अयोध्या: श्रीराम मंदिर निर्माण 5 जून 2025 तक पूरा, प्राण प्रतिष्ठा की तैयारी

अयोध्या में ऐतिहासिक श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है और 5 जून 2025 तक पूर्ण होने की उम्मीद है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने एक साक्षात्कार में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंदिर के राम दरबार की मूर्तियों की प्राण प्रतिष्ठा 3 से 5 जून 2025 तक आयोजित होगी। इस समार के साथ ही मंदिर परिसर में बने सात अन्य मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा भी उसी दिन होगी। यह समारोह भव्य होने की उम्मीद है, लेकिन इस बार अतिथि सूची में बदलाव देखने को मिलेगा।

भव्य समारोह की तैयारियां

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि राम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य अनुष्ठान 5 जून को होगा, जबकि इसके लिए धार्मिक अनुष्ठान 3 जून से शुरू होंगे। पिछले साल 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का समारोह संपन्न हुआ था। इस बार का समारोह भी उतना ही भव्य होगा, लेकिन इसका स्वरूप अलग होगा। मिश्रा ने कहा, “प्राण प्रतिष्ठा समारोह हमेशा भव्य होते हैं, क्योंकि इसमें भगवान की प्रतिष्ठा और आह्वान किया जाता है।” हालांकि, इस बार पुरोहित और अतिथि सूची में बदलाव होगा, ताकि समारोह को एक नया रूप दिया जा सके।

वीआईपी को निमंत्रण नहीं

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस बार समारोह में राज्यों या केंद्र सरकार के वीआईपी को आमंत्रित न करने का निर्णय लिया है। इसके बजाय, विभिन्न संप्रदायों के आध्यात्मिक गुरुओं को बुलाने पर विचार किया जा रहा है। मिश्रा ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय समारोह को और अधिक आध्यात्मिक और समावेशी बनाने के लिए लिया गया है। इससे समारोह में धार्मिक भावना और भक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी।

मंदिर निर्माण की प्रगति

मिश्रा ने बताया कि मंदिर का निर्माण कार्य 5 जून 2025 तक पूरा हो जाएगा, सिवाय मंदिर के निचले हिस्से में बनने वाले भगवान राम की कथा को दर्शाने वाले भित्ति चित्रों के। ये भित्ति चित्र मंदिर की शोभा बढ़ाएंगे और भगवान राम के जीवन और उनके आदर्शों को चित्रित करेंगे। निर्माण कार्य की गति और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि मंदिर न केवल भव्य, बल्कि टिकाऊ और ऐतिहासिक महत्व का भी प्रतीक बने।

कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं

मंदिर निर्माण को लेकर किसी भी राजनीतिक मंशा से इनकार करते हुए नृपेंद्र मिश्रा ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई राजनीतिक चाल या उद्देश्य है। यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हुआ है और 500 साल से अधिक के संघर्ष के बाद यह क्षण आया है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा का समारोह पूरी तरह से धार्मिक और सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए है।

मंदिर जनता के लिए खुलेगा

प्राण प्रतिष्ठा समारोह के बाद मंदिर के नए हिस्से जनता के लिए खोल दिए जाएंगे। मिश्रा ने बताया कि 5 जून के समारोह के एक सप्ताह के भीतर श्रद्धालु भगवान राम के दर्शन कर सकेंगे। इससे देश-विदेश से आने वाले लाखों भक्तों को मंदिर के दर्शन और पूजा का अवसर मिलेगा। मंदिर परिसर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगा।

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