी पर फिर तीखा हमला

संजय सिंह ने बीजेपी को ‘कायरों की पार्टी’ कहा और आरोप लगाया कि वे राजनीतिक दबाव बनाने के लिए ईडी जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा हम न डरे हैं, न झुके हैं। ये लड़ाई अब और तेज़ होगी। संजय सिंह का तेवर वही पुराना था । लेकिन रणनीति अब अलग दिख रही है।

रॉबर्ट वाड्रा पर भी साधा निशाना

जब उनसे रॉबर्ट वाड्रा (प्रियंका गांधी के पति) पर सवाल किया गया। तो उन्होंने कहा बीजेपी पिछले 10 सालों से बस ‘जीजाजी-जीजाजी’ चिल्ला रही है। अगर कुछ साबित नहीं कर पाए, तो ये उनकी नाकामी है।यह बयान दिखाता है कि AAP अब बीजेपी पर व्यक्तिगत और सीधी ज़ुबानी लड़ाई के मूड में है । लेकिन कांग्रेस से कुछ हद तक सामंजस्य रखने की कोशिश भी जारी है।

क्या INDIA गठबंधन बिखर रहा है?

AAP का यह कदम कई बड़े सवाल खड़े करता है:

  • क्या AAP का अलग होना INDIA गठबंधन को कमजोर करेगा?
  • क्या यह विपक्ष की रणनीति में दरार की शुरुआत है?
  • या यह ‘अलग चलो, ताकतवर बनो’ की राजनीति है?

INDIA गठबंधन वैसे भी चुनावों में खास असर नहीं दिखा पाया। अब जब दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में AAP का स्वतंत्र जनाधार है, तो शायद पार्टी यही दिखाना चाहती है कि वह गठबंधन की मोहताज नहीं है।

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