Almora Electric Flying Vehicle
Almora Electric Flying Vehicle: उत्तराखंड के अल्मोड़ा में इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल के प्रोटोटाइप का सफल परीक्षण किया गया है। Hapida Sky Private Limited के संस्थापक रवि तम्ता ने खुले मैदान में कंपनी के ऑल-इलेक्ट्रिक HAPIDA SKYNeX प्रोटोटाइप को उड़ाकर दिखाया। इस तकनीक को खास तौर पर पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में परिवहन की समस्या को देखते हुए विकसित किया गया है। इलेक्ट्रिक तकनीक पर आधारित इस फ्लाइंग व्हीकल को हिमालयी क्षेत्रों में सड़क से जुड़ी लंबी दूरी और कठिन यात्राओं का विकल्प बनाने की दिशा में एक अहम प्रयोग माना जा रहा है।
40 किलोमीटर का सफर 10-15 मिनट में पूरा करने का दावा
HAPIDA SKYNeX को विकसित करने के पीछे सबसे बड़ी वजह पहाड़ी इलाकों में यात्रा का लंबा समय है। कंपनी के मुताबिक, जिस दूरी को सड़क मार्ग से तय करने में करीब 90 मिनट लग सकते हैं, उसे यह इलेक्ट्रिक फ्लाइंग व्हीकल लगभग 10 से 15 मिनट में पूरा कर सकता है। अगर यह तकनीक व्यावहारिक स्तर पर सफल होती है तो हिमालयी क्षेत्रों में आपातकालीन सेवाओं, पर्यटन और स्थानीय परिवहन के लिए नए विकल्प खुल सकते हैं। खासकर उन इलाकों में जहां घुमावदार और संकरी पहाड़ी सड़कों के कारण कम दूरी भी तय करने में काफी समय लगता है।
ड्रोन तकनीक को मॉडिफाई कर तैयार किया गया प्रोटोटाइप
रवि तम्ता ने HAPIDA SKYNeX को विकसित करने के लिए संशोधित ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किया है। यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक सिस्टम पर आधारित है, जिससे पारंपरिक ईंधन से होने वाले प्रदूषण को कम करने की संभावना है। तम्ता ने इस प्रोजेक्ट के विचार पर कई वर्षों तक काम किया और बड़े स्तर पर वित्तीय सहयोग के बिना इसे आगे बढ़ाने की कोशिश की। अल्मोड़ा में खुले मैदान में किया गया परीक्षण इस प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, हालांकि अभी इसे बड़े पैमाने पर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए कई तकनीकी और नियामकीय चरण पार करने होंगे।
पहाड़ी परिवहन और इमरजेंसी सेवाओं में हो सकता है इस्तेमाल
इलेक्ट्रिक एयर मोबिलिटी की यह तकनीक हिमालयी क्षेत्रों के लिए कई मायनों में उपयोगी हो सकती है। दुर्गम गांवों तक तेजी से पहुंच, मेडिकल इमरजेंसी, राहत और बचाव अभियान तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों में ऐसे फ्लाइंग व्हीकल का इस्तेमाल संभावित रूप से किया जा सकता है। जीरो-एमिशन डिजाइन होने के कारण यह पर्यावरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, इसकी सुरक्षा, उड़ान क्षमता, बैटरी तकनीक, मौसम संबंधी चुनौतियों और संचालन लागत जैसे पहलुओं का विस्तृत परीक्षण जरूरी होगा।
2028 के इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी लक्ष्य से जुड़ी उम्मीद
भारत में इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी और एडवांस्ड एयर मोबिलिटी को लेकर तेजी से काम हो रहा है और 2028 तक इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में HAPIDA SKYNeX जैसे स्वदेशी प्रोटोटाइप इस क्षेत्र में नई संभावनाएं दिखाते हैं। हालांकि, प्रोटोटाइप से बड़े पैमाने पर उत्पादन तक पहुंचना बड़ी चुनौती होगी। मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, निवेश, सुरक्षा प्रमाणन, एयर ट्रैफिक नियम और बड़े स्तर पर संचालन जैसी चुनौतियों का समाधान करना होगा। अल्मोड़ा में हुआ यह परीक्षण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम माना जा सकता है।